कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गुरुवार को इन्द्र विहार स्थित अपने आवास पर विभिन्न सरकारी विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा अभियान (समसा), जिला परिषद्, पंचायत समिति, सार्वजनिक निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री नागर ने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ फील्ड में रहकर मॉनिटरिंग करने और कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पाबंद किया।
बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री ने सांगोद के सौंदर्यकरण और पर्यटन की दृष्टि से एक बड़ा निर्देश दिया। उन्होंने सांगोद नगर पालिका अधिशासी अधिकारी ईओ को निर्देशित किया कि उजाड़ नदी के किनारे रिवर फ्रंट विकसित करने के लिए उपयुक्त जगह की तलाश शुरू करें। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट बनने से न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भ्रमण और मनोरंजन के लिए एक बेहतर स्थान मिल सकेगा। इसके लिए उन्होंने जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
पेयजल संकट के लिए करें अग्रिम प्रबंध
आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए ऊर्जा मंत्री ने पेयजल आपूर्ति को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गर्मी में पानी की किल्लत न हो। इसके लिए अभी से व्यापक प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन के माध्यम से पानी की उपलब्धता नहीं है, वहां आवश्यकतानुसार टैंकरों से जलापूर्ति की योजना बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्होंने नए ट्यूबवेल और हैंडपंप की संभावना तलाशने की बात कही।ताकि भूजल स्रोतों का बेहतर उपयोग हो सके। मंत्री ने नौनेरा और अकावद पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। मंत्री नागर ने जोर दिया कि सिंचाई और पीने का पानी वितरण प्रणाली के अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए।
समसा का चार्ज पीडब्ल्यूडी को दें
बैठक में शिक्षा विभाग और ‘समसा’ के कार्यों पर चर्चा करते हुए मंत्री नागर ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्देश दिया। उन्होंने जिला कलेक्टर से बात कर ‘समसा’ के निर्माण कार्यों का चार्ज सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपने की प्रक्रिया पर चर्चा की। ताकि निर्माण की गुणवत्ता और गति में सुधार हो सके। उन्होंने क्षेत्र के जर्जर स्कूलों और सरकारी भवनों की सूची तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए ताकि केंद्र और राज्य सरकार को मरम्मत एवं नए निर्माण हेतु प्रस्ताव भेजे जा सकें। इसके अलावा, उन्होंने सड़कों के निर्माण में तकनीकी सुधार की बात करते हुए कहा कि ग्रेवल की जगह ‘जीएस’ का उपयोग किया जा सकता है।
विकास कार्यों में हो जनभागीदारी
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य करते समय स्थानीय ग्रामीणों को भी शामिल करें। ग्रामीणों से उनकी प्राथमिकता पूछकर ही प्रोजेक्ट तैयार किए जाएं। ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके। फसल कटाई के सीजन को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि जो विकास कार्य या सड़कों का काम फसलों की वजह से रुका हुआ था, उन्हें अब तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए। खेतों के रास्तों और ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण एवं नवीनीकरण के लिए उन्होंने ‘जीरामजी’ के माध्यम से भी नए प्रोजेक्ट्स की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा।
फायर ब्रिगेड की तैनाती के निर्देश दिए
आगामी ग्रीष्म ऋतु में आगजनी की घटनाओं की आशंका को देखते हुए ऊर्जा मंत्री ने जन सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने चीफ फायर ऑफिसर राकेश व्यास को कड़े निर्देश दिए कि सांगोद, कनवास, बपावर, देवली, दीगोद और सिमलिया जैसे प्रमुख केंद्रों पर तुरंत फायर ब्रिगेड (दमकल) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मंत्री नागर ने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आग लगने पर दूर से दमकल आने में समय लगता है। जिससे भारी नुकसान होता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में दमकल की तैनाती से त्वरित राहत मिल सकेगी।
गैस संकट पर विपक्ष को जवाब
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री हीरालाल नागर ने देश में चल रही गैस की किल्लत पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की समस्या है। जिसका समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। जबकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए सक्षम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि गैस की वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है और कहीं भी बड़ी कमी नहीं होने दी जाएगी। विशेष रूप से कोटा के हॉस्टल्स में गैस सप्लाई न रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं। ताकि स्टूडेंट्स को परेशानी न हों।

