केंद्र सरकार ने बदले ओवरटाइम अलाउंस के नियम, जानिए किसको होगा फायदा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच ओवरटाइम अलाउंस यानी OTA को लेकर एक अहम सवाल सामने आया है। नए Code on Wages, 2019 में सामान्य काम के घंटों से ज्यादा काम करने पर कम से कम दोगुनी सामान्य मजदूरी दर से ओवरटाइम देने का प्रावधान है।

ऐसे में कई कर्मचारियों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब केंद्रीय सरकारी कर्मचारी भी नियमित ड्यूटी के समय से ज्यादा काम करने पर अपने मौजूदा ओवरटाइम भत्ते का दोगुना भुगतान मांग सकते हैं? सरकार ने संसद में इस मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। आइए इसे जरा विस्तार से समझते हैं।

दरअसल, 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में केंद्र सरकार से पूछा गया था कि क्या Code on Wages लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के ओवरटाइम अलाउंस में कोई बदलाव किया गया है।

साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या वर्तमान में OTA से बाहर रहने वाले गजेटेड (Gazetted) कर्मचारियों को भी ओवरटाइम का लाभ दिया जा सकता है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि पात्र नॉन-गजेटेड (Non-Gazetted) केंद्रीय कर्मचारियों का ओवरटाइम अलाउंस अभी भी संबंधित पे कमीशन (Pay Commission) की सिफारिशों और लागू सरकारी आदेशों के आधार पर तय होता है।

इसका मतलब साफ है कि नए Wage Code में दोगुनी ओवरटाइम दर का प्रावधान होने के बावजूद केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों का OTA अपने आप दोगुना नहीं हो गया है।

Code on Wages की धारा 14 में सामान्य कार्य दिवस के निर्धारित घंटों से अधिक काम करने वाले कर्मचारी के लिए कम से कम सामान्य वेतन दर की दो गुनी दर से ओवरटाइम भुगतान का प्रावधान किया गया है।

यानी सामान्य तौर पर अगर किसी कर्मचारी से तय काम के घंटों से अधिक काम कराया जाता है और वह इस कानून के दायरे में आता है, तो ओवरटाइम की दर सामान्य वेतन से कम से कम दोगुनी होनी चाहिए।

लेबर मिनिस्ट्री (Labour Ministry) की कंप्लायंस हैंडबुक (Compliance Handbook) में भी काम के घंटे और ओवरटाइम से जुड़े प्रावधानों को इस धारा के तहत बताया गया है। लेकिन, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सामान्य प्रावधान को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के मौजूदा OTA नियमों में स्वत: बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए OTA की पात्रता और भुगतान अलग-अलग सेवा नियमों, सरकारी आदेशों और संबंधित पे कमीशन (Pay Commission) के निर्णयों से जुड़ा हुआ है।

इसलिए सिर्फ यह देखकर कि Wage Code में दोगुना ओवरटाइम का प्रावधान है, हर केंद्रीय कर्मचारी यह दावा नहीं कर सकता कि अतिरिक्त काम के लिए उसे तत्काल दोगुना OTA मिलना शुरू हो जाएगा।

सरकार ने संसद में यह भी बताया कि पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रति घंटे OTA की दरों का ढांचा 19 मार्च 1991 को जारी ऑफिस मेमोरंडम (Office Memorandum) यानी कार्यालय ज्ञापन के जरिए निर्धारित किया गया था। इस आदेश में ओवरटाइम भुगतान के साथ-साथ कुछ परिस्थितियों में कंपनसेटरी लीव (compensatory leave) का भी प्रावधान है।

सरकारी व्यवस्था के अनुसार ओवरटाइम को सामान्य कामकाज का हिस्सा बनाने के बजाय इसे तभी कराया जाना चाहिए, जब इसकी वास्तविक जरूरत हो। जहां ओवरटाइम जरूरी हो, वहां सक्षम अधिकारी से इसकी मंजूरी भी आवश्यक होती है।

इसलिए केवल कार्यालय में ज्यादा देर तक रुकने या सामान्य समय के बाद काम करने से हर स्थिति में OTA का अधिकार अपने आप नहीं बन जाता। कर्मचारी की कैटेगरी, उसके सेवा नियम और ओवरटाइम की आधिकारिक मंजूरी जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं।

नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए
पात्र नॉन-गजेटेड केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि नए Wage Code ने अपने आप उनके मौजूदा OTA को दोगुना नहीं किया है। अगर कोई कर्मचारी ऐसे पद या कैटेगरी में आता है, जिसके लिए सरकार के मौजूदा नियमों में ओवरटाइम अलाउंस की पात्रता है, तो उसका भुगतान उन्हीं लागू नियमों के अनुसार होगा, यानी कर्मचारी को पहले यह देखना होगा कि उसका पद OTA के लिए पात्र है या नहीं। इसके बाद ओवरटाइम किस परिस्थिति में मंजूर किया गया है और उस पर कौन-सी दर लागू होती है, यह संबंधित सरकारी आदेश और सेवा नियम तय करेंगे।

गजेटेड कर्मचारियों के लिए क्या बदला
गजेटेड (Gazetted) कर्मचारियों को लेकर भी सरकार ने फिलहाल कोई नया OTA लाभ घोषित नहीं किया है। लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या ऐसे राजपत्रित कर्मचारियों को भी ओवरटाइम अलाउंस दिया जाना चाहिए, जिन्हें मौजूदा व्यवस्था में इसका लाभ नहीं मिलता।

सरकार के जवाब में ऐसा कोई निर्णय घोषित नहीं किया गया। इसलिए गजेटेड (Gazetted) कर्मचारी अभी केवल Code on Wages की धारा 14 का हवाला देकर अपने लिए स्वत: ओवरटाइम अलाउंस का दावा नहीं कर सकते। उनके लिए OTA लागू करने या मौजूदा नियमों में बदलाव करने के लिए अलग से सरकारी फैसला जरूरी होगा।

कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात
पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो Wage Code में ओवरटाइम के लिए कम से कम दोगुनी सामान्य वेतन दर का प्रावधान है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का OTA तुरंत दोगुना हो गया है। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अभी भी पात्रता और भुगतान संबंधित सेवा नियमों, सरकारी आदेशों और पे कमीशन (Pay Commission) से जुड़े निर्णयों के आधार पर तय होंगे। इसलिए कर्मचारियों को सोशल मीडिया या अनौपचारिक संदेशों के आधार पर यह मानने से बचना चाहिए कि अतिरिक्त काम करने पर उन्हें स्वत: दो गुना भुगतान मिलेगा।