आत्मशुद्धि व निरोगी शरीर के लिए योग करें: आर्यिका सौम्यनन्दिनी

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कोटा। श्री दिगम्बर जैन मंदिर महावीर नगर विस्तार योजना में पावन चातुर्मास कर रही आर्यिका सौम्यनन्दिनी माताजी ने रविवार को शरद पूर्णिमा पर णमोकार महामंत्र का जाप कराया। प्रवचन करते हुए माताजी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति हर समय ध्यान में लगा रहता है, जिस विषय में उसकी एकाग्रता है वही उसका ध्यान है।

परंतु जैन दर्शन के अनुसार जो तत्वों से अनजान है, चित्त राग द्वेष से पीड़ित है और जिसकी प्रवृत्ति स्वतंत्र है वह ध्यान योग्य नहीं है। आत्मा की तृप्ति के लिए जो भीतर भरा हुआ है वह हटाने पर ही शुभ ध्यान होगा। उन्होंने कहा कि दुख बोओगे तो दुख ही काटोगे।

आज का मनुष्य यह नहीं सोचता कि हम देश के लिए ,उसकी उन्नति के लिए, सुरक्षा के लिए कुछ करें। अपितु अपने लिए भोग की सामग्री एकत्र करने में लगा रहता है। उन्होंने श्रावकों को आत्मशुद्धि व निरोगी शरीर के लिए अर्हम योग का संदेश दिया।