निर्भया केस/ दोषी पवन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

0
1137

नई दिल्ली। दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषी पवन कुमार गुप्ता ने तीन मार्च की तय फांसी की तारीख टालने के लिए दो दिन पहले जो क्यूरेटिव याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी उस पर कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। याचिका पर पांच न्यायाधीशों की पीठ सुबह 10.25 पर चैम्बर में विचार करेगी।

16 दिसंबर की रात दिल्ली में चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। इस दौरान छात्रा से इतनी दरिंदगी हुई थी कि बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चारो दोषियों मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को फांसी की सजा सुनाई गई है।

दो दिन पहले ही दाखिल की गई थी क्यूरेटिव याचिका
फांसी से बचने और मामले में देरी करने के जिस उद्देश्य से पवन ने मात्र दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी वो पूरा होता नहीं दिख रहा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की शाम को दाखिल हुई क्यूरेटिव याचिका को अगले ही कार्य दिवस सोमवार को सुबह नियमित अदालत बैठने से पांच मिनट पूर्व चैम्बर में सुनवाई के लिए लगा लिया। क्यूरेटिव याचिका पर न्यायाधीश चैम्बर में सर्कुलेशन के जरिये विचार करते हैं। पवन गुप्ता की क्यूरेटिव याचिका पर न्यायमूर्ति एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नारिमन, आर भानुमती और अशोक भूषण विचार करेंगे।

पटियाला हाउस कोर्ट में भी सोमवार को होगी सुनवाई
पवन ने शुक्रवार की शाम सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और उसके बाद शनिवार को उस याचिका को आधार बनाकर पटियाला हाउस अदालत में अर्जी देकर तीन मार्च का डेथ वारंट निरस्त करने की मांग की। पटियाला हाउस अदालत ने पवन की अर्जी पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। पटियाला हाउस कोर्ट में भी सोमवार को ही सुनवाई होगी। पवन ने उस अर्जी में सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका लंबित होने का आधार दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10.25 पर ही याचिका पर सुनवाई हो जाने से पटियाला हाउस अदालत में पवन की ओर से मामला लंबित रहने की दी गई दलील शायद उस वक्त तक बची न रहे। वैसे सब कुछ सोमवार की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

पवन के अलावा सभी के कानूनी विकल्प खत्म
पवन गुप्ता ने इसके अलावा अभी तक राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल नहीं की है। संभव है कि वह क्यूरेटिव याचिका पर फैसला आने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करे। वैसे निचली अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सभी दोषियों को कानूनी विकल्प अपनाने के लिए दिये गये सात दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद ही तीन मार्च का डेथ वारंट जारी किया था। पवन के अलावा बाकी के तीन दोषी मुकेश, अक्षय और विनय के कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं।

तीनों की क्यूरेटिव याचिका तक सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। इसके बाद राष्ट्रपति उनकी दया याचिका भी ठुकरा चुके हैं। हालाकि इस सबके बावजूद दोषी अक्षय सिंह ने राष्ट्रपति के समक्ष नयी दया याचिका दाखिल की है और उसे आधार बनाकर उसने भी पटियाला हाउस अदालत मे अर्जी दाखिल कर तीन मार्च का डेथ वारंट निरस्त करने की मांग की है।

उधर केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अलग से एक याचिका दाखिल कर सभी दोषियों को साथ फांसी देने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे रखी है। सरकार का कहना है कि जिन दोषियों के कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं उनकी सजा पर अमल की इजाजत दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि इस याचिका के लंबित रहने का निचली अदालत से दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होने पर असर नहीं पड़ेगा। केन्द्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पांच मार्च तक के लिए सुनवाई टाल दी थी।