चंदन हमें जीवन जीने की सीख देता है: आर्यिका सौम्यनन्दिनी

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कोटा। श्री दिगम्बर जैन मंदिर महावीर नगर विस्तार योजना में पावन चातुर्मास कर रही आर्यिका सौम्यनन्दिनी माताजी ने प्रवचन करते हुए गुरूवार को तत्वार्थ सूत्र का वाचन कराया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का क्रोध एवं अहंकार का तो आसानी से पता चल जाता है, लेकिन मायाचारी किसी को दिखाई नहीं देती है।

कपट को छोड़ सरलता का भाव व्यक्ति को आध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करता है। सरलता हमें हमारे मन की मलीनता को खत्म कर जीवन को सुगंधित करने की सीख देती है। जिस प्रकार चंदन को अच्छी तरह से घिसने के बाद ही उसे भगवान पर लगाया जाता है या फिर माथे पर तिलक लगाते हैं, उसी तरह मनुष्य को अपने भीतर के क्रोध कषाय, छल-कपट आदि को खत्म कर चंदन की तरह सुगंधित जीवन जीने का ज्ञान देता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन से 8 तरह के मद त्याग करें। मनुष्य अपने जीवन से आठ तरह के मद का त्याग करे, तभी उसके जीवन में सम्यक दर्शन की प्राप्ति संभव है। इन आठ मदों में ज्ञानम, पूजाम, कुलम, जातिम, बलम, वृद्धिम, तप, बपु शामिल हैं।

ज्ञान के मद का त्याग, पूजनीय होने के अभिमान का त्याग, उच्च जाति के होने के अभिमान का त्याग, बड़े कुल के होने के घमंड का त्याग, बलवान होने के अभिमान का त्याग, धन-सम्पति के अभिमान का त्याग, तपस्वी होने के अभिमान का त्याग और किसी भी अन्य से ज्यादा सुंदर व स्वस्थ शरीर होने के अभिमान का त्याग करना चाहिए।