जयपुर। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।
इस पूरे मामले में सीकर में अब तक 14 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये भी सवाल उठ रहा है कि राजस्थान एसओजी ने एफआईआर दर्ज करने में बहुत देर की जबकि सारे सबूत सामने थे।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में एसओजी की जांच के दौरान पता चला कि केरल से सीकर तक पेपर पहुंचा। 1 मई को केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे चूरू के एक छात्र ने सीकर के एक काउंसलर को कथित सैंपल पेपर भेजा था। इसके बाद यह पेपर कोचिंग संस्थानों, फोटोकॉपी दुकानों और छात्रों तक पहुंचा। हालांकि इस पूरे मामले में अभी जांच जारी है और अंतिम स्थिति आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
जांच एजेंसियों के अनुसार परीक्षा से एक दिन पहले यानी 2 मई की रात कथित “गेस पेपर” व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया । बाद में इसकी फोटोकॉपी भी विभिन्न स्थानों पर बांटी गई। SOG के एडीजी विशाल बंसल ने पुष्टि की कि यह गेस पेपर सोशल मीडिया और फोटोकॉपी दुकानों तक पहुंचा था तथा इसकी जांच की जा रही है।
सीकर से 14 हिरासत में
पूरे विवाद की जांच में राजस्थान का सीकर जिला सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) लगातार मामले की जांच कर रही थीं। अब तक 14 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है। हालांकि अब मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है, इसलिए राजस्थान SOG की अब तक की जांच रिपोर्ट भी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है।
100 से ज्यादा सवाल मैच होने का दावा
जांच में सामने आया कि वायरल गेस पेपर के बड़ी संख्या में प्रश्न वास्तविक NEET परीक्षा से मेल खाते थे। सूत्रों के मुताबिक बायोलॉजी के करीब 90 और केमिस्ट्री के लगभग 35 सवाल हूबहू परीक्षा में पूछे गए। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 400 प्रश्नों के सेट में से करीब 125 प्रश्न असली पेपर से मेल खाते थे। इसी वजह से मामला सामान्य “गेस पेपर” से आगे बढ़कर संभावित पेपर लीक और संगठित नेटवर्क की जांच तक पहुंच गया।
लाखों रुपये में बेचा गया कथित पेपर
जांच एजेंसियों के अनुसार शुरुआत में यह कथित गेस पेपर 2 से 5 लाख रुपये तक में बेचा गया। बाद में परीक्षा से ठीक पहले यही सामग्री 30 हजार रुपये तक में उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की मनी ट्रेल खंगाल रही हैं।
परीक्षा वाले दिन ही छात्रों ने की थी शिकायत
सूत्रों के मुताबिक परीक्षा वाले दिन कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत दी थी कि कुछ अभ्यर्थियों के पास पहले से ऐसे सवाल मौजूद थे, जो परीक्षा में पूछे गए। बाद में 7 मई को NTA को भी कथित अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें मिलीं, जिसके बाद एजेंसी ने 8 मई को मामले को केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया।
कई राज्यों तक फैले नेटवर्क के संकेत
SOG की जांच में सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर और देहरादून तक नेटवर्क फैलने के संकेत मिले हैं। सीकर के पीपराली रोड स्थित एक कंसल्टेंसी सेंटर को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है। एजेंसियों को संदिग्धों के मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेज भी मिले हैं। सोमवार को जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, जिसे जांच एजेंसियां इस कथित नेटवर्क का अहम सदस्य मान रही हैं।

