बोले- घटिया निर्माण हुआ तो खैर नहीं, जीरो टॉलरेंस की नीति पर होगा काम
सांगोद/पनवाड़। राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को सांगोद विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचल का सघन दौरा किया। अपने दौरे के दौरान मंत्री नागर ने कृषि और सिंचाई को प्राथमिकता देते हुए हरिश्चंद्र सागर परियोजना के अंतर्गत चल रहे नहरों के द्वितीय चरण के मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्यों का मौके पर पहुंचकर भौतिक निरीक्षण किया।
मंत्री नागर ने नहरों पर चल रहे निर्माण कार्य से टाइल हटवाकर निर्माण सामग्री की भी जांच की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान मंत्री नागर ने निर्माणाधीन नहरों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि हरिश्चंद्र सागर परियोजना क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा है। परियोजना के सुदृढ़ीकरण के लिए राजस्थान सरकार द्वारा दो चरणों में भारी बजट आवंटित किया गया है।
प्रथम चरण में पूर्व में 1930.68 लाख की राशि से मरम्मत कार्य कराए गए थे, वहीं द्वितीय चरण में बजट घोषणा 2024-25 के अंतर्गत 30 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।
इसके तहत मुख्य नहर, वितरणिकाओं और माइनरों के लाइनिंग एवं सीपेज रोकने का कार्य प्रगति पर है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य नहरी तंत्र को पक्का कर पानी की बर्बादी रोकना है ताकि अंतिम छोर (टेल) पर स्थित किसानों के खेतों तक पर्याप्त पानी पहुँच सके।
हैदराबाद की फर्म को चेतावनी
मंत्री नागर ने निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में लगी हैदराबाद की एक फर्म के पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अधिकारियों को सतर्क किया। उन्होंने बताया कि यह फर्म पूर्व में आलनिया डैम परियोजना में भी कार्यरत थी, जहाँ घटिया निर्माण के कारण इसे हटाया गया था। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस फर्म के कार्यों की बारीकी से जांच की जाए और गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा, “राजस्थान सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। यदि निर्माण में कोई अनियमितता पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटिया निर्माण होने पर उसे तुड़वाकर दोबारा बनवाया जाएगा।”
अस्थाई डैम और लिफ्ट सिंचाई योजना पर चर्चा
दौरे के दौरान मंत्री नागर समद खेड़ी और बिशन खेड़ी के मंदिरों में दर्शन के बाद हरिश्चंद्र सागर परियोजना के पुराने अस्थाई डैम पर भी पहुँचे। ग्रामीणों और अधिकारियों से जानकारी लेते हुए उन्होंने पाया कि चूने से बने इस पुराने डैम पर गेट नहीं होने के कारण पानी का ठहराव नहीं हो पा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने पानी को लिफ्ट करके नहरों में भेजने की योजना पर काम करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ आगामी सीजन के लिए जल वितरण की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की, ताकि किसानों को सिंचाई के दौरान समस्याओं का सामना न करना पड़े।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार
मंत्री नागर ने विश्वास दिलाया कि मुख्य नहर के साथ-साथ सभी माइनर और वितरणिकाओं को सीसी लाइनिंग से पक्का किया जाएगा। इससे न केवल सीपेज रुकेगा, बल्कि पनवाड़ क्षेत्र के साथ-साथ सांगोद क्षेत्र के दर्जनों गाँव भी नहरी पानी से लाभान्वित हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि नहरों का यह सुदृढ़ीकरण सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की खुशहाली से जुड़ा है। निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अभियंता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
फैक्ट फाइल
- सिंचित क्षेत्र: लगभग 17,978 हेक्टेयर।
- लाभान्वित क्षेत्र: खानपुर तहसील के 16 गाँव एवं सांगोद तहसील के 50 गाँव।
- नहर की कुल लंबाई: मुख्य नहर 37 किमी, 4 वितरिकाएँ और 13 माइनर (कुल 107 किमी)।
- वर्तमान कार्य: मुख्य नहर की 16.860 किमी लंबाई में लाइनिंग और क्षतिग्रस्त पुलियाओं की मरम्मत।

