सीड बॉल अभियान बनेगा हरित राजस्थान की मजबूत नींव: कुलगुरु सारस्वत

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कोटा। भारत विकास परिषद, राजस्थान दक्षिण-पूर्व प्रांत की एवं कोटा विश्वविद्यालय, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से 15 दिवसीय सीड बॉल निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियो के द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया तत्पश्चात वनस्पति विभाग की आंतरिक समन्वयक डॉ श्वेता व्यास के द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया।

कार्यशाला में कोटा विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य जनसहभागिता के माध्यम से वृक्षारोपण को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता विकसित करना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के क्षेत्रीय गतिविधि संयोजक पर्यावरण कमल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियाँ वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण एवं वनों की कटाई जैसी समस्याओं से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि सीड बॉल निर्माण जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। भावी पीढ़ी के लिए हमे पर्यावरण का संरक्षण करना आवश्यक हैं।

मुख्य वक्ता प्रो. प्रवीण माथुर पूर्व विभागाध्यक्ष पर्यावरण महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय अजमेर ने पर्यावरण संरक्षण के वैज्ञानिक एवं सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीड बॉल तकनीक कम लागत में अधिक हरियाली विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने बताया कि मिट्टी, गोबर एवं विभिन्न प्रजातियों के बीजों से तैयार सीड बॉल वर्षा ऋतु में स्वतः अंकुरित होकर पौधों के रूप में विकसित होती हैं। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण के अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कोटा विश्विद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर बी पी सारस्वत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है। प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कुछ पौधों के संरक्षण का संकल्प ले, तो पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं समाज के सभी वर्गों से हरित अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।

भारत विकास परिषद दक्षिण पूर्व प्रांत की प्रांतीय अध्यक्ष सुनीता गोयल जॉली के द्वारा कहा गया की परिषद की समस्त शाखाएं पर्यावरण संरक्षण के अनेक कार्य कर रही हैं उसी कड़ी में यह सीड बॉल कार्यशाला है। यह आगामी 15 दिनों तक निरंतर संचालित की जाएगी।

राजस्थान दक्षिण-पूर्व प्रांत की 37 शाखाओं के सदस्य प्रतिदिन कार्यशाला में भाग लेकर सीड बॉल निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि परिषद के कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के सहयोग से बड़ी संख्या में सीड बॉल तैयार कर वर्षा ऋतु में विभिन्न क्षेत्रों में विसर्जित की जाएंगी, जिससे अधिकाधिक पौधों का अंकुरण सुनिश्चित हो सके।

वनस्पति शास्त्र विभाग की समन्वयक डॉ. मृदुला खंडेलवाल के द्वारा सीड बॉल कार्यशाला की संपूर्ण रूपरेखा सभी के समक्ष रही साथ ही अतिथियो व परिषद सदस्य को मिट्टी, गोबर एवं बीजों से सीड बॉल तैयार करने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों एवं परिषद सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष अधिष्ठाता स्नातकोत्तर प्रोफेसर घनश्याम शर्मा ,प्रोफेसर जे पी शर्मा, डॉ अनुकृति शर्मा, डॉ. विक्रांत शर्मा, डॉ. आशीष आसोपा, डॉ.शिखा दाधीच, प्रोफेसर वंदना शर्मा , डॉ. सरिता सोलंकी, डॉ. प्रियंका सैनी, डॉ. सपना भार्गव, डॉ. पूनम व्यास, डॉ.शिवाली खारोलीवाल, डॉ.भाविका कंवर, भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संस्कार गतिविधि संयोजक रवि प्रकाश विजय, प्रांतीय कोषाध्यक्ष महेंद्र सिंघवाल, सभी शाखाओं के अध्यक्ष , सचिव, कोषाध्यक्ष व पर्यावरण संयोजक, परिषद के सदस्य वनस्पति विभाग से समस्त विधार्थी उपस्थित रहे।