रूस से तेल आयात का ब्‍योरा देने से भारत सरकार का इंकार, जानिए असली वजह

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नई दिल्‍ली। Russia Oil Imports: रूस से भारत के तेल आयात के डेटा को लेकर पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। अधिकारियों ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत इसे लेकर आंकड़े साझा करने से इनकार कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाले पेट्रोलियम प्‍लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने इसके पीछे तर्क दिया है।

प्रकोष्‍ठ का कहना है कि ऐसी जानकारी व्यावसायिक रूप से संवेदनशील है। इसे सार्वजनिक रूप से जाहिर नहीं किया जा सकता। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस रुख का समर्थन किया है। ऐसा करते हुए व्यापक राष्ट्रीय और भू-राजनीतिक पहलुओं का हवाला दिया है।

देश के आधार पर और कंपनी के आधार पर कच्चे तेल के आयात का विवरण व्यावसायिक और गोपनीय है। इसलिए इसे आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(डी) और 8(1)(ई) के तहत साझा नहीं किया जा सकता। हालांकि, कुल आयात की मात्रा और उसका मूल्य पीपीएसी की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकता है।
केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ)

क्या था मामला

  • इसमें जून 2022 से जून 2025 के बीच रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की खेप के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।
  • पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस अनुरोध में विशेष रूप से कंपनी-वार ब्योरा मांगा गया था।
  • इसमें आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, ओएनजीसी विदेश, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं।

हालांकि, केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा: ‘कच्चे तेल के आयात से संबंधित देश-वार और कंपनी-वार जानकारी व्यावसायिक और गोपनीय प्रकृति की है। आरटीआई अधिनियम 2005 के सेक्शन 8(1) (डी) और 8 (1) (ई) के तहत इसे जाहिर करने से छूट हासिल है। हालांकि, कच्चे तेल के आयात की कुल मात्रा और मूल्य (वर्तमान और ऐतिहासिक दोनों) पीपीएसी की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं।’

आवेदक ने दिया था तर्क
सुनवाई के दौरान आवेदक ने तर्क दिया कि इस क्षेत्र के कामकाज को समझने के लिए ऐसे डेटा तक पहुंच जरूरी है। इसके बावजूद आयोग ने जानकारी जाहिर न करने के पक्ष में फैसला सुनाया।

अपने अंतरिम आदेश में सीआईसी ने कहा कि जानकारी जाहिर करने से रणनीतिक और आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही दूसरे देशों के साथ संबंधों पर भी असर पड़ेगा। इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा संवेदनशील भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा हुआ है।

आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(डी) के तहत दी गई छूट को बरकरार रखा। यह निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी जा सकती।

गोपनीयता पर सरकार के रुख का समर्थन करते हुए भी आयोग ने प्रक्रियागत चूकों को लेकर चिंताएं जताईं। आयोग ने पीपीएसी के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कारण है कि पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए थे। आयोग ने पूछा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

इसके अलावा, सीआईसी ने जानकारी को सक्रिय रूप से जाहिर करने के मामले में भी कमियां पाईं। इसमें यह बताया गया कि जवाब देने वाले की वेबसाइट पर ‘सूचना का अधिकार’ टैब में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। अथॉरिटी को निर्देश दिया गया कि वह आरटीआई एक्ट, 2005 के सेक्‍शन 4 का पालन सुनिश्चित करे।