JEE Mains 2020: क्या बढ़ पाएगी छात्राओं की भागीदारी

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कोटा। जेईई मैंस जनवरी-2020 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया गत 10 अक्टूबर को समाप्त हो गई। फीस जमा कराने की प्रक्रिया 11 अक्टूबर अंतिम तारीख थी। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया समाप्त होने के पश्चात एक यक्ष प्रश्न उभर कर सामने आता है कि क्या वर्ष-2019 में इंजीनियरिंग क्षेत्र में बिटियाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को सफलता मिलेगी? क्या जेईई मैंस जनवरी-2020 में 2019 के सापेक्ष आवेदन करने वाली बिटियाओं की संख्या बढ़ पाएगी?

कैरियर पॉइंट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट देव शर्मा ने बताया कि वर्ष-2019 में जेईई मैंस जनवरी- 2019 प्रारंभ होने से पूर्व नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने रजिस्टर्ड विद्यार्थियों की सूचना एक ऑफिशियल नोट द्वारा 7 जनवरी 2019 को वेबसाइट पर जारी की थी। देव शर्मा ने बताया कि जनवरी-2019 बी-टेक के लिए कुल 929198 विद्यार्थियों ने रजिस्टर किया था उनमें से महिला अभ्यर्थियों की संख्या मात्र 286706 थी। प्रतिशत के आधार पर यह संख्या मात्र 30% थी।

निश्चित तौर पर यह आंकड़े उत्साहजनक नहीं थे किंतु वर्ष-2019 में महिला अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर वर्ष-2020 में इनके सुधरने की संभावना है।कयास लगाए जा रहे हैं कि पिछले वर्ष के सापेक्ष देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परीक्षा जेईई मैंस जनवरी-2020 में महिला अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ेगी।

देव शर्मा ने बताया कि वर्ष-2019 के आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो नीट-2019 की मेडिकल प्रवेश परीक्षा कुल 14 लाख अभ्यर्थियों में से लगभग 8 लाख महिला अभ्यर्थियों ने भाग लिया था जबकि जेईई मेंस जनवरी-2019 में लगभग 9 लाख अभ्यर्थियों में से महिला अभ्यर्थियों की संख्या लगभग सिर्फ 3 लाख थी।अर्थात मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भागीदारी का प्रतिशत 55% रहा था जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में कि हम प्रतिशत मात्र 30% था।

देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में शुमार 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीटेक पाठ्यक्रम मैं दाखिला निश्चित तौर पर गौरव की बात है। किसी भी महिला अभ्यर्थी का आईआईटी में दाखिला अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए प्रेरक होता है। उपरोक्त सोच पर कार्य करते हुए आईआईटी काउंसिल द्वारा सत्र 2019-20 में 17% सुपरन्यूमरी सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया था।

यदि सीटों की संख्या के संदर्भ में बात की जाए तो कुल 2415 सीटें वर्ष-2019 में महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थीं। जेईई एडवांस- 2019 सफल 38705 विद्यार्थियों में से 5356 महिला अभ्यर्थी थीं। अर्थात लगभग 2 में से एक महिला अभ्यर्थी को आईआईटी में सीट मिलना तय था। देव शर्मा ने बताया कि आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मंडी तथा आईआईटी गांधीनगर द्वारा महिला अभ्यर्थियों की काउंसलिंग हेतु जून-2019 में विशेष सत्रों का भी आयोजन किया गया था। निश्चित तौर पर उपरोक्त सार्थक प्रयासों के परिणाम वर्ष-2020 में देखने को मिलेंगे।

गणित के सापेक्ष बायोलॉजी में अधिक है महिला अभ्यर्थियों की रुचि
देव शर्मा ने बताया कि यदि इंजीनियरिंग शिक्षा में महिला अभ्यर्थियों की संख्या का सापेक्ष अनुपात मेडिकल शिक्षा के तुल्य ले जाना है तो निश्चित तौर पर सेकेंडरी स्तर पर महिला अभ्यर्थियों के मध्य गणित विषय को रुचिकर बनाने के प्रयास करने होंगे। आंकड़ों का अध्ययन किया जाए तो पाया जाता है कि महिला अभ्यर्थियों की रुचि या तो भाषा संबंधी विषयों में अधिक होती है या फिर बायोलॉजी विषय में। गणित विषय में सेकेंडरी स्तर से ही महिला अभ्यर्थियों की रुचि कम होती है।