चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 9.2 फीसद बढ़ने का अनुमान

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नई दिल्ली। 2020-21 में 7.3% के संकुचन की तुलना में चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 9.2 फीसद बढ़ने का अनुमान है। सरकार की ओर से यह आंकड़े जारी किए गए हैं। शुक्रवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मुख्य रूप से कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के प्रदर्शन में सुधार की वजह से यह वृद्धि देखी जा सकती है। एनएसओ ने कहा 2021-22 के लिए राष्ट्रीय आय का पहला एडवांस अनुमान, 2020-21 में 7.3 फीसद के संकुचन की तुलना में 2021-22 के दौरान वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 9.2 फीसद वृद्धि होने का अनुमान है।

कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर से चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पर 0.4 प्रतिशत का प्रतिकूल असर पड़ सकता है और इसके 4.5 से 5.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साख निर्धारण एजेंसी इक्रा रेटिंग्स ने बुधवार को यह अनुमान लगाया। कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के सामने आने के बाद से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

पिछले दिनों रेटिंग एजेंसी इकरा ने कहा था कि ओमिक्रोन की वजह से विभिन्न राज्यों में लगाए जा रहे प्रतिबंधों से चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च, 2022) में आर्थिक रिकवरी प्रभवित हो सकती है। हालांकि इकरा ने ओमिक्रोन संकट के बावजूद भारत की जीडीपी विकास दर में कोई बदलाव नहीं किया। इकरा ने इस विकास दर को पहले की तरह ही नौ प्रतिशत के स्तर पर कायम रखा। इकरा का यह अनुमान अन्य रिसर्च एजेंसी के मुकाबले पहले से ही कम है।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 9.5 प्रतिशत की दर से विकास का अनुमान लगाया। इकरा का अनुमान है कि कोरोना महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को वित्त वर्ष 2021-22 में 39.3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता। इकरा के मुताबिक अगले साल मार्च तक भारत में 85-90 प्रतिशत व्यस्क वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके होंगे। बूस्टर डोज के साथ 15-18 साल के बच्चों के लिए भी वैक्सीन की घोषणा कर दी गई है। हालांकि यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि वैक्सीन कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन पर कितना असरदायक साबित होगी और उससे तीसरी लहर को किस हद तक दूर रख पाने में कामयाबी मिलती है।