कोटा के होस्टल्स में कोचिंग छात्रों का शोषण, हो रही अवैध वसूली

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कोटा। कोटा के होस्टल्स का काला सच जो आज तक बाहर नहीं आया। छत्तीसगढ़ की एनजीओ संचालिका ने आज हॉस्टलों के अंदर का सच बाहर लाने की हिम्मत की है। वह भी तब, जब उनके साथ बीती। जो भी इन होस्टल्स की कारगुजारियों की पोल खोलने की कोशिश करता है। उनको डरा-धमका कर उनका मुंह बंद कर दिया जाता है।

रायपुर छत्तीसगढ़ के सामाजिक संगठन सोशल ऑर्गेनाईजेशन फॉर ट्रांसफोर्मेशन की मुखिया सुमन मुथा ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि कोटा के कुछ हॉस्टल संचालक एवं प्रबंधक छात्रों पर अनावश्यक दबाव बना कर शोषण कर रहे हैं। मुथा ने इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र रोड़ नम्बर 1 पर स्थित एस. बिरला छात्रावास को उदाहरण देते हुए कहा कि छात्रों को छोटे छोटे कारणों से परेशान किया जाता है।

एसओटी की अध्यक्ष सुमन मूथा ने कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल को ज्ञापन देकर कहा कि कोटा में बाहरी राज्यों से डेढ़ लाख कोचिंग विद्यार्थी अध्ययन करने आते हैं लेकिन यहां के हॉस्टल संचालक बच्चों के साथ मनमानी वसूली कर उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जिससे बच्चे मानसिक अवसाद के शिकार हो रहे हैं। इस पर जिला कलक्टर ने हॉस्टल एसासिएशन को फोन कर महिला को तत्काल राहत दिलाने के निर्देश दिये।

मूथा ने पत्रकारों को बताया कि रोड नंबर-1 इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एस.बिरला हॉस्टल में 250 कोंचंग विद्यार्थी रहते हैं। यहां वे कमरा नं. 312 में अपने बेटे केवन्ना मूथा के साथ रह रही थी। हॉस्टल में मासिक किराया 21 हजार रूपये है, कमरे में विद्यार्थी के साथ ठहरने पर अभिभावकों से प्रतिदिन 500 रू. किराया लिया जाता है।

इस दौरान हॉस्टल में छोटे-छोटे कारण बताकर बच्चों से मनमानी वसूली भी की जा रही है। हॉस्टल में बल्ब, पंखा, दीवार खराब होने, कुर्सी टूटने, टॉयलेट सीट टूटने जैसे कार्यों के लिये भी बच्चों से दो से तीन गुना अतिरिक्त राशि वसूल की जा रही है, जिसकी कोई रसीद तक नहीं दी जाती है।

छात्र की मां को धमकाया
उन्होंने बताया कि बेटा 27 मई को होने वाली जेईई-एडवांस्ड परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पढाई करते हुये वह कुर्सी से गिरा, जिससे कुर्सी टूट गई, तो उससे 1500 रू. की राशी मांगी गई। मां सुमन ने हॉस्टल संचालक से कहा कि कि नई कुर्सी वो 600 रू. में मंगवाकर दे सकती है तो हॉस्टल मैनेजर सोनी ने उन्हें धमकी देते कहा कि राशि जमा करवा दें अन्यथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा देंगे। (देखिए वीडियो )

पंजाब के कोचिंग छात्र की मां ने बताया कि उन्होंने नेट बैकिंग से बच्चे का किराया जमा करवाने के बाद हॉस्टल मैनेजर उनको बार-बार परेशान करता रहा कि किराया जमा नहीं हुआ है। इस पर उन्होंने बैंक से दस्तावेज लाकर दिखाए। एक अन्य छात्र से टायलेट सीट में क्रेक आने पर 6 हजार रू. जमा करने को कहा। हॉस्टल में हर टूट-फूट का पैसा बच्चों से जबरन वसूला जा रहा है। प्रत्येक बच्चे से 40 हजार रूपये सिक्योरिटी राशि भी जमा करवाई जाती है।

बिजली खर्च की राशि दोगुना क्यों
कोचिंग विद्यार्थियों ने बताया कि उनसे हॉस्टल संचालक मासिक किराये के अलावा बिजली खर्च 12 रू प्रति यूनिट की दर से वसूल कर रहे हैं। जबकि राज्य सरकार ने कोटा शहर में आवासीय क्षेत्रों में संचालित सभी हॉस्टल में बिजली की दरें व्यावसायिक से हटाकर घरेलू करने के निर्देश दिये थे।

विद्युत वितरण निगम द्वारा आवासीय क्षेत्रों में हॉस्टल को घरेलू दर से बिल दिये जा रहे हैं लेकिन कोचिंग संचालक मुनाफा कमाते हुये विद्यार्थियों से व्यावसायिक दरों से 12 रू. प्रति यूनिट वसूल कर रहे हैं, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी पर 2 से 5 हजार रू. का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।

हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मिततल ने बताया कि लैंडमार्क सिटी के सभी हॉस्टल में अब घरेलू दरें लागू कर दी गई है। शहर के अन्य आवासीय क्षेत्रों में भी घरेलू दरों से 7.60 रू प्रति यूनिट लिया जा रहा है। यदि कोई आवासीय हॉस्टल संचालक विद्यार्थी से बिजली की व्यावसायिक दरें वसूल करते हैं तो उनकी शिकायत जिला प्रशासन को कर सकते हैं।

हॉस्टल में हेल्पलाइन नंबर नहीं
एसओटी की अध्यक्ष सुमन मूथा ने कहा कि सभी राज्यों के अभिभावक जिस विश्वास के साथ अपने बच्चों को कोटा में पढाई के लिये भेज रहे हैं, यहां के हॉस्टल संचालक उनको सोने के अंडे देने वाली मुर्गी मानकर मनमानी वसूली कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उक्त हॉस्टल में 250 बच्चों से प्रतिवर्ष 52 लाख किराया तथा 1 करोड़ रू. सिक्योरिटी राशि जमा होती है। लेकिन उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।

वे जल्द ही एक जनहित याचिका दायर कर कोटा में विद्यार्थियों से की रही मनमानी लूट के खिलाफ आवाज उठाएंगी। प्रत्येक हॉस्टल में जिला प्रशासन के हेल्प लाइन नंबर अंकित हों। अभिभावक बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिये यह शोषण बर्दाश्त कर रहे हैं। बच्चों से दो-तीन गुना पैसे वसूलने से वे अवसाद में आ जाते हैं। जिला प्रशासन ऐसे हॉस्टल के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर बाहरी राज्यों के बच्चों को मानसिक राहत दिलाये।