Saturday, April 25, 2026
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SBI ने फिक्‍स डिपॉजिट पर 0.50 प्रतिशत तक ब्याज दर घटाई

नई दिल्‍ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने विभिन्न परिपक्वता अवधि की मियादी जमा योजनाओं (फिक्‍स डिपॉजिट) पर मिलने वाले ब्याज की दरें 0.50 प्रतिशत तक घटा दी हैं। यह कटौती मध्यम से दीर्घावधि की एक करोड़ रुपए से कम की जमाओं पर लागू होगी।

बैंक के अनुसार अब दो से तीन साल के बीच की अवधि की जमा पर 6.25 प्रतिशत ब्याज दर की पेशकश की गई है। अब तक इन जमाओं पर 6.75 प्रतिशत की दर से ब्‍याज मिलता था।इसी अवधि की वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि पर अब 6.75 प्रतिशत ब्याज मिलेगा जो अब तक 7.25 प्रतिशत था।

बैंक ने 3-10 साल की अवधि की जमा राशि पर ब्याज 0.25 प्रतिशत कम कर 6.50 प्रतिशत कर दिया है। नई दरें 29 अप्रैल 2017 से लागू होगी।सात दिन से दो साल की कम अवधि की मियादी जमा राशि पर ब्याज में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बैंक एक साल से 455 दिन की मियादी जमाओं पर सर्वाधिक 6.90 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। एसबीआई ने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। – See more

ग्वारगम एक्सपोर्ट 26 महीने के ऊपरी स्तर पर

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नई दिल्ली। 2015-16 के दौरान देश से ग्वारगम के निर्यात में आई 51 फीसदी की भारी गिरावट के बाद मार्च में खत्म हुआ वित्त वर्ष 2016-17 ग्वारगम के निर्यात के लिए कुछ अच्छा रहा है, 2016-17 के दौरान ग्वारगम एक्सपोर्ट में जोरदार रिकवरी देखने को मिली है। वित्तवर्ष 2016-17 के दौरान ग्वारगम के एक्सपोर्ट में 30 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है।

APEDA सूत्रों के मुताबिक 2016-17 के दौरान देश से कुल 4,23,283 टन ग्वारगम का एक्सपोर्ट हुआ है जबकि 2015-16 के दौरान सिर्फ 3,25,251 टन ग्वारगम का एक्सपोर्ट हुआ था।  एपीडा सूत्रों के मुताबिक मार्च के दौरान देश से ग्वारगम का एक्सपोर्ट करीब 26 महीने के ऊपरी स्तर पर दर्ज किया गया है।

मार्च में देश से करीब 56 हजार टन ग्वारगम एक्सपोर्ट दर्ज किया गया है जो जनवरी 2015 के बाद सबसे अधिक मासिक एक्सपोर्ट है। पिछले साल के मार्च के मुकाबले इस साल मार्च में एक्सपोर्ट में करीब 100 फीसदी का उछाल आया है, 2016 के मार्च में देश से सिर्फ 28,000 टन ग्वारगम का एक्सपोर्ट हो पाया था।

भारतीय ग्वारगम का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है, 2016-17 में हुए कुल निर्यात का करीब 40 फीसदी हिस्सा अकेले अमेरिका को ही गया है। दरअसल अमेरिका में ग्वारगम का इस्तेमाल ऑयल रिग्स में लुब्रिकेंट के तौर पर होता है और पिछले कुछ समय से अमेरिका में ऑयल रिग्स की संख्या में एकतरफा बढ़ोतरी हो रही है।

ग्लूकोमा का अब शुरुआती चरण में लग जाएगा पता

लन्दन। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ऐसी जांच विधि विकसित की है जिससे ग्लूकोमा का बिल्कुल शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकेगा। ग्लूकोमा आंखों की रोशनी जाने की बीमारी है। यह अंधेपन का सबसे बड़ा वैश्विक कारण है। 

ग्लूकोमा के मरीजों की आंखों की रेटिना में कोशिकाओं की मौत होने लगती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कोशिकाओं की मौत की इस परिघटना को एपोप्टोसिस कहते हैं। इसी वजह से इन मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाती है। उन्होंने कहा, अगर रेटिना में कोशिकाओं की मौत का समय रहते पता चल जाए तो उनको बचाने के उपचार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि नई तकनीक से आंखों की जांच कर रेटिना की कोशिकाओं की मौत की आशंका का पहले ही पता लगाया जा सकता है। इससे तरह आंखों की रोशनी को जाने से रोका जा सकता है। 

शुरुआती हाल पर नजर : 
यह जांच ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और वेस्टर्न आई हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने विकसित की है। उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा का शुरुआती दौर में पता लगाना कठिन है, क्योंकि जरूरी नहीं कि इसके लक्षण शुरुआती दौर में अपने-आप स्पष्ट हों। शोधकर्ता फ्रांसेस्का कोर्डेरो ने कहा, हालांकि ग्लूकोमा का पता लगाने के तरीके पहले के मुकाबले उन्नत हुए हैं।

लेकिन मौजूदा तरीकों से ज्यादातर मरीजों में जब तक ग्लूकोमा का पता लगता है तब तक उनकी आंखों की एक तिहाई रोशनी जा चुकी होती है। उन्होंने कहा, हमारी नई जांच तकनीक की मदद से डॉक्टर मरीज की आंखों के पिछले हिस्से में किसी एक तंत्रिका कोशिका की मौत को भी देख पाएंगे। 

चमकीले संकेतक से सुराग :
शोधकर्ताओं ने कहा, इस जांच तकनीक में खास तौर विकसित एक चमकीले संकेतक का उपयोग किया गया है। जब मरीज की आंख में इंजेक्शन के जरिये ये संकेतक पहुंचाए जाते हैं तब वे कोशिकाओं की प्रोटीन से चिपक जाते हैं। इसके बाद जब आंखों की जांच की जाती है तब कमजोर कोशिकाएं सफेद चमकीले धब्बों के रूप में नजर आती हैं। इस नई तकनीक को डिटेक्शन ऑफ एपोप्टोसिंग रेटिनल सेल्स (डार्क या डीएआरसी) नाम दिया गया है। इस जांच में उन्हीं उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है जो आंखों की सामान्य जांच में इस्तेमाल किए जाते हैं।   
दस वर्ष पहले पता लगेगा :
शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि इस नई जांच से ग्लूकोमा का पता इसके लक्षणों के प्रकट होने के काफी समय पहले ही लगाया जा सकेगा।  इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आंखों की रोशनी जाने से रोकी जा सकेगी। ग्लूकोमा में धीरे धीरे आंखों की रोशनी जाती है। ऐसे में जितना जल्दी इसका पता लगाया जा सकेगा, आंखों की रोशनी उतनी ज्यादा बचाई जा सकेगी।

 शोधकर्ता फिलिप ब्लूम ने कहा, शुरुआती दौर में उपचार करने से बीमारी को काबू करने में काफी अधिक सफलता मिलने की संभावना रहती है। नई जांच तकनीक से मरीजों में ग्लूकोमा का पता इसके लक्षण स्पष्ट होने से करीब 10 साल पहले लगा सकते हैं। यह अध्ययन ‘ब्रेन’ जर्नल में छपा है। इसमें इस तकनीक के शुरुआती चिकित्सकीय परीक्षणों को सुरक्षित और उत्साहजनक बताया गया है।  

 

एक साथ हो लोकसभा और विधानसभा चुनाव, नीति आयोग का सुझाव

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नई दिल्ली। नीति आयोग ने 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव को एक साथ करवाने का सुझाव दिया है। जिससे की प्रचार मोड के कारण शासन व्यवस्था में पडऩे वाले व्यवधान को कम से कम किया जा सके। 

थिंक टैंक यानी नीति आयोग ने कहा कि अगर इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो अधिकतम एक बार कुछ विधानसभाओं के कार्यकाल में कुछ कटौती या विस्तार करना पड़ सकता है। आयोग ने कहा कि इसको मूर्तरूप देने के लिए कानून के जानकार, विचारक, सरकारी अफसरों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को एक रुपरेखा तैयार करनी चाहिए।

इस संबंध में 6 महीने के अंदर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाना है। और इसका अंतिम खाका अगले मार्च  तक तैयार होगा। यह सिफारिश इस लिहाज से अहम है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एसाथ करवाने की वकालत कर चुके हैं।

नीति आयोग की मसौदा रिपोर्ट कहती है कि भारत में सभी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और समकालिक तरीके से होने चाहिए ताकि शासन व्यवस्था में प्रचार मोड के कारण होने वाला व्यवधान कम से कम किया जा सके। हम वर्ष 2024 के चुनाव से इस दिशा में काम शुरू कर सकते हैं। 

सीबीएसई अब साल में एक बार सीटेट कराएगा

नई दिल्ली। पहली से आठवीं क्लास तक पढ़ाने वाले टीचरों की नियुक्ति के लिए होने वाली सीटेट की परीक्षा अब साल में केवल एक बार आयोजित की जाएगी। अभी तक यह परीक्षा साल में दो बार ली जाती थी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने संबंध में एचआरडी मिनिस्ट्री को बताया है कि कई तरह की परीक्षाएं आयोजित करने के कारण उसके ऊपर पहले ही अतिरिक्त काम का काफी बोझ है। सीबीएसई इंजिनियरिंग के लिए जेईई-मेन्स और मेडिकल के लिए नीट की परीक्षा भी आयोजित करता है।

बता दें कि बोर्ड ने हाल में साल में दो बार आयोजित किए जाने वाले नैशनल एलिजिबिलटी टेस्ट (नेट) की परीक्षा साल में एक बार लिए जाने की सिफारिश की थी। इस परीक्षा के जरिए असिस्टेंट प्रफेसर के पदों पर भर्तियां की जाती हैं। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘जब सभी बड़ी परीक्षाएं साल में एक बार ही आयोजित की जाती हैं तो केवल नेट और सीटेट की परीक्षाएं ही साल में दो बार आयोजित की जाएं? यह काफी बड़ी परीक्षाएं हैं और इसके लिए भारी संसाधनों की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही साल में दो बार होने के कारण उम्मीदवार इन परीक्षाओं के प्रति बहुत अधिक गंभीर भी नहीं रहते हैं।’

सीबीएसई, एचआरडी मिनिस्ट्री और नैशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) के अधिकारियों ने यह निर्णय लिया है कि सीटेट की परीक्षा अब साल में सिर्फ एक बार केवल एक बार आयोजित की जाएगी। वर्तमान में यह परीक्षा साल में दो बार फरवरी और सितंबर के महीने में आयोजित की जाती है जिसमें हर साल लगभग 9 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं। हालांकि अभी तक इस बात का निर्णय नहीं लिया गया है कि यह परीक्षा किस महीने में आयोजित की जाएगी।

एक अधिकारी ने बताया, ‘जब तक सभी परीक्षाएं लेने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित नैशनल टेस्टिंग सर्विस (एनटीएस) काम करना शुरू नहीं करती तब तक नेट और सेटेट की परीक्षा सीबीएसई ही लेता रहेगा।’ एचआरडी मिनिस्ट्री ने उच्च शिक्षा में एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करने के लिए एनटीएस के रूप में एक स्वतंत्र संस्था के गठन का प्रस्ताव रखा है। हालांकि अभी तक नेट की परीक्षा साल में एक बार कराए जाने के ऊपर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है।

रियल एस्टेट समेत कई क्षेत्र में नए नियम लागू

बिल्डरों की मनमानी पर लगेगी रोक, कोई भी असंतुष्ट नियमों के उल्लंघन के मामले में हर्जाने की मांग कर सकेगा

नई दिल्ली। देश में एक मई 2017 से नये नियम लागू होने जा रहे हैं। देश के रियल एस्टेट क्षेत्र, पंजाब नेशनल बैंक की ओर से सस्ती लोन दरें, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रोजाना बदलाव और बैंक खाते को आधार से जोड़ने की अंतिम तारीख जैसे नियम लागू होने वाले हैं। अपनी इस खबर के माध्यम से आपको इन्हीं नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं।

रियल एस्टेट से जुड़ा कानून RERA होगा लागू

उपभोक्ताओं के अधिकार की सुरक्षा और पारदर्शिता लाने के वादे के साथ बहुत-प्रतीक्षित रियल एस्टेट अधिनियम रेरा (RERA) एक मई 2017 से से लागू हो रहा है। हालांकि अब तक केवल 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ही इन नियमों को अधिसूचित किया है। सरकार ने उपभोक्ता-केंद्रित इस अधिनियम के कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए इसे एक ऐसे युग की शुरुआत बताया है जहां उपभोक्ता ही सब कुछ होगा।

परियोजनाओं और रियल एस्टेट एजेंटों के अनिवार्य पंजीकरण के अलावा इस अधिनियम के कुछ प्रमुख प्रावधानों में परियोजना के निर्माण के लिए एक अलग बैंक खाते में खरीदार से एकत्रित धन का 70 फीसद हिस्सा जमा कराना शामिल है। यह परियोजना के समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करेगा क्योंकि केवल निर्माण उद्देश्यों के लिए ही धन निकाला जा सकता है।

 पांच शहरों में रोज घटेंगे बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

शुरुआत में यह फैसला पुडुचेरी, विशाखापटनम, उदयपुर, जमशेदपुर और चंडीगढ़ में लागू होगा। भारत पैट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) और हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (एचपीसीएल) की यह मांग रही है कि अब रोजाना पेट्रोल-डीजल के दाम तय किए जाएं। यह तीन तेल कंपनियां देश के कुल पेट्रोल पंप में से 95 फीसद की हिस्सेदारी रखते हैं। देश में कुल 58000 पेट्रोल पंप हैं। यह तेल कंपनियों पांच राज्यों में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च करेंगी जो की आगे चलकर देशभर में लागू कर दी जाएंगी।

पीएनबी ने एमसीएलआर में की कटौती

पंजाब नेशनल बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में 0.15 फीसद तक की कटौती करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले से बैंक के नये लोन एक मई, 2017 से प्रभावी हो जाएंगे।आपको बता दें कि नया एमसीएलआर 8.05% से 8.65% के बीच होगा। दरअसल ये मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स पर आधारित लेंडिंग रेट है जो कर्ज दरें तय करने के लिए बैंकों का फॉर्मूला है। एमसीएलआर, बॉरोइंग रेट और डिपॉजिट रेट के आधार पर तय होता है।

बैंक खाते को आधार से जोड़ने का आखिरी मौका

बैंक या दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में अकाउंट खोला है तो आपको 30 अप्रैल तक नो योर कस्टमर (केवाईसी) डिटेल या आधार नंबर देना होगा। ऐसा नहीं करने पर आपका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाएगा। ऐसे में आपके पास यह काम करने के लिए सिर्फ एक दिन का वक्त बचा है।ऐसा नहीं करने पर आपका खाता ब्लॉक भी किया जा सकता है।

हालांकि, ऐसी सभी खाताधारकों के साथ नहीं होगा, बल्कि जिनके खाते 1 जुलाई 2014 से 31 अगस्त 2015 के बीच खुले हैं, उन्हें ही एफएटीसीए नियमों का पालन करना है। आपको बता दें कि आरबीआई और आयकर विभाग के निर्देशों के मुताबिक बैंक उपभोक्ताओं को अपने खातों को आधार नंबर से लिंक कराना जरूरी कर दिया गया है।

नीति आयोग ने की सरकारी सेवाएं आउटसोर्स करने की सिफारिश

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नई दिल्ली। “देश की प्रमुख नीति-निर्माता संस्था नीति आयोग ने सरकारी तंत्र पर निर्भरता कम करने के लिए सार्वजनिक सेवाओं को निजी सेवाओं हाथों में सौंपने यानी आउटसोर्स कराने का सुझाव दिया है।”

नीति आयोग ने शासन तंत्र में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करने की सिफारिश भी की है। आयोग का मानना है कि यह एक एेसा कदम है जो स्थापित करियर नौकरशाही में प्रतिस्पर्धा लाएगा। आयोग ने हाल ही में जारी तीन वर्षीय कार्रवाई एजेंडे की रिपोर्ट में 2018-19 के अंत तक शासन संबंधी कामकाज को पूरी तरह से डिजिटिलाइज करने का लक्ष्य रखा है।

इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सिविल सेवाएं सरकार की रीढ़ हैं और इन्हें त्वरित निर्णय लेने और उन्हें लागू करने के लिए सशक्त बनाए जाने की जरूरत है। लगातार उच्च स्तरीय प्रदर्शन को केवल तभी हासिल किया जा सकता है जब इसे अच्छे प्रदर्शन को पुरस्कृत करने और खराब को दंडित करने के निष्पक्ष पैमाने पर मापा जाएगा।

तेल का खेल : ग्राहकों को हर साल 250 करोड़ रुपये की चपत

कोटा। हाल ही में इलेक्ट्रोनिक चिप के जरिए पेट्रोल पंप पर हो रहे घोटाले के वीडियो खूब वायरल हुए। अब खबरे है कि यह पूरा घोटाला करीब 250 करोड़ रुपये सालाना का हो सकता है। यह कीमत तब आंकी जा रही है, जब माना जाए कि पेट्रोल पंप पर 10 फीसदी कम तेल दिया जाता है।

पेट्रोलियम मंत्रायल के आंकड़ो के अनुसार, राज्यों के 59,595 पेट्रोल पंपों से 3.5 करोड़ उपभोक्ताओ द्वारा करीब 2,500 करोड़ रुएये का पेट्रोल-डीजल हर साल खरीदा जाता है। लोगों ने कहा कि यूपी एसटीएफ द्वारा सामने लाया गया घोटाला समूद्र में बाल्टी पर भर पानी के समान है। एसटीएफ ने 7 पेट्रोल पंपों पर छापेमारी कर ईंधन देने में घोटाले का खुलासा किया था।

इस घोटाले में 1000 से ज्यादा मशीनों से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी रविंद्र ने कहा कि लोगों को 10 से 15 फीसदी कम तेल मिलता है। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसटीएफ का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा मुरादाबाद में भी 5 पेट्रोल पंपों पर छापेमारी में 2 इंजीनियरों को हिरासत में लिया गया।

इस मुद्दे पर एसटीएफ का गठन करने वाले पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कारवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह लोगों को पेट्रोल पंपों से भरोसा कम होगा। इस पूरे प्रकरण में सिर्फ कम ईँधन ही नहीं, बल्कि ईंधन में मिलावट भी बड़ी समस्या है। 

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सात पेट्रोल पंप में चिप और रिमोट कंट्रोल के जरिए पेट्रोल और डीजल की चोरी का खेल पकड़ा गया । सभी पेट्रोल पंपों की मशीनों में तेल चुराने के लिए लगाई गई चिप और इनके रिमोट बरामद हुए हैं। पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी एक चिप के माध्यम से होती है। इस चिप के खेल में एक हजार रुपए का पेट्रोल-डीलज भरवाने पर ग्राहक को 100 से 50 रुपए की चपत लगाई जा रही थी।

ऐसे देते थे धोखा

पेट्रोल पंप में इस खेल में अमूमन दो से तीन लोग शामिल रहते थे। इसमें एक पेट्रोल डालता था और दूसरा कैश का बैग लेकर खड़ा रहता था। बैग लेकर खड़े रहना वाला पैसों के साथ ही रिमोट रखता था। मौका मिलते ही वह रिमोट दबा देता। रिमोट के दबाते ही पाइप से तेल गिरना बंद हो जाता था लेकिन मशीन की स्क्रीन पर तेल और पैसे का मीटर अपनी रफ्तार से ही चलता रहता था।

आप मीटर रीडिंग देखते रहे और सेंध लग गई

मान लें कि आप पेट्रोल पम्प पर गए और 600 रुपये का पेट्रोल डलवाया। 600 रुपये का पेट्रोल भरवाने में करीब 1 सवा मिनट का समय लगता है। आपका सारा ध्यान मीटर की रीडिंग पढ़ने में निकल जाता है और अगर इस बीच 10 सेकंड के लिए भी स्विच ऑफ होता है तो समझ लीजिए कि आपके 600 रुपये के पेट्रोल में करीब 50-100 रुपये का टांका यह शातिर लगा देते हैं।

ह्युंदै ने नई एसयूवी कोना का टीज़र लॉन्च किया

नई दिल्ली। ह्युंदै मोटर्स ने अपनी आने वाली नई एसयूवी ‘कोना’ का एक नया टीज़र लॉन्च किया है। यह नई एसयूवी इस साल जून में होने वाले न्यूयॉर्क ऑटो शो में पेश की जाएगी। भारतीय मार्केट के हिसाब से ऐसा माना जा रहा है कि यह एसयूवी ह्युंदै की क्रेटा और ट्यूसन के बीच के सेगमेंट के लिए लाई जाएगी।  इस एसयूवी के जरिए ह्युंदै इंटरनैशनल मार्केट में अपनी प्रतिद्वंद्वी निसान ज्यूक को कड़ी टक्कर देने की योजना बना रही है।

ह्युंदै की यह एसयूवी i20 के प्लैटफॉर्म पर बनी है और बड़े अंतरराष्ट्रीय मार्केट को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे पहले ह्युंदै ने अपनी क्रेटा को केवल भारत और साउथ अफ्रीका जैसे इमर्जिंग मार्केटों के लिए ही पेश किया था। यह कार कूपे-एसयूवी कॉन्सेप्ट पर आधारित है।  हाल में रिलीज़ किए गए टीज़र में कोना के ड्यूल हेडलाइट सेटअप की डिजायन को दिखाया गया है। यह हेडलाइट निसान ज्यूक की तरह ही स्लीक डिजायन की है।

 ह्युंदै इस क्रॉसओवर में स्टाइलिश इंटीरियर और एक्सटीरियर का इस्तेमाल करेगा। ऐसा भी कहा जा रहा है कि ह्युंदै इस कार में हाल में लॉन्च की गई i30 हैचबैक में इस्तेमाल किए जा रहे इंजन को ही लगाएगी।यह कार भारत में कब लॉन्च होगी इसकी कोई सूचना नहीं है लेकिन ह्युंदै की आक्रामकता से साफ है कि वह भारत में भी एसयूवी सेगमेंट पर ही फोकस कर रहा है इसी को देखते हुए भारत में ट्यूसन और सैंटा फे पेश की गई थीं।

नीट परीक्षा को देख बस मालिकों ने बढ़ाया किराया

कोटा।  नीट परीक्षा को देख बस मालिकों ने किराया बढ़ा दिया है। यहाँ  से हजारों विद्यार्थी परीक्षा देने दूसरे शहरों में जाएंगे। एेसे में विद्यार्थियों ने अभी से ही भीड़भाड़ से बचने के लिए टिकट बुक करवाना शुरू कर दिया है। यात्री भार देखते हुए  बस मालिकों ने इस मौके का फायदा उठाना शुरू कर दिया है । बस मालिकों ने विभिन्न रूटों पर किराए में वृद्धि कर दी है।

बस मालिकों का कहना है कि कोटा से जयपुर का किराया निजी बस संचालक ने सिटिंग का 300 और स्लीपर का 400 रुपए किराया बताया, जबकि यह किराया आमदिनों में 200 व 300 रुपए ही है। इसी तरह अजमेर व जोधपुर रूट की बसों के किराए में भी 50 से 100 रुपए की बढ़ोतरी की है। इस किराए में परीक्षा तिथि तक और बढ़ोतरी हो सकती है।

हाँ किराया बढ़ाया 

बस मालिक अमित शर्मा का कहना है  कि परीक्षा के लिए अतिरिक्त बसें लगाते हैं। बाद में सभी रूटों की बसें खाली आती हैं। इसलिए किराए में 50 से 100 रुपए की बढ़ोतरी की है।