सांगोद क्षेत्र को पेयजल विकास कार्यों के लिए 18.78 करोड़ रुपए की सौगात

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कोटा। Sangod Drinking Water Project: ऊर्जा मंत्री एवं सांगोद विधायक हीरालाल नागर के सतत प्रयासों से सांगोद विधानसभा क्षेत्र में जल संकट के स्थायी समाधान हेतु बुनियादी ढांचे को मजबूती दी जा रही है। इसी कड़ी में क्षेत्र में सिंचाई, भू-जल संवर्धन और पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कुल 18.78 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं।

इन स्वीकृतियों के अंतर्गत विभिन्न ग्रामीण अंचलों में 17.50 करोड़ रुपए की लागत से एनिकट निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य तथा 1.28 करोड़ रुपए की लागत से 34 नए हैंडपंप एवं 10 सिंगल फेज ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे।

जल संरक्षण एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के तहत स्वीकृत 17.50 करोड़ रुपए से दर्जनभर से अधिक गांवों में ढांचागत सुधार होगा। इसमें 6 करोड़ रुपए की लागत से मंगलपुरा में एनिकट निर्माण, गिरधपुरा (बैरवा बस्ती) में एनिकट क्षमता विस्तार तथा ग्राम बोरीना खुर्द में एनिकट व कॉजवे की मरम्मत का कार्य किया जाएगा।

साथ ही, 6.50 करोड़ रुपए की राशि से मानसगांव एनिकट व कॉजवे मरम्मत, ग्राम मण्डानिया में एनिकट जीर्णोद्धार, बावड़ीखेड़ा में नए एनिकट का निर्माण व पुराने एनिकट को ऊंचा करवाने तथा ग्राम कोलाना में भटवाड़े के नाले पर एनिकट निर्माण का कार्य होगा।

इसके अतिरिक्त 5 करोड़ रुपए की लागत से ग्राम फाण्डा में नया एनिकट, खेड़ारूदा एनिकट का जीर्णोद्धार व सुरक्षा दीवार, मानपुरा एनिकट तथा गुडला एनिकट के जीर्णोद्धार कार्य संपन्न करवाए जाएंगे।

दूसरी ओर, पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा बजट घोषणा 2026-27 के तहत सांगोद विधानसभा की विभिन्न ग्राम पंचायतों और बस्तियों में जल किल्लत दूर करने के लिए विशेष वित्तीय मंजूरी दी गई है।

इसके अंतर्गत 2 लाख रुपए प्रति हैंडपंप की लागत सीमा से 125 मिमी व्यास के 34 नए हैंडपंप तथा 6 लाख रुपए प्रति ट्यूबवेल के प्रावधान से 150 मिमी व्यास के 10 नए सिंगल फेज ट्यूबवेलों का निर्माण एवं कमीशनिंग की जाएगी। ये सभी कार्य भू-जल वैज्ञानिक की रिपोर्ट और जल गुणवत्ता परीक्षण के बाद पूर्ण पारदर्शिता के साथ निष्पादित किए जाएंगे।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इन त्वरित स्वीकृतियों के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सांगोद के प्रत्येक गांव और ढाणी तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना तथा वर्षा जल का संचयन कर जलस्तर बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन एनीकटों से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और नल-हैंडपंपों से पेयजल संकट खत्म होगा।