Wednesday, May 6, 2026
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फ्लिपकार्ट को मिली इंटरनेट दुनिया की सबसे बड़ी फंडिंग, जुटाए 1.4 अरब डॉलर


बेंगलुरू। प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने सोमवार को कहा कि टेनसेंट, ईबे, माइक्रोसॉफ्ट से 1.4 अरब डॉलर का वित्त जुटाने में सफल रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि फ्लिपकार्ट के 10 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ी फंडिंग है, साथ ही यह भारत के इंटरनेट क्षेत्र की भी सबसे बड़ी फंडिंग है। इस फंडिंग के बाद फ्लिपकार्ट की कीमत 11.6 अरब डॉलर हो गई है। 
इस निवेश से पहले फ्लिपकार्ट के निवेशकों में टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, नैस्पर समूह, एस्सेल पार्टनर्स और डीएसटी ग्लोबल शामिल थे। फ्लिपकार्ट के संस्थापकों सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने एक बयान में कहा, ‘यह सौदा फ्लिपकार्ट के लिए एक मील का पत्थर है। यह सौदा कंपनी के प्रौद्योगिकी कौशल, अभिनव मानसिकता और पारंपरिक बाजारों में संभावनाओं को साबित करती है।

यह एक प्रचलित स्वीकृति है कि घरेलू तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र वास्तव में संपन्न है और पूरे भारत में लोगों के दैनिक जीवन की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने में सफल रहा है।’उन्होंने आगे कहा, ‘यह सौदा प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत में वाणिज्यिक परिवर्तन में तेजी लाने के हमारे संकल्प की पुष्टि करता है।’

गोल्ड ईटीएफ से निकासी जारी, 5446 करोड़ रुपए निवेशकों ने चार वर्षों में निकाले

नई दिल्ली। बीते चार साल से गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) को लेकर निवेशकों में मंदड़िया रुझान बना हुआ है। यही वजह है कि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान भी उन्होंने गोल्ड लिंक्ड 14 ईटीएफ से 775 करोड़ रुपये की निकासी की। इसके चलते गोल्ड फंडों के एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में 16 फीसद की कमी आई।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से यह जानकारी दी गई है।

गोल्ड ईटीएफ ऐसे निवेश इंस्ट्रूमेंट हैं जो सोने की कीमतों पर आधारित होते हैं। ये ईटीएफ सोने में निवेश करते हैं। लगातार चार वर्षों से गोल्ड ईटीएफ सेगमेंट में कारोबार सुस्त दिख रहा है। इस दौरान वर्ष 2013-14 में निवेशकों ने 2,293 करोड़ रुपये की निकासी की। इसके अगले वर्ष उन्होंने ईटीएफ से 1,475 करोड़ रुपये निकाले।

वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 903 करोड़ रुपये रहा। अलबत्ता इन आंकड़ों से यह निकासी की रफ्तार में कमी आ रही है। लगातार निकासी से गोल्ड फंडों का एसेट बेस मार्च, 2017 में घटकर 5,480 करोड़ रुपये रह गया। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक इक्विटी में निवेश को तरजीह दे रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ स्कीमों की शुरुआत 2006-07 में हुई थी।

उर्जा धरोहर कोटा थर्मल बचाने के लिए वाहन रैली से हुआ जनांदोलन 

अरविन्द गुप्ता

कोटा। उर्जा क्षेत्र में निरंतर कीर्तिमान बनाने वाले कोटा थर्मल पावर स्टेशन की उंची चिमनियां शांत हो जाने से समूचे बिजलीघर में सन्नाटा छाया हुआ है। सर्वाधिक बिजली उत्पादन के लिए पसीना बहाने वाले श्रमिक, कर्मचारी व अभियंता एक माह से बंद थर्मल को तुरंत चालू करवाने के लिए जनांदोलन कर रहे हैं। सोमवार को थर्मल गेट से जिला कलक्ट्रेट सर्किल तक दुपहिया वाहन रैली विशाल वाहन रैली निकाली। 34 वर्ष पुराने थर्मल के इतिहास में यह पहला मौका है जब सरकार ने लगातार 30 दिन तक 4 चालू यूनिटों से उत्पादन बंद करवा दिया। 
संघर्ष समिति के संयोजक रामसिंह शेखावत ने कहा कि कोटा थर्मल शहर की उर्जा धरोहर है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। इसकी 4 यूनिटें स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर,जयपुर द्वारा नियोजित साजिश के तहत 10 मार्च से ही बंद हैं। जनवरी,2017 में कोटा थर्मल की यूनिट-2 ने मात्र दो कोल मिलों से निरंतर बिजली पैदा करने का कीर्तिमान बनाया, इसके विपरीत निजी कंपनियों के दबाव में थर्मल की चालू यूनिटों को जबरन बंद करवाकर कोटा थर्मल को करोड़ों रूपए की उत्पादन हानि पहुंचाई जा रही है। कोटा थर्मल जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ बिजलीघर की छवि को बिगाड़ने का यह सुनियोजित खेल है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री एव मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर को ज्ञापन दिया।

कोटा के हित में सड़कों पर उतरे कर्मचारी व श्रमिक
एचएमएस के प्रदेश महामंत्री मुकेश गालव ने कहा कि आईएल के बाद कोटा थर्मल जैसे बडे़ उद्योग को बंद करने का प्रयास शहर के विकास पर बिजली गिराने जैसा होगा। दुर्भाग्य से निरंतर लाभ में चल रहे कोटा थर्मल को चालू रखने के लिए कर्मचारियों, श्रमिकों व अभियंताओं को सड़कों पर आंदोलन करना पडा। एकीकृत कर्मचारी संघ की अध्यक्ष हंसा त्यागी ने कहा कि कोटा थर्मल बचाने के लिए आमरण अनशन भी करना पड़ा तो वे सबसे आगे रहेगी। महिला मुख्यमंत्री गरीब ठेका मजदूरों की रोजी-रोटी छीनने का प्रयास नहीं करे। संघर्ष समिति के सह-संयोजक शिवपाल चौधरी, आजाद शेरवानी, चंद्रशेखर चौधरी, श्यामसुंदर पंवार व राकेश डगोरिया ने बताया कि थर्मल बचाओ सर्वदलीय जन आंदोलन बन चुका है, यह तब जारी रहेगा, जब तक सरकार इसकी 4 यूनिटों को बंद करने तथा निजीकरण करने का निर्णय वापस न ले।  
जनता पर गिरेगी निजी क्षेत्र की महंगी बिजली
ज्ञापन में बताया कि रामगढ़ में 1000 मेगावाट क्षमता के राजवेस्ट निजी बिजलीघर ने सरकार से 3.50 रू. में बिजली दर तय की, जिसे बाद में घाटा बताकर प्लांट बंद कर दिया लेकिन सरकार ने उससे 4.50 रू.की दर से बिजली खरीदने का दोबारा एग्रीमेंट कर उसे फिर चालू करवा दिया। कवाई में चल रहे अडानी पॉवर प्लांट की दरें भी कोटा थर्मल से अधिक हैं। ऐसे में प्रति यूनिट 3.05 रू. सस्ती बिजली पैदा कर रहे कोटा थर्मल को निजी कंपनियों के दबाव में बंद करना राज्य के हित में नहीं है। 1240 मेगावाट क्षमता के कोटा थर्मल की 2 यूनिटें ही चालू हैं, शेष 850 मेगावाट की 5 यूनिटें बंद पड़ी हैं। गर्मी में बिजली की मांग नहीं जैसे कारण से रोज बिजली कटौती झेल रहे उद्यमियों, व्यापारियों एवं नागरिकों में आक्रोश है।
संघर्ष समिति का कहना है कि महाराष्ट्र में एनरोन कंपनी 3-4 वर्ष में बिजली के मनमाने दाम वसूल करने लगी तो जनविरोध के दबाव में उसे राज्य छोडकर जाना पड़ा।  राज्य में आरवीयूएनएल के अधीन कोटा, छबड़ा, झालावाड़, सूरतगढ़ पावर प्लांट को अगले 2 वर्ष तक पूरी क्षमता से चलाया जाए तो सरकार इन्हें लाभ की स्थिति में कर सकती है तथा जनता को सस्ती दरों पर बिजली मिलती रहेगी। निजी कंपनियों को बेचने पर कुछ समय बाद वे दरों में संशोधन कर मनमाने दाम वसूल करेंगी, जिसका आर्थिक मार आम जनता पर पड़ेगी।

कोटा थर्मल एक नजर में

-17 जनवरी,1983 में स्थापित। वर्तमान 7 इकाइयों की क्षमता 1240 मेगावाट।

– न्यूनतम स्टाफ, लगभग 700 अभियंता, कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ। करीब 2 हजार ठेका श्रमिक।

– 7394 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन 2016-17 में।

–   पहले वर्ष 41.54 प्रतिशत पीएलएफ था, 2012-13 में 94 प्रतिशत करके राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया। 

– 2015-16 में एसएलडीसी द्वारा 103 बार चालू यूनिटों को बंद करवाने से 125 करोड़ की हानि। 

– जनरेशन लोड कम करवाने से 5524 एमयू की उत्पादन हानि से 1601 करोड़ रू का नुकसान।

– 2015-16 में 200 करोड़ का घाटा, 90 प्रतिशत घाटा एलडी के कारण रहा।

– 2016-17 में लाभ की स्थिति में 3.05 पैसे प्रति यूनिट बिजली उत्पादन।

– पुरानी 4 यूनिटों के नवीनीकरण पर 250 करोड़ खर्च।

– नए वेगन ट्रिपलर नं. 6 के निर्माण पर 187 करोड़ रू.खर्च।   

रोमांटिक फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ का ट्रेलर लांच

मुंबई  । श्रद्धा कपूर और अर्जुन कपूर की अपकमिंग रोमांटिक फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ का ट्रेलर सोमवार को रिलीस हो गया। इस मौके पर चेतन भगत, अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, मोहित सूरी आदि फिल्म से जुड़े प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस फिल्म में अर्जुन एक बिहारी लड़के माधव झा और श्रद्धा रिया सोमानी का कैरेक्टर निभा रही हैं। मशहूर लेखक चेतन भगत के नॉवेल पर आधारित फिल्म की कहानी कुछ हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
माधव दिल्ली के एक अंग्रेजी कॉलेज में एडमिशन लेता है और उसको अंग्रेजी नहीं आती। उसकी दोस्ती वहीं पढ़ने वाली लड़की रिया सोमानी से होती है। फिल्म का ट्रेलर साफ दिखाता है कि इसमें इन दोनों के किरदारों में दोस्ती, प्यार से लेकर तकरार सबकुछ है। मोहित सूरी इस फिल्म के निर्देशक हैं और उनकी यह फिल्म सिनेमाहॉल्स में 19 मई को प्रदर्शित होगी।
शादी पर यह मानती हैं श्रद्धा कपूर
‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में मुख्य नायिका की भूमिका निभा रहीं अभिनेता श्रद्धा कपूर का कहना है कि माता-पिता द्वारा प्रेम विवाह, लिव-इन-रिलेशन संबंधों के प्रति खुली सोच रखने के बावजूद कई युवा प्रतिबद्धता जताने और वैवाहिक रिश्ते की जिम्मेदारी उठाने से डरते हैं। फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ चेतन भगत के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है, जिन्होंने एक बार बताया था कि यह दिलचस्प बात है कि आज के युवक-युवतियां एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं और पशोपेश में हैं।
श्रद्धा ने ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ बनने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमारे जीवन में ऐसे कई रिश्ते हैं, जिन्हें आप कोई नाम नहीं दे सकते। इस फिल्म की तरह मेरा भी मानना है कि जीवन में कभी-कभी ऐसा भी समय आता है, जहां आपके जीवन में दोस्त से बढ़कर कोई होता है, लेकिन वह वास्तव में प्रेमी नहीं होता…यह कहीं बीच का होता है।’
अभिनेत्री कहती है, ‘मैंने अपने कई दोस्तों को देखा है जो रिश्ते के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध नहीं होना चाहते। शादी करके घर बसाना नहीं चाहते…वहीं इससे पहले की पीढ़ी यानी हमारे माता-पिता हमारी खुशी को ध्यान में रखकर अपने बच्चों की पसंद स्वीकार कर रहे हैं, चाहे वह लिव-इन-रिलेशन ही क्यों न हो। मैं अपने माता-पिता से इस बारे में खुलकर बात करती हूं।’ श्रद्धा ने ये बातें फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान कही।
ट्रेलर यहां देख सकते हैं:

 एक्सपोर्ट मांग में कमी से धनिया दो दिन में 700 रुपये घटा

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कोटा। ऊपरी भाव पर बिकवाली बढ़ने और एक्सपोर्ट मांग में कमी और मंडियों में नई फसल के धनिया की वजह से हाजिर और वायदा बाजार में धनिया की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, महज 2 कारोबारी सत्र के दौरान धनिया का भाव 700 रुपये से ज्यादा घट चुका है।  शुक्रवार को कमोडिटी एक्सचेंज NDEX पर धनिया का भाव 7,889 रुपये के ऊपरी स्तर तक गया था लेकिन आज भाव घटकर 7,175 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गया है।

कारोबारियों का  कहना है कि जब  भारतीय बाजार में भाव बढ़ने की वजह से भारतीय धनिया का एक्सपोर्ट भाव 1,200 डॉलर तक चला गया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में रोमानिया और रूस से आने वाला धनिया 480-500 डॉलर के बीच बिक रहा है, ऐसे में भारतीय धनिया की एक्सपोर्ट मांग में भारी कमी आई है।
इंद्र भाई के मुताबिक हाजिर बाजार में धनिया की कीमतों में अब गिरावट आना शुरू हो गई है, गुजरात की मंडियों में धनिया का भाव 6,600-6,800 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गया है, मध्य प्रदेश की नीमच और मंदसौर मंडी में भाव 6,900-7,000 रुपये प्रति क्विंटल के करीब है।

उन्होंने बताया कि जब तक हाजिर मार्केट में धनिया 6,300-6,400 रुपये तक नहीं आता तबतक खरीदारी आने की संभावना कम है।  मौजूदा स्तर से धनिया में और 3-4 फीसदी की गिरावट मुमकिन है। वित्तवर्ष 2016-17 के दौरान धनिया के निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिली है, स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 के पहले 9 महीने यानि अप्रैल से दिसंबर 2016 के दौरान देश से धनिया निर्यात में करीब 21 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली है ।

स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया के मुताबिक अप्रैल से दिसंबर 2016 के दौरान देश से सिर्फ 23,450 टन धनिया निर्यात हो पाया है जबकि 2015-16 में इस दौरान 29,600 टन का एक्सपोर्ट हो गया था। हाल के दिनों में धनिया की आवक में भी जोरदार बढ़ोतरी हुई है, सरकारी संस्था एगमार्कनेट के मुताबिक अप्रैल के दौरान राजस्थान की मंडियों में 11,400 टन, मध्य प्रदेश की मंडियों में 7,341 टन और गुजरात की मंडियों में 7,900 टन धनिया की आवक हुई है।

वर्कप्लेस का फ्री वर्जन लाएगा फेसबुक

न्यूयॉर्क। कर्मचारियों के बीच आपसी बातचीत और फाइल साझा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर स्लैक को फेसबुक की ओर से चुनौती मिलने वाली है।
फेसबुक ने अपनी इसी तरह की मैसेजिंग सेवा वर्कप्लेस का निःशुल्क संस्करण लाने की घोषणा की है। वर्कप्लेस को विभिन्न कार्यालयों में इस्तेमाल के लिए बनाया गया है।
कर्मचारियों के बीच चैटिंग और फाइल शेयर के लिए इस्तेमाल होने वाली सर्विस में वर्कप्लेस की अपनी पहचान है।
फेसबुक ने पिछले साल इस सेवा को शुरू किया था। यह सशुल्क सेवा है। अब कंपनी इसका फ्री वर्जन लाने जा रही है।
फ्री वर्जन में वन-टू-वन और ग्रुप में वॉइस व वीडियो कॉलिंग की सुविधा, वीडियो स्ट्रीमिंग और चैटिंग की सुविधा मिलेगी। यह सेवा आइफोन, एंड्रॉयड के साथ ही डेस्कटॉप कंप्यूटर पर भी उपलब्ध रहेगी।कारोबार जगत में लगातार पहुंच बनाने के लिए फेसबुक नए-नए कदम उठा रहा है। हाल ही में फेसबुक ने माइक्रोसॉफ्ट के लिंक्डइन की तर्ज पर नौकरियों की जानकारी पोस्ट करने की अलग सुविधा दी है।

स्थिर वैश्विक संकेतों के बीच कच्चे तेल का वायदा भाव 0.63 प्रतिशत तेज

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नई दिल्‍ली। स्थिर वैश्विक संकेतों के बीच कच्चे तेल का वायदा भाव आज 21 रुपये बढ़कर 3,380 रुपये प्रति बैरल हो गया। एमसीएक्स पर अप्रैल डिलिवरी के लिए कच्चे तेल का वायदा भाव 21 रुपये यानी 0.63 प्रतिशत बढ़कर 3,380 रुपये प्रति बैरल रहा। इसके लिए 1,196 लॉट का कारोबार हुआ।

इसी प्रकार मई डिलिवरी के लिए इसका वायदा भाव 19 रुपये यानी 0.56 प्रतिशत चढ़कर 3,417 रुपये प्रति बैरल हो गया जिसके लिए 23 लॉट का कारोबार हुआ। इसी बीच अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का भाव 0.23 प्रतिशत चढ़कर 52.36 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 0.13 प्रतिशत बढ़कर 55.31 डॉलर प्रति बैरल रहा।

19 मंजिला इमारत के बीच से निकलती है ट्रेन

बीजिंग। दक्षिणी चीन में 19 मंजिला आवासीय इमारत के बीच में एक लाइट रेलवे ट्रैक बनाया गया है। चूंगचींग शहर की आबादी करीब 49 लाख है, जो यहां के 31,000 वर्ग मील में बसे शहर में रहती है। जगह की कमी की समस्या से निपटने के लिए शहरी नियोजक ने रचनात्मक तरीके को अपनाया है।डेली मेल में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, यहां एक विशेष रेलवे स्टेशन को बनाया गया है, जो इमारत की छठवीं से आठवीं मंजिल के बीच में बना हुआ है।

इस इमारत में रहने वाले लोगों के लिए खास किस्म के उपकरण लगाए गए हैं, ताकि ट्रेन के कारण होने वाले शोर को कम किया जा सके।इस बिल्डिंग में रहने वाले लोगों का कहना है कि उनको ट्रेन की आवाज उतना ही परेशान करती है, जितना एक डिशवॉशर से होने वाले शोर के कारण होता है। इस रचनात्मक काम के जरिए नियोजकों ने पूरी इमारत को गिराने के बजाए ट्रेन के लिए आसानी से रास्ता निकाल लिया।

सिटी ट्रांसपोर्ट की एक प्रवक्ता ने कहा कि हमारा शहर काफी सघन बसा है। ऐसे में सड़कों और रेलवे लाइनों के लिए जगह खोजना वास्तव में एक चुनौती है। बंदरगाह शहर चूंगचींग चीन में चार नगर पालिकाओं में से एक है और यांग्त्ज नदी के तट पर स्थित है। इस शहर को माउंटेन सिटी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह वन और पहाड़ियों के गहरे झुकाव के आस-पास स्थित है।

सड़क पर हुई गाय तो ड्राइवर को अलर्ट करेगी कार

नई दिल्ली । ड्राइविंग के दौरान आपका भी जानवरों से आमना-सामना हो जाता होगा। भारतीय इंजिनियरों ने इस समस्या से निपटने के लिए काम शुरू कर दिया है। सड़क पर बैठीं गायें अब अगर डाइवर को न भी दिखीं, तो कार में लगा रियल टाइम ऑटो डिटेक्शन अलर्ट सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। यह अलर्ट सिस्टम ड्राइवर को वक्त रहते ब्रेक लगाने में मददगार साबित होगा।
यह सिस्टम डैशबोर्ड कैमरा का इस्तेमाल करते हुए सेंसर्स के जरिए सामने आने वाले जानवर व अन्य बाधाओं की जानकारी ड्राइवर को अलर्ट के जरिए देगा। ऑडियो-विजुअल इंडिकेटर के जरिए अगर ड्राइवर को आगे कुछ नहीं भी दिख रहा है, तब भी वह ब्रेक लगाने में खुद को सक्षम पाएगा।
शोधकर्ताओं ने इंडोनेशियाई जर्नल ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग व कम्प्यूटर सायेंस में छपे अध्ययन में बताया, ‘इस उपकरण की 80 प्रतिशत सक्रियता गायों को लेकर रहेगी, जो देशभर की सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होती हैं।”
इस मॉडल का प्रस्ताव जीटीयू अहमदाबाद के शोधकर्ता सचिन शर्मा और धर्मेश शाह ने दिया है। उनके मुताबिक, ‘यह कम कीमत व उच्च विश्वसनीयता वाला सिस्टम है, जो बकायदा टेस्टिंग के बाद वाहनों में लगाया जा सकता है। इससे हाइवे पर गायों व अन्य जानवरों के साथ होने वाली दुर्घटनाएं थमेंगी।’