Wednesday, July 8, 2026
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एलआईसी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए आधार या पैन जरूरी

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की वेबसाइट पर अब से रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आधार या फिर पैन नंबर देना अनिवार्य होगा। एलआईसी ने अपनी वेबसाइट में काफी बदलाव किया है। 

ऑनलाइन पॉलिसी देखने के लिए देनी होगी ये डिटेल्स
अगर कोई व्यक्ति अपनी पॉलिसी की डिटेल्स वेबसाइट पर देखना चाहता है तो उसको रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अपना पैन, आधार, पासपोर्ट, पॉलिसी की डिटेल्स और जन्म तिथि देनी होगी।

परिवार के सदस्यों के लिए भी अलग से कराना होगा रजिस्ट्रेशन
अगर किसी व्यक्ति ने अपने अलावा परिवार के सदस्यों के लिए भी पॉलिसी ले रखी है जैसे बच्चे आदि तो उनके लिए भी अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन कराने के बाद आप प्रीमियम का पेमेंट कार्ड या फिर नेटबैंकिंग से कर सकेंगे। इसके अलावा बोनस के बारे में भी पता चल सकेगा। 

मुद्दों की रिपोर्ट बनाकर जीएसटी काउंसिल के सामने रखेंगे, मंत्री मेघवाल बोले

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 – दिनेश माहेश्वरी

कोटा। केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने शनिवार को व्यापारियों और अधिकारियों को कहा हम मुद्दों की रिपोर्ट बनाकर जीएसटी काउंसिल के सामने रखेंगे, ताकि उन पर काउंसिल पुनर्विचार करें।

इससे पहले उन्होंने कोटा विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन स्थित सभागार में आयोजित जीएसटी पर संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों और अधिकारियों के साथ जीएसटी के लागू होने के बाद आ रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर फीडबैक लिया। 

केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री  ने कहा कि केन्द्र सरकार ने एक देश एक टैक्स की नीयत से गुडस एण्ड सर्विस टैक्स लागू किया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में लागू की गई यह पहली व्यवस्था है, जो कि पूरे देश में एक साथ लागू हुई है।  मेघवाल ने कहा, आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार लागू हुआ है।

व्यापारी का संपर्क अधिकारियों और कार्मिकों से होगा ही नहीं। वे 95 फीसदी व्यापार जीएसटी नेटवर्क से ही करेंगे। इसके जवाब में व्यापारियों ने कहा, जीएसटी में कई विसंगतियां है।

जो अव्यावहारिक है, उस कारण वे व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। पहले उन्हें दूर करो। इस मौके पर पशु आहार खल, कोटा स्टोन, कोचिंग, रीयल स्टेट और ल्यूब्रिकेंट के मुद्दों पर चर्चा की।

उसकी निरंतर समीक्षा की जा रही है। इस कार्य में देश में 180 आईएएस और 40 केन्द्रीय मंत्री लगे हुए हैं। वे हर सेक्टर से सुझाव ले रहे हैं। बैठक में जीएसटी विभाग के आयुक्त सीके जैन,  सीजीएसटी कोटा के उपायुक्त नरेश बुन्देल और उपायुक्त एनके गुप्ता उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने की। 

कोटा में खुलेंगे दस जीएसटी सुविधा केंद्र

किसने क्या कहा

खुला बेचेंगे तो एक्ट का उल्लंघन होगा
हाड़ौती व्यापार एवं उद्योग महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि जीएसटी के पहले से पैकेजिंग एक्ट लागू है। एक तरफ जीएसटी में खुली सामग्री को टैक्स फ्री और पैक्ड या ब्रांड पर 5 फीसदी कर है। एेसे में खुली सामग्री बेचने पर पैकेजिंग एक्ट का उल्लंघन होगा। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।

स्टोन पर 28 फीसदी क्यूं
स्टोन व्यवसायी अचल पोद्दार का कहना है कि कोटा स्टोन पॉलिश नहीं होता है, यह रफ ही बिकता हैं। इसकी केवल स्प्रिलिट अच्छी होती है, एेसे में यह पॉलिश हुआ लगता हैं। इस पर 28 फीसदी टैक्स है। एेसा क्यूं।

कर के लिए समय दीजिए
राजस्थान कपड़ा व्यापार संघ प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज न्याति का कहना है कि साड़ी बनते समय 27 प्रोसेसिंग से गुजरती है। सभी जगह टैक्स प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं। हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। हमें समय दीजिए। 
समायोजित करें।

दुबारा जमा क्यूं कराएं : दीएसएसआईए संस्थापक अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट जो सरकार के पास पहले से जमा है, उसे दुबारा जमा क्यूं कराएं। इसमें लेबर चार्ज, बिल्टी का भाटा ट्रांसपोर्ट, मशीनरी रिपेयरिंग, टैक्सी किराया आदि पर जीएसटी लगकर नहीं मिले। पहले उनका कर जमा कराएंगे। फिर क्लेम कर लेंगे।

घी पर मंडी टैक्स हटाया जाए
कोटा फ्रेश डेयरी से संदीप साबू का कहना है कि बाजार में खुला पनीर, चीज, श्रीखण्ड मिल रहा है। उस पर जीएसटी नहीं है, लेकिन हम पैकेज्ड और ब्रॉडेंड बेच रहे हैं। जिस पर पांच फीसदी जीएसटी है। कम्पीटिशन कैसे करें। राजस्थान ही एेसा प्रदेश है जहां घी पर मंडी टैक्स वसूला जा रहा है। इसे हटाया जाए।

कृषि जिंसों को टैक्स फ्री रखा जाए
कोटा ग्रेन एण्ड मर्चेन्ट्स एसोसिएशन अध्यक्ष अविनाश राठी का कहना है कि कृषि जिंसों पर टैक्स लगाने की योजना चल रही है, लेकिन इसे फ्री रखा जाए। नेटवर्र्किंग सिस्टम में खामी के चलते जीएसटी व इनकम टैक्स फाइल के लिए अलग से सेटेलाइट डवलप की जाए।

चॉकलेट पर भी जीएसटी
जनरल मर्चेन्ट्स एसोसिएशन महासचिव रमेश आहूजा का कहना है कि बच्चों के खाने की चॉकलेट पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया है जबकि बड़ों के खाने की काजू कतली पर पांच प्रतिशत जीएसटी, एेसा क्यों। चॉकलेट को 12 से 18 प्रतिशत जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए।

पुराने कार्यों को जीएसटी से मुक्त करें
सांगोद विधायक हीरालाल नागर का कहना है कि कॉन्ट्रेक्टर्स के पुराने कार्य में 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया। जबकि यह नए कार्यों में शामिल होना चाहिए था, इसे पुराने कार्य में भी शामिल कर दिया। कॉन्ट्रेक्टर्स पर भार पड़ा है। पुराने कार्यों को जीएसटी से मुक्त किया जाए।

ऑयल को कॉम्पजिशन स्कीम में : पेट्रोलियम डीलर व्यवसायी संदीप कोहली का कहना है कि पेट्रोल पम्पों पर बिकने वाले ऑयल को कॉम्पजिशन स्कीम में लागू किया जाए। पहले भी वेट के अंदर डीलरों को बाहर रखा गया था और ज्यादा बेचने वालों के लिए कॉम्पजिशन स्कीम थी।

राजस्थान के 25 हजार गांव होंगे हाईटैक, वाई फाई सेवा शुरू होगी

वसुंधरा राजे सरकार राजस्थान के सभी गांवों को हाईटैक बनाने के लिए वाई फाई कनेक्टिविटी से जोड़ रही है।
 

जयपुर,। वसुंधरा राजे सरकार राजस्थान के सभी गांवों को हाईटैक बनाने के लिए वाई फाई कनेक्टिविटी से जोड़ रही है। पहले चरण में 25 हजार गांवों में वाई फाई सेवा शुरू की जाएगी।

अगले वर्ष के प्रारम्भ में राज्य के सभी गांवों में इंटरनेट सेवा शुरू हो जाएगी। राज्य का सूचना एवं प्रौधोगिकी विभाग प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 32,000 VASUNDHRAकी सुविधा देने का प्रबंध कर रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जीएसटी के दायरे में आने वाले कारोबारियों को भी घर बैठे ही जीएसटी का रजिस्ट्रेशन करवाने,जीएसटी के लिए माइग्रेशन करवाने,जीएसटी का टैक्स जमा करवाने और रिर्टन फाइल करने की व्यवस्था भी अगले कुछ दिनों में शुरू करने की कवायद की जा रही है।

जीएसटी की सेवाओं का सही और शीघ्र लाभ पहंुचाने के लिए राज्य में जीएसटी के डाटा सेंटर को दिल्ली और हैदराबाद केन्द्रों से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आईटी प्लेटफार्म की शुरूआत भी एक अगस्त से करेगी।

वकीलों की कानूनी सेवाएं जीएसटी के दायरे में: सीबीईसी ने कहा

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नई दिल्ली। टैक्स विभाग ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं द्वारा दी जाने वाली कानूनी सेवाएं जीएसटी के दायरे में आती हैं लेकिन टैक्स भुगतान की जवाबदेही मुवक्किल पर बनती है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या वकीलों और विधि कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही कानूनी सेवाएं जीएसटी के तहत विपरीत (रिवर्स) शुल्क व्यवस्था के दायरे में आएंगी।

इस पर केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने बयान जारी कर कहा, ‘जीएसटी में कानूनी सेवाओं पर कराधान के मामले में कोई बदलाव नहीं किया गया है।’

बयान के अनुसार अधिवक्ताओं द्वारा दी जाने वाली कानूनी सेवाएं जीएसटी के तहत भी विपरीत शुल्क व्यवस्था के अंतर्गत आती हैं। विपरीत या रिवर्स शुल्क का मतलब है कि टैक्स भुगतान की देनदारी आपूर्ति करने वालों के बजाए वस्तु या सेवा प्राप्त करने वालों पर है।

सीबीईसी ने कहा कि कानूनी सेवाओं से मतलब ऐसी किसी सेवा से है जो कानून की किसी भी शाखा में किसी भी रूप में सलाह, परामर्श या सहायता के रूप में उपलब्ध कराई गई हो।

इसमें किसी अदालत, न्यायाधिकण या प्राधिकरण के समक्ष प्रतिनिधि के रूप में दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। यह व्यवस्था व्यक्तिगत अधिवक्ता और वकीलों की कंपनी पर लागू होती है।

ज्ञातव्य है कि कोई भी अधिवक्ता अपने मुवक्किल से ली जाने वाली फीस की रसीद नहीं देता। इसलिए मुवक्किल से जीएसटी चार्ज करने के बाद भी सरकारी खजाने में जमा कैसे होगा।  

जीएसटी में 30 जुलाई के पहले पंजीकरण करा लें : वित्त मंत्रालय

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नए करदाता जिन्होंने पहले की व्यवस्था में पंजीकरण नहीं कराया था, उन्हें 30 जुलाई तक पंजीकरण कराना होगा।

नई दिल्ली। सरकार ने व्यापारियों से जीएसटी के तहत 30 जुलाई तक पंजीकरण कराने को कहा है। हालांकि जिन व्यापारियों का कारोबार 20 लाख रुपये से कम है या पूरी तरह छूट वाली वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति में लगे हैं, उन्हें नई कर व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं है। जीएसटी 1 जुलाई से लागू हो चुका है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘जीएसटी कानून के तहत व्यापारियों को 30 जुलाई 2017 तक पंजीकरण कराना है। सभी व्यापारियों से अुनरोध है कि वे अंतिम तिथि तक इंतजार किए बिना पंजीकरण कराएं।’

जीएसटी के तहत पंजीकरण के लाभ को बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि मूल्य श्रृंखला में कच्चे माल पर किए गए टैक्स भुगतान का लाभ दिया जा सकता है और टैक्स की राशि सीधे सरकारी खजाने में आएगी।

बयान में आगे कहा गया है, ‘व्यापारियों से अनुरोध है कि वे बिना समय गंवाए तत्काल जीएसटी के तहत पंजीकरण कराएं।’ 20 लाख रुपये तक के कारोबार वाले व्यापारियों (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिये 10 लाख रुपये) को जीएसटी से छूट है।

बयान के अनुसार, ‘अगर व्यापारी का सालाना कारोबार पिछले वित्त वर्ष में 20 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें उन सभी राज्यों (और केंद्र शासित प्रदेशों) में पंजीकरण कराने की जरूरत है जहां आप टैक्स योग्य आपूर्ति कर रहे हैं।’

वैसे करदाता जो उत्पाद शुल्क, वैट या सर्विस टैक्स दे रहे थे और जीएसटी पोर्टल पर चले गए हैं और अस्थाई आईडी जारी की गई है, उन्हें सभी जरूरी दस्तावेज देकर 22 सितंबर 2017 तक पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

उसके बाद जीएसटीआईएन जारी किया जाएगा। जिन करदाताओं को जीएसटी व्यवस्था में पंजीकरण की जरूरत नहीं है, वे 22 जुलाई तक अपना पंजीकरण रद्द करा सकते हैं।

सरकार ने बताया, जो लोग जीएसटीएन पर नहीं गए हैं लेकिन पंजीकरण कराने की जरूरत है, उन्हें 22 जुलाई तक यह कराना होगा। वैसे नए करदाता जिन्होंने पहले की व्यवस्था में पंजीकरण नहीं कराया था, उन्हें 30 जुलाई तक पंजीकरण कराना होगा।

बयान में कहा गया है कि वित्त वर्ष में किसी भी समय अगर कारोबार 20 लाख रुपये को पार कर जाता है, उन्हें उस तरीख से 30 दिन के भीतर पंजीकरण के लिये आवेदन करना होगा।

सेंकंड हैंड सामान की खरीद या बिक्री पर नहीं लगेगा जीएसटी

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ऐसा तभी होगा जब जिस दाम पर सामान खरीदा हो उससे कम दाम पर बेचा जा रहा हो

नई दिल्ली। किसी भी सेकंड हैंड सामान की खरीद या बिक्री पर जीएसटी नहीं लगेगा। हालांकि, ऐसी सिर्फ तभी होगा अगर सामान को खरीदे गए दाम से कम में बेचा गया हो। वित्त मंत्रालय के अनुसार ऐसा करने से डबल टैक्सेशन से बचा जा सकेगा।

केंद्रीय जीएसटी कानून के नियम 32(5) के मुताबिक कोई डीलर यदि सेकंड हैंड सामान बेचता है तो उसपर जीएसटी नहीं लगेगा। लेकिन ऐसा तभी होगा जब जिस दाम पर सामान खरीदा हो उससे कम दाम पर बेचा जा रहा हो, यानी वह सामान नुकसान उठाकर बेचा जा रहा हो।

दोबारा बेचे जाने से पहले यह भी देखना होगा कि सामान के मूल रूप में ज्यादा बदलाव न आया हो। इस सुविधा को मार्जिन स्कीम कहा गया है। इस स्कीम का लाभ सेकंड हैंड सामान का कोई भी पंजीकृत डीलर ले सकता है।

उसे केंद्रीय जीएसटी कानून के नियम 32(5) का पालन करना होगा। दो राज्यों के बीच भी सेकंड हैंड सामान की खरीद-फरोख्त के लिए इस स्कीम का लाभ लिया जा सकेगाा।

मोबाइल ऐप्स से बढ़ी इंडिया की जीडीपी, 5G की राह पर देश- मनोज सिन्हा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम के चलते मोबाइल ऐप्स ने देश की जीडीपी में अपना काफी अहम योगदान दिया है। सरकार की तरफ से जारी डाटा के अनुसार 2015-16 में मोबाइल ऐप्स से 1.4 लाख करोड़ रुपये आए थे। सरकार को अनुमान है कि 2020 तक ये आंकड़ा 20 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। 

टेलिकॉम मंत्री मनोज सिन्हा ने रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि अब डाटा का प्रयोग वॉयस के मुकाबले ज्यादा हो रहा है। इसके चलते सरकार अब अपनी टेलिकॉम पॉलिसी में भी बदलाव करने जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश 5G के लिए तैयार हो रहा है। 2022 तक नॉर्थ अमेरिका के साथ अगली पीढ़ी की तकनीक के लिए दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।’

2020 तक इंटरनेट का होगा जीडीपी में यह योगदान
ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम और आईसीआरआईईआर द्वारा की गई स्टडी के अनुसार 2020 तक भारत की जीडीपी में इंटरनेट से $537.4 बिलियन की कमाई होने की उम्मीद है। इसमें से केवल 270 बिलियन डॉलर मोबाइल ऐप से आएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 टेलिकॉम सर्किल में से 19 में यह देखा गया है। क्योंकि इंटरनेट का पूरा इस्तेमाल ऐप बेस्ड नहीं है, ऐसे में हम भारत में इंटरनेट इकॉनमी के लिए ऐप्लिकेशन के योगदान पर धारणाओं का उपयोग करते हुए अनुमान को कम करते हैं।’ ऐप्स या ऐप्लिकेशन ज्यादातर स्मार्टफोन पर इस्तेमाल होती हैं।

 

एसआर पब्लिक स्कूल में मनाया सावन महोत्सव

कोटा।  एस.आर. पब्लिक स्कूल में शनिवार को सावन महोत्सव का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम बच्चों ने राजस्थानी गीत  ‘‘ चौमासो लाग्यो रे ‘‘ से शुरुआत की। इस अवसर पर विद्यालय परिवार रंग-बिरंगे लहरिये परिधानों से सुसज्जित एवं आर्कषक वेशभूषा में मौजूद था।

इस अवसर पर प्रकृति को हरा-भरा रखने और सावन का महत्व बताते हुए नाटक मंचन और  नृत्य, गीत आदि की प्रस्तुतियाँ दी। हिमालय हाउस द्वारा इस गतिविधि में बच्चों ने जोश व उमंग के साथ भाग लिया।इस मौके  पर विद्यालय निदेशक अंकित राठी एवं प्राचार्या सीमा शर्मा ने बच्चों के इस कार्य की सराहना की एवं प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।

कोटा में 80 रुपए प्रति किलो बिके टमाटर, गृहणियों की रसोई का बजट बिगड़ा

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मांग की अपेक्षा उत्पादन कम होने से टमाटर का हिमाचल से ही ऊंचे भाव में कारोबार हो रहा है।

मंडी में इन दिनों 1000 कैरेट टमाटर की आवक हो रही है। यह 1200-1500 रुपए प्रति कैरेट में थोक भाव में बिक रहा है। रिटेल में यही टमाटर 80-100 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है।
संतोष मेहता, महासचिव, थोक फ्रूट एंड वेजिटेबल मर्चेंट संघ, कोटा

कोटा। सब्जियों की शान व स्वाद बढ़ाने वाले टमाटर के तेज भाव ने गृहणियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गृहणियां मंडी में सब्जी खरीदने जाती हैं, वहां टमाटर के भाव सुन दंग रह जाती हैं। सब्जियों में अब टमाटर कम ही डाला जा रहा है। कोटा शहर में दो-तीन दिन से टमाटर के भाव सुर्खियों पर हैं। जो रिटेल में 80-100 रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं।

व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि बीस दिन बाद महाराष्ट्र के नारायण गांव, लातूर के टमाटर की आवक शुरू हो जाएगी। एेसे में हिमाचल व महाराष्ट्र दोनों जगह उत्पादन शुरु होने से मांग घट जाएगी। एेसे में करीब एक पखवाड़े बाद भावों में गिरावट की संभावना है।

आवक की कमी से बढ़े भाव
टमाटर के थोक व्यापारी प्रकाश बाटवानी ने बताया कि गर्मी के टमाटर की आवक खत्म होने के बाद इन दिनों हिमाचल व महाराष्ट्र से टमाटर की आवक हो रही है। कोटा मंडी तक महाराष्ट्र की अपेक्षा हिमाचल का भाड़ा कम लगता है।

एेसे में कोटा के सभी व्यापारी इन दिनों हिमाचल से ही टमाटर मंगवा रहे हैं। हिमाचल का टमाटर पूर्वी व उत्तरी भारत को टमाटर आपूर्ति कर रहा है। एेसे में मांग की अपेक्षा उत्पादन कम होने से टमाटर का हिमाचल से ही ऊंचे भाव में कारोबार हो रहा है।

 

नोटबंदी के दौरान इनकम से ज्यादा नोट जमा कराने वालों की दूसरी सूची जारी

आयकर विभाग से 5.56 लाख लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए शीघ्र ही एसएमएस और ईमेल पर सूचना भेजी जाएगी।

नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान अपनी आमदनी से ज्यादा पुराने नोट जमा कराने वालों की दूसरी सूची भी आयकर विभाग ने बना ली है। इन्हें शीघ्र ही एसएमएस और ईमेल भेज कर अपना पक्ष पेश करने को कहा जाएगा। इस सूची को आयकर विभाग की साइट पर डाल दिया गया है, जिसे पैन नंबर डाल कर देखा जा सकता है।

इससे पहले ऑपरेशन क्लीन मनी के पहले चरण में 17.92 लाख व्यक्तियों की सूची उजागर की गई थी। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से मिली जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के दौरान अपनी आमदनी के स्रोत से ज्यादा पुराने नोट जमा कराने वालों की दूसरी सूची जारी कर दी गई है।

इनमें शामिल 5.56 लाख लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए शीघ्र ही एसएमएस और ईमेल पर सूचना भेजी जाएगी, ताकि वे अपना पक्ष ऑनलाइन रख सकें। उन्हें आयकर विभाग के दफ्तर में आने की या किसी अधिकारी या कर्मचारी से मिलने की आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा 1.04 लाख वैसे व्यक्तियों की सूची भी तैयार की गई है, जिनका नाम ऑपरेशन क्लीन मनी के पहले चरण में था और उन्होंने अपने सभी बैंक खातों का खुलासा आयकर विभाग के समक्ष नहीं किया है।