नई दिल्ली। Stock Market This Week : इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार की चाल कई अहम घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होने वाली है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खास तौर पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों की दिशा तय करेंगी।
सोमवार, 4 मई से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना शुरू होगी। ऐसे में बाजार की नजर सबसे पहले इन चुनाव परिणामों पर रहेगी। निवेशक यह देखने की कोशिश करेंगे कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी क्या पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दे पाती है या नहीं। साथ ही केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर खास दिलचस्पी बनी हुई है, जहां उसकी मौजूदगी फिलहाल सीमित है।
इस मुद्दे पर Hariprasad K, जो Livelong Wealth के संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट हैं, का कहना है कि इस समय बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर चुनाव नतीजे ही होंगे। उनके मुताबिक निवेशक खासतौर पर इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या केंद्र की सत्ताधारी पार्टी विपक्ष शासित राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत कर पाती है या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव नतीजों का असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। अगर परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं तो बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन अप्रत्याशित नतीजे आने पर उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर रहेगी। यह इलाका दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बड़ा मार्ग है। यहां किसी भी तरह की बाधा आने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ती है। इससे बाजार पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इस हफ्ते निवेशक वैश्विक घटनाक्रम पर भी उतनी ही नजर रखेंगे जितनी घरेलू खबरों पर।
रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के एसवीपी रिसर्च अजीत मिश्रा का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है। भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर काफी निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति चिंता की बात है। महंगा कच्चा तेल न सिर्फ रुपये पर दबाव डालता है बल्कि कंपनियों के मुनाफे और सरकार के वित्तीय संतुलन को भी प्रभावित करता है।
इस हफ्ते बाजार की दिशा कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों से तय होगी। निवेशकों की नजर मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों पर रहेगी, जिनमें 4 मई को मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, 6 मई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और 8 मई को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े शामिल हैं। ये डेटा देश की आर्थिक स्थिति और मजबूती का संकेत देंगे।
कॉर्पोरेट जगत की बात करें तो कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें अंबुजा सीमेंट्स, बीएचईएल, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज ऑटो जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों का असर उनके शेयरों के साथ पूरे बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, इस हफ्ते बाजार पूरी तरह खबरों के आधार पर चलेगा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव, सीजफायर की स्थिति और कूटनीतिक बातचीत में क्या प्रगति होती है, इस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति और बिगड़ती है तो बाजार में और अधिक अस्थिरता आ सकती है।
वहीं स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीणा का कहना है कि हफ्ते की शुरुआत में बाजार पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया दे सकता है, जिससे एक से दो दिन तक उतार-चढ़ाव रह सकता है। हालांकि उनका मानना है कि सबसे बड़ा फोकस कच्चे तेल की कीमतों पर ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने के बाद थोड़ी नरम हुई हैं, लेकिन अगर इनमें फिर से तेजी आती है तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं कीमतों में गिरावट निवेशकों के लिए राहत लेकर आ सकती है।
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और रुपये की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। पिछले हफ्ते की बात करें तो छुट्टियों के कारण कारोबार कम दिनों का रहा, लेकिन इसके बावजूद बाजार में हल्की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स करीब 249 अंक चढ़ा, जबकि निफ्टी में लगभग 100 अंकों की बढ़त देखने को मिली।
