कोचिंग से शुरू हुआ नीट के पेपर लीक का खेल, 25 लाख में सौदा तय

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2025 में पेपर लीक कराने वाला गिरोह वर्ष 2026 में फिर सवालों के घेरे में

नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा प्रणाली की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के मुताबिक, जयपुर के जमवारामगढ़ क्षेत्र के एक ही परिवार ने कथित तौर पर लगातार दो साल तक पेपर लीक गिरोह से सौदा कर परीक्षा को ‘मुनाफे का पारिवारिक धंधा’ बना दिया।

जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी विकास बिंवाल ने न सिर्फ इस साल बल्कि पिछले साल NEET-2025 में भी करीब 25 लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र हासिल किया था। आरोप है कि इस लीक पेपर को याद कर विकास और उसके चार भाई-बहनों ने परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की और देश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पा लिया।

मीडिया सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत सीकर में हुई, जहां विकास की मुलाकात कथित मास्टरमाइंड यश से कोचिंग के दौरान हुई थी। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, जिसके बाद यश ने परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। विकास ने यह बात अपने पिता मांगीलाल और चाचा दिनेश बिंवाल को बताई, जिसके बाद पूरे परिवार ने इस सौदे को मंजूरी दे दी।

बताया जा रहा है कि 25 लाख रुपये में सौदा तय हुआ और परीक्षा से तीन दिन पहले प्रश्नपत्र विकास तक पहुंचा दिया गया। इसके बाद उसने अपनी बहन प्रगति और चचेरी बहनों गुंजन, सानिया और पलक के साथ मिलकर पेपर की गहन तैयारी की। नतीजतन, 14 मई 2025 को घोषित परिणाम में सभी पांचों भाई-बहनों ने उच्च रैंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट सुनिश्चित कर ली।

जांच एजेंसियों को छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड में भी भारी विसंगतियां मिली हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक छात्र जिसने 12वीं में महज 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और NEET-2024 में 270 अंक ही हासिल कर पाया था, उसने अगले ही साल सरकारी कॉलेज में दाखिला पा लिया। इसी तरह, एक छात्रा के 2024 में 332 अंक थे, लेकिन 2025 में वह 99.08 परसेंटाइल तक पहुंच गई। अन्य दो बहनों का भी प्रदर्शन कोचिंग टेस्ट में औसतन 320 अंक के आसपास था, लेकिन मुख्य परीक्षा में उन्होंने 92 और 94 परसेंटाइल हासिल कर ली।

NEET-2026 में फिर सौदा
हैरानी की बात यह है कि इस ‘सफलता’ से उत्साहित होकर परिवार ने इस साल NEET-2026 के लिए भी उसी गिरोह से संपर्क किया। आरोप है कि इस बार चौथे भाई ऋषि बिंवाल के लिए सौदा किया गया, जिसका शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद कमजोर रहा है वह 10वीं में 45 प्रतिशत और 12वीं में ग्रेस मार्क्स के सहारे पास हुआ था। यदि यह मामला उजागर नहीं होता, तो वह भी कथित तौर पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला पा सकता था।

आरोपियों को रिमांड पर भेजा गया
इस मामले में CBI ने कड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी शुभम खैरनार, पराग यादव, मांगीलाल, विकास और दिनेश बिंवाल को दिल्ली की विशेष CBI अदालत में पेश किया, जहां से सभी को 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है।

घर में घुसने के लिए छत का सहारा
जांच के दौरान जब CBI टीम जमवारामगढ़ स्थित आरोपी के घर पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजे बंद कर लिए। इसके बाद टीम ने पड़ोसी की छत के रास्ते घर में प्रवेश किया।

फार्महाउस से मिले अहम सबूत
इसके अलावा, CBI ने आरोपियों के फार्महाउस पर खड़ी दो लग्जरी गाड़ियों के लॉक तुड़वाकर तलाशी ली, जहां से संदिग्ध दस्तावेज, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।