ट्रंप की धमकी से कच्चा तेल 2% से ज्यादा उछलकर 94 डॉलर के करीब पहुंचा

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से ईरान का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी के बाद तेल की कीमतें करीब एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.16 डॉलर यानी 2.4 फीसदी बढ़कर 93.78 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह 24 जुलाई के बाद ब्रेंट क्रूड का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2 डॉलर यानी 2.3 फीसदी बढ़कर 87.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह भी 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है।

डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार शाम ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन देशों को चेतावनी दी, जो किसी भी तरह से तेहरान की मदद कर रहे हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर आर्थिक कार्रवाई और अलग-थलग करने की बात कही है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वह सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और सरकार की आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी देंगे। ईरान में 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद युद्ध शुरू हुआ था।

इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही को रोक दिया और पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इससे दुनिया के कई हिस्सों में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

तेल ट्रेडिंग सलाहकार Ritterbusch and Associates ने एक नोट में कहा कि फिलहाल ट्रंप की नई धमकियों से ईरान के अपने सबसे बड़े दबाव के साधन यानी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण छोड़ने की संभावना कम है। इसके लिए अमेरिका की ओर से बड़े समझौते की जरूरत पड़ सकती है।

ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

Ritterbusch and Associates ने कहा कि फिलहाल इस संकट का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है और युद्ध से पहले के स्तर के आसपास कीमतों के लौटने की उम्मीद भी अभी नहीं दिख रही है।

होर्मुज से तेल की आवाजाही काफी कम
बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या एक दिन पहले के मुकाबले लगभग समान रही। हालांकि, युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में यहां से जहाजों की आवाजाही अब भी काफी कम है। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था।

रिफाइंड ईंधन की सप्लाई पर भी असर
ईरान युद्ध का असर सिर्फ कच्चे तेल की सप्लाई पर नहीं पड़ा है। रिफाइंड ईंधन की उपलब्धता और उसके भंडार पर भी दबाव बढ़ा है। रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता कम होने से ईंधन सप्लाई प्रभावित हो रही है।