Tuesday, April 21, 2026
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भारतीय आम की ऑस्ट्रेलिया में डिमांड

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मेलबॉर्न। यदि भारतीय आम ऑस्ट्रेलिया के जैवसुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं तो भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया को आमों का निर्यात कर सकता है। इस निर्यात की संभावना दोनों देशों के बीच प्रोटोकॉल को संशोधित किए जाने के बाद बनी है ताकि भारतीय आमों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में इस्तकबाल का मौका मिल सके।

ऑस्ट्रेलियाई मैंगो इंडस्ट्री एसोसिएशन के रॉबर्ट ग्रे ने कहा कि भारतीय आमों को ऑस्ट्रेलियाई आमों का मौसम निकल जाने के बाद बेचा जाएगा। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के अनुसार ग्रे ने कहा, ‘वैश्विक व्यापार में हिस्सेदार के तौर पर यदि हम ऑस्ट्रेलियाई आमों के निर्यात के लिए विश्व के अन्य देशों में जाना चाहते हैं तो हमारा कदम यह है कि दूसरे देशों से आने वाले फल सुरक्षित हों और किसी भी तरह के कीटनाशक या बीमारी को लेकर यहां न आ रहे हों, तभी हम दूसरे देशों को अपने बाजारों में आने की अनुमति दे सकते हैं।’ पिछले सालों में मैक्सिको, फिलीपींस और पाकिस्तान ने अपने आम ऑस्ट्रेलिया भेजे हैं।

ग्रे ने कहा कि भारत ने अमेरिका को भी आमों का निर्यात शुरू किया है लेकिन यह जानना बहुत मुश्किल है कि ऑस्ट्रेलिया में यह कितनी मात्रा में आते हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत एक बहुत बड़ा आम उत्पादक देश है। उनका आम निर्यात कारोबार हमारी तरह ही है। भारत ऐसे बाजारों को लक्ष्य करेगा जहां वह उच्च मूल्य वाले उत्पादों की छोटी-छोटी मात्रा को बेच सके।’ इस रपट में केबी एक्सपोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी कौशल खाखर के हवाले से कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया को सारा निर्यात हवाई मार्ग से किया जाएगा। प्रारंभ में उनकी कंपनी का ध्यान अल्फांसो और केसर की किस्म को निर्यात करने पर होगा।

 

आर्मी कैंटीन में पतंजलि आंवला जूस की बिक्री पर रोक लगाई

मुंबई। योग गुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के पतंजलि आंवला जूस की बिक्री पर आर्मी  कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) ने रोक लगा दी है। जानकारी के मुताबिक एक सरकारी लैबरेटरी ने इस जूस को अपने मापदंडों में बेहतर नहीं पाया था। इसके बाद सीएसडी ने इस उत्पाद की बिक्री पर रोक लगा दी है।

सीएसडी की ओर से 3 अप्रैल 2017 को एक पत्र जारी किया गया है। इसमें सभी डिपो को निर्देशित किया गया है कि मौजूदा स्टॉक के लिए वे सभी एक डेबिट नोट बनाएं ताकि उसे लौटाया जा सके। पतंजलि आयुर्वेद ने शुरुआत में जो उत्पाद बाजार में उतारे थे, उनमें आंवला जूस शामिल था। बाजार में आंवला जूस की सफलता के बूते ही कंपनी ने दो दर्जन से ज्यादा वर्गों में अपने उत्पाद बाजार में उतारे थे।

कंपनी का दावा था कि उनका उत्पाद अन्य कंपनियों के उत्पादों के मुकाबले सेहत के लिए और बेहतर था। इस मामले पर दो अधिकारियों का कहना था,’इस बैच की जांच कोलकाता की सेंट्रल फूड लैबरेटरी में की गई थी। जांच में उत्पाद को उपयोग के लिए ठीक नहीं पाया गया। पतंजलि ने आर्मी की सभी कैंटीनों से आंवला जूस को वापस ले लिया है।’

माइग्रेशन तीस जून तक नही हुआ हो स्वतः ही हो जाएगा

कोटा ।टैक्स  बार असोसिएशन की ओर से  सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के वक्ता रंजन मेहता ने बताया की वर्तमान में माइग्रेशन को लेकर कई कठिनाइयां आ रही है, जिसमें खासकर व्यापारी को अपने उत्पाद के  विभाजन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
जिन व्यापारियों का माइग्रेशन तीस जून तक नही हुआ हो उनका माइग्रेशन स्वतः ही हो जाएगा तथा 90 दिन का समय दिया जाएगा ।
उन्होनं बताया की इनपुट क्रेडिट लेने हेतु अंतिम वेट, सर्विस टेक्स / एक्साईज के  रिटर्न काफी महत्वपूर्ण होंगे ।  60 दिवस के भीतर आवेदन पत्र दाखिल करना होगा। इनपुट क्रेडिट  तभी स्वीकार्य होंगे जब  फाईल किए जाने वाले सभी रिटर्न अगर समय से दाखिल किये हों ।

जीएसटी : ऑफलाइन स्टोर को मिलेगी राहत की संजीवनी

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► जीएसटी में एकसमान कराधान होने से ऑनलाइन-ऑफलाइन को मिलेंगे समान अवसर
► फ्यूचर समूह ने अगले 4 साल में 10,000 स्टोर खोलने की बनाई योजना
► रिलायंस रिटेल 3 साल में खोलेगी 700 नए स्टोर
► वॉलमार्ट की अगले 2 साल में 50 नए थोक स्टोर खोलने की योजना

मुंबई। पिछले कुछ वर्षों से ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियों से ऑफलाइन रिटेलरों को कड़ी टक्कर मिल रही है, लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से ऑफलाइन स्टोरों को काफी दम मिलने की उम्मीद है। एकसमान कर और जीएसटी के क्रियान्वयन में सुगमता को देखते हुए ऑफलाइन रिटेलर तेजी से अपना विस्तार करने की तैयारी में हैं। फ्यूचर समूह के मुख्य कार्याधिकारी किशोर बियाणी ने कहा, ‘अभी तो कराधान के लिहाज से ई-कॉमर्स कंपनियों को फायदा मिल रहा है। लेकिन जीएसटी के आने से सभी के लिए समान अवसर होंगे और इससे निश्चित तौर पर हमारी विस्तार की योजना में मदद मिलेगी।’

पिछले 6 महीनों में रिटेल स्टोरों की स्थिति में काफी बदलाव आया है। ई-कॉमर्स स्टोरों को जहां निवेश जुटाने में मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं ऑफलाइन रिटेल कंपनियों के लिए स्थिति सकारात्मक नजर आ रही है। एवेन्यू सुपरमाट्र्स (डी-मार्ट) की शानदार सूचीबद्धता ने भी ऑफलाइन रिटेल मॉडल के प्रति निवेशकों का भरोसा लौटाया है क्योंकि वे मान रहे हैं कि अगर इस मॉडल का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए तो यह मुनाफेदार हो सकता है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के 1 जुलाई से लागू होने की संभावना है, जिसका  क्रियान्वयन ऑफलाइन स्टोरों के लिए अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यही वजह है कि ऐसे स्टोरों के विस्तार की योजना को बढ़ावा मिल रहा है और कुछ अपने लक्ष्यों को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहे हैं।

वस्तुओं को अंतरराज्यीय परिवहन से जुड़ी चुनौतियों को देखतते हुए वॉलमार्ट इंडिया के अध्यक्ष एवं मुख्यकार्याधिकारी कृष अय्यर ने कहा, ‘जीएसटी केवल कर सुधार ही नहीं है, बल्कि कारोबार करने का नया तरीका भी है।’ उन्होंने कहा कि वस्तुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर तमाम नाकों पर चुंगी देनी पड़ती है, जिससे न केवल कारोबार प्रभावित होता है बल्कि परिवहन की लागत भी बढ़ती है। अय्यर ने कहा, ‘जीएसटी के लागू होने से एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण होगा और आपूर्ति शृंखला तथा भारतीय रिटेल क्षेत्र ज्यादा दक्ष बनेगा।’ अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट भारत में थोक कैश ऐंड कैरी स्टोरों का परिचालन करती है और अगले कुछ वर्षों में अपने स्टोरों की संख्या बढ़ाकर 50 करने की योजना बनाई है। फिलहाल कंपनी के देश भर में 21 स्टोर हैं।

वर्तमान में ई-कॉमर्स कंपनियां हैदराबाद और बेंगलूरु सहित कम मूल्यवर्धित कर (वैट) वाले बाजारों के माध्यम से बिक्री कर रही हैं। इन बाजारों में स्मार्टफोन जैसे उत्पादों पर 5 फीसदी वैट लगता है, जो राष्ट्रीय औसत करीब 15 फीसदी से काफी कम है। लेकिन जीएसटी के लागू होने पर यह लाभ नहीं मिलेगा, यही वजह है कि श्याओमी और मोटोरोला जैसे स्मार्टफोन ब्रांड अब ऑफ-लाइन रिटेल में अपना विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। नई कराधान व्यवस्था में विनिर्माता भी थोक विक्रेता पर निर्भर करेंगे, जो कर क्रेडिट का लाभ लेने के लिए अंतत: ऑफलाइन स्टोरों का रुख करेंगे। रिलायंस रिटेल अगले तीन साल में 700 स्टोर खोलेगी, जिनमें रिलायंस टेंड्रस के 200 फैशन स्टोर शामिल हैं।

अब PAN से पता चलेगा कहां मौजूद हैं आप

नई दिल्ली। केंद्र सरकार हरेक स्थायी खाता संख्या (पैन) की ई-लोकेशनिंग कर रही है। यानी आपका पैन देश में किस जगह पर सक्रिय है, वह सरकार को देश के डिजिटल नक्शे पर दिखाई देगा। इससे सरकार को कर वसूली संबंधी विभिन्न प्रकार के विश्लेषण करने में मदद मिलेगी और सरकार यह भी पता लगा सकेगी कि देश के किस स्थान पर अधिक काला धन पैदा हो रहा है और किस स्थान पर अधिक कर चोरी हो रही है।

यह जानकारी यहां सीई इनफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट विलास कुलकर्णी ने कंपनी के एक समारोह में इतर मौके पर Len-den News  के साथ दिल्ली में हुई एक बातचीत में दी। सीई इनफोसिस्टम्स को मैपमाईइंडिया के नाम से अधिक जाना जाता है, जो सरकार की इस बहुएजेंसी परियोजना में पैन की लोकेशनिंग के काम को अंजाम दे रही है।

मैपमाईइंडिया से किया सीबीडीटी ने करार

कुलकर्णी ने बताया कि वित्त मंत्रालय के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की इस परियोजना में मैपमाईइंडिया द्वारा तैयार किया गया देशभर का डिजिटल नक्शा (मैप) और देश के अधिकतर घरों और महत्वपूर्ण स्थानों को कंपनी द्वारा दिए गए एक डिजिटल कोड ‘ई-लॉक’ (वर्चुअल लोकेशन) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पैन की ई-लोकेशनिंग

उन्होंने पैन की ई-लोकेशनिंग का कंसैप्ट समझाते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति या कारोबारी तथा अन्य संस्थान आयकर रिटर्न दाखिल करता है, तब उसमें पैन का उल्लेख किया जाता है।साथ ही यह भी उल्लेख किया जाता है कि यह रिटर्न किस पते से दाखिल किया जा रहा है। यानी, सरकार के पास यह आंकड़ा है कि कौन सा पैन किस पते पर सक्रिय है। लेकिन इस पैन और पते के करोड़ों आंकड़ों का विश्लेषण करना काफी बोझिल काम है।

GST के लागू होने से जीडीपी में 4.2 फीसदी बढ़ोतरी होने का अनुमान

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने एक अनुमान जारी किया 

नई दिल्ली। पहली  जुलाई से देश भर में वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) लागू करने की  केंद्र सरकार ने तैयारी कर ली है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने एक अनुमान जारी कर दिया है, जिससे केंद्र सरकार को काफी अच्छा बूस्ट मिलने की संभावना है। 

अमेरिकी फेड रिजर्व ने अपने एक पत्र में कहा है कि जीएसटी के लागू होने के बाद जीडीपी में 4.2 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इससे सरकार को 6.5 लाख करोड़ रुपये की कमाई होने की संभावना है जो कि सरकार द्वारा प्रतिवर्ष की जाने वाली उधारी से भी काफी ज्यादा है। 

इन एजेंसियों ने जताई थी जीडीपी में बढ़ोतरी की आशंका

फेड के अलावा एक अन्य थिंक टैंक NCAER ने भी जीएसटी के लागू होने के बाद जीडीपी में 1 से दो फीसदी बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया था। थिंक टैंक के अनुसार, जीएसटी से सभी प्रदेशों की कमाई में उछाल होने की संभावना है, क्योंकि फैक्ट्रियों में उत्पादन काफी उंचे स्तर पर पहुंच जाएगा। 

32 फीसदी बढ़ जाएगा बाहरी देशों से व्यापार 

थिंक टैंक के मुताबिक, जीएसटी के लागू होने के बाद विदेश से होने वाले व्यापार में भी 32 फीसदी ग्रोथ होने का अनुमान है। इसके साथ ही राज्यों में होने वाले व्यापार में भी 29 फीसदी बढ़ोतरी होने का आशा है। 

1 करोड़ तक सस्ती हुईं सुपर कारें

नई दिल्ली। यूके में बनी सुपरकारों जैसे रॉल्स रॉयस, बेंटली, ऐस्टन मार्टिन, रेंज रोवर और फेरारी के दाम में बड़ी गिरावट आई है। इन सुपरकार्स के दाम 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक कम हुए हैं। इसका श्रेय ब्रेग्जिट को जाता है। यूरोपीय यूनियन से निकलने के पिछले साल ब्रिटेन द्वारा लिए गए फैसले के कारण पौंड स्टेरलिंग में रुपये के मुकाबले 20 फीसदी तक गिरावट आई है, जिसका फायदा ग्राहकों को मिल रहा है।

ब्रेग्जिट के फैसले के बाद पिछले एक साल में पौंड 108 रुपये से 81 रुपये पर पहुंच गया है। इससे यूके स्थित कार निर्माता कंपनियों द्वारा भारत को निर्यात की जानें वाली कारों के दाम में गिरावट आई है। कार निर्माता कंपनियों ने ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने के लिए गाड़ियों के दाम 5 फीसदी से 15 फीसदी कम कर दिए हैं।

2016 में 2 करोड़ और उससे ज्यादा कीमत की कारों की 200 यूनिट भारत में बिकीं जो खुद में एक रेकॉर्ड था और इन गाड़ियों में आधी से ज्यादा गाड़ियां ब्रिटेन में बनी थीं। इंडस्ट्री बॉडी सोसायटी ऑफ मोटर मैन्युफैक्चर्रस ऐंड ट्रेडर्स (एसएमएमटी) के मुताबिक, बीते 11 सालों में यूके से भारत निर्यात होने वाली गाड़ियों की संख्या 11 गुना बढ़ी है। 2009 में ब्रिटेन निर्मित महज 309 गाड़ियां भारत में बिकी थीं जबकि 2016 में यह संख्या 3,372 हो गई। गाड़ियों की मांग 2015 के मुकाबले 15.8 फीसदी हो गई है, जिससे भारत यूके की एशिया एक्सपोर्ट मार्केट की लिस्ट में दसवें पायदान से आठवें पायदान पर आ गया है।

 

मार्च के महीने में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 89.52 करोड़ के पार  

नई दिल्ली। भारती एयरटेल और वोडाफोन सहित सात दूरसंचार ऑपरेटरों के मोबाइल फोन ग्राहकों की संख्या मार्च में 56.8 लाख बढ़कर 89.52 करोड़ के पार पहुंच गई। इसमें दिसंबर, 2016 तक के नई कंपनी रिलायंस जियो के आंकड़े भी शामिल हैं। यदि जियो को अलग किया जाए तो मार्च, 2017 के अंत तक कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या 82.31 करोड़ बैठेगी। 

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के आंकड़ों के अनुसार मार्च, 2017 के अंत तक मोबाइल कनेक्शनों की संख्या 89.52 करोड़ को पार कर गई है। मार्च महीने में शुद्ध रूप से ग्राहकों की संख्या में 56.8 लाख का इजाफा हुआ। 
समीक्षाधीन महीने में भारती एयरटेल ने 30 लाख नए ग्राहक बनाए। उसके कुल ग्राहकों की संख्या 27.36 करोड़ हो गई।

एयरटेल की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर 33.25 प्रतिशत हो गई। वोडाफोन के ग्राहकों की संख्या 20.90 करोड, आइडिया सेल्युलर के 19.53 करोड़ रही। रिलायंस जियो के ग्राहकों की कुल संख्या 7.21 करोड़ रही। माह के दौरान टेलीनॉर के ग्राहकों की संख्या 11.3 लाख घटी है। टेलीनॉर के कारोबार का एयरटेल ने अधिग्रहण किया है। 

 

Nissan ने घटाए सिडैन सनी के दाम

नई दिल्ली। जापान की ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी निसान ने अपनी मिड साइज सिडैन सनी की कीमत भारत में 1.99 लाख रुपये तक कम कर दी है। एक बयान में निसान की ओर से कहा गया कि अब सनी की शुरुआती कीमत 6.99 लाख रुपये होगी और 8.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम दिल्ली)तक इसकी कीमत जाएगी।

अब निसान सनी का पेट्रोल वेरियंट 1.01 लाख रुपये कम होने के बाद 6.99 लाख रुपये में मिलेगा जबकि आटोमेटिक ट्रांसमिशन वेरियंट 1.99 लाख रुपये कीमत होने के बाद 8.99 लाख रुपये में मिलेगा। इसी तरह से डीजल वेरियंट की कीमत में 1.31 लाख रुपये कटौती की गई है। इसकी नई कीमत अब 7.49 लाख रुपये होगी। टॉप एंड वेरियंट की कीमत में 94,000 रुपये कटौती के बाद 8.99 लाख रुपये (सभी कीमत एक्स-शोरूम दिल्ली) होगी।

अब पिन याद रखने की जरूरत नहीं, फिंगरप्रिंट से होगा भुगतान

क्या आप बार-बार अपने एटीएम का पिन भूल जाते हैं? अब आपको चिंता करने की जरुरत नहीं क्योंकि जल्द ही आपको एटीएम का पिन याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप एटीएम पिन की जगह फिगरप्रिंट का इस्तेमाल कर पाएंगे। 

अमेरिकी कंपनी मास्टरकार्ड एक ऐसा कार्ड लाने की तैयारी कर रहा है जिसमें आपका बायोमैट्रिक डाटा दर्ज होगा। ये कार्ड फिंगरप्रिंट स्कैनिंग तकनीक पर आधारित होगा। आप कहीं भी खरीदादारी करते समय क्रेडिट या डेबिट कार्ड के पिन की जगह अपने फिगरप्रिंट का इस्तेमाल कर पाएंगे। 

दरअसल जैसे ही आप अपने बैंक से कार्ड को रजिस्टर करेंगे, आपका फिगरप्रिंट कार्ड के डिजिटल टेंपलेट पर स्टोर कर लिया जाएगा। जब भी आप ईएमवी कार्ड रीडर का इस्तेमाल करेंगे, आपको पिन की जगह अपना फिगरप्रिंट स्कैन करके भुगतान करना होगा। अभी अमेरिकी कंपनी द्वारा बनाए गए इस कार्ड का दक्षिण अफ्रीका में सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। अगले कुछ महीनों में कई और जगहों पर इसका परीक्षण किया जाएगा। फिर इसे अमेरिका, यूरोप के अलावा एशिया के देशों में भी जारी किया जाएगा।

 इस कार्ड से उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा। न पिन याद रखने की झंझट होगी और न ही धोखाधड़ी का डर क्योंकि फिंगरप्रिंट स्कैनिंग तकनीक पर आधारित होने की वजह से आपके कार्ड का इस्तेमाल आपके अलावा कोई दूसरा नहीं कर पाएगा।मास्टरकार्ड के एंटरप्राइज रिस्क एंड सेक्युरिटी विभाग के अध्यक्ष अजय भल्ला ने बताया कि अब उपभोक्ता बायोमेट्रिक लेनदेन को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। चाहे स्मार्टफोन को अनलॉक करना हो या फिर ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो, बायोमेट्रिकइस तकनीक का इस्तेमाल करके सुरक्षित भुगतान करना अब संभव हो गया है।