Monday, May 4, 2026
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फ्लाइट में इंटरनेट के इस्तेमाल की इजाजत जल्द ही

मुंबई। भारत में हवाई सफर के दौरान फ्लाइट में सुरक्षा कारणों से इंटरनेट के इस्तेमाल इजाजत नहीं होती है, पर हो सकता है कि बहुत जल्द यात्री फ्लाइट के अंदर इंटरनेट का आनंद लेते नजर आएं। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार अगस्त के आखिर तक इसकी इजाजत दे सकती है।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के संयुक्त डीजी ललित गुप्ता ने कहा, ‘हम टेलिकम्यूनिकेशन्ज़ डिपार्टमेंट की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस एविएशन मिनिस्ट्री से बात कर रही हैं। फिलहाल भारतीय एयरस्पेस में वाई-फाई को स्विच ऑफ करना पड़ता है क्योंकि सुरक्षा कारणों से फ्लाइट में इंटरनेट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है।’

गुप्ता ने कहा कि जेट एयरवेज और स्पाइसजेट जैसी भारतीय विमान कंपनियों के पास भी 2018 तक वाई-फाई की सुविधा से लैस बोइंग 737 MAX विमान होंगे।  दुनियाभर में 70 एयरलाइंस हवाई सफर के दौरान यात्रियों को फ्लाइट के अंदर इंटरनेट इस्तेमाल की इजाजत देती हैं। इस दौरान यात्री ईमेल, लाइवस्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो कर ही सकते हैं, साथ ही उन्हें फिल्में डाउनलोड करने और यहां तक कि कॉल करने की भी इजाजत होती है।

इनमें ऐसी विमान कंपनियां भी शामिल हैं जिनकी उड़ानें भारत भी आती हैं। जैसे एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज, सिंगापुर एयरलाइंस और एतिहाद एयरवेज। भारत की बात करें तो जेट एयरवेज और विस्तारा एयरलाइंस में यात्रियों को इंटरनेट का इस्तेमाल किए बिना ऐसा कॉन्टेंट उपलब्ध कराया जाता है जिसे वे अपनी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में डाउनलोड कर सकते हैं। स्पाइसजेट भी यह सुविधा जून के अंत तक देना शुरू कर देगा।

जीएसटी से पहले सॉफ्टवेयर सस्ता करने की जरूरत, सब्सिडी मिले तो बने बात

नई दिल्ली। कारोबारियों और लघु उद्यमियों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए आवश्यक हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर को सस्ता करने की जरूरत महसूस की जाने लगी है।ये सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों का मानना है कि अगर सरकार कारोबारियों और लघु उद्यमियों को सॉफ्टवेयर पर सब्सिडी या किसी तरह की वित्तीय मदद प्रदान करती है तो जीएसटी के दायरे का तेजी से विस्तार होगा।

जीएसटी काउंसिल की तरफ से वस्तुओं और सेवाओं की दरें तय करने के बाद अब कारोबारी और उद्यमियों में रजिस्ट्रेशन में तेजी आएगी।सरकार पहली जून से 15 दिन के लिए रजिस्ट्रेशन फिर शुरू करने जा रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के साथ ही सभी कारोबारियों और उद्यमियों को पहली जुलाई तक जीएसटी में शामिल होने की तैयारी पूरी करनी है।

इसके लिए उन्हें आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी।बाजार में ये सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाली कंपनियां मान रही हैं कि अगर सरकार कारोबारियों और लघु उद्यमियों को वित्तीय राहत देगी तो इन्हें जीएसटी के दायरे में आने के लिए आकर्षित किया जा सकता है।जीएसटी सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक सुधीर सिंह कहते हैं कि जीएसटी के अमल में आने के बाद 2.3 करोड़ नए बिजनेस इसके दायरे में आएंगे।

JEE ADVANCED : मैथ्स स्कोरिंग, फिजिक्स रही औसत लेकिन, केमिस्ट्री ने उलझाया

  • जेईई-एडवांस्ड ,2017 : गत वर्ष से इस बार आसान रहे दोनों पेपर
  • कुल 366 अंकों के दोनों पेपर में मैथ्स रहेगी स्कोरिंग
  • पेपर-2 में मैथ्स के 4 अंकों के सवाल में चारों विकल्प गलत होने से उठाएंगे आपत्ति 
  • 4 जून को ‘आंसर की’ तथा 11 जून को घोषित होगा रिजल्ट
  • 1.70 लाख छात्रों ने दिया जेईई-एडवांस्ड

अरविन्द कोटा।

आईआईटी के लिए हुई इंटरनेशनल प्रवेश परीक्षा जेईई-एडवांस्ड,2017 के दोनों पेपर गत वर्ष से आसान रहे। रविवार को भीषण गर्मी के बावजूद देश के 120 शहरों में 1 लाख 70 हजार परीक्षार्थियों को पेपर ज्यादा कठिन नहीं होने से राहत मिली।

विषय विशेषज्ञों ने दोनों पेपर का विश्लेषण करने के बाद बताया कि इस वर्ष पेपर-1 के मुकाबले पेपर-2 थोड़ा मुश्किल रहा। दोनों पेपर 183-183 अंकों के रहे। पेपर पैटर्न में मामूली बदलाव देखने को मिला। परीक्षार्थियों ने बताया कि ओवरऑल पहले पेपर में मैथ्स आसान रही, फिजिक्स के प्रश्न मॉडरेट थे जबकि केमिस्ट्री के प्रश्न दोनों पेपर में कठिन रहे।

परीक्षा के पेपर 0 से 9 तक 10 कोड में हुए। पेपर विश्लेषण करने के बाद कॅरिअर पॉइंट के अकादमिक निदेशक शैलेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि गत वर्ष जेईई-एडवांस्ड में कटऑफ 24 प्रतिशत थी, लेकिन इस वर्ष पेपर तुलनात्मक रूप से आसान होने से कटऑफ उंची रह सकती है।उन्होंने पेपर-1 को आसान व पेपर-2 को कठिन बताया। इस बार दोनों पेपर में 21-21 प्रश्न ऐसे पूछे गए जिनमें 1 से ज्यादा सही विकल्प थे। सही उत्तर पर 4 अंक तथा गलत जवाब पर 2 अंक नेगेटिव थे।

मैथ्स में 4 अंकों के सवाल पर आपत्ति 
पेपर-2 में कोड-5 में मैथ्स के प्रश्न नं.47 में निश्चित समाकलन के चार विकल्प दिए गए, विषय विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से एक भी सही विकल्प नहीं था, जिससे विद्यार्थियों को दुविधा हुई। इस प्रश्न में बोनस अंक देने के लिए परीक्षार्थियों द्वारा आपत्ति  दर्ज कराई जाएगी।

मैच द कॉलम में थोडा बदलाव
प्रतिवर्ष जेईई-एडवांस्ड के पेपर में मैच द कॉलम प्रश्नों में केवल 2 कॉलम रहते थे लेकिन इस वर्ष 3 कॉलम में से सही ऑप्शन मैच करना था। पेपर में 18 प्रश्न मैच द कॉलम से पूछे गए।

11वीं व 12वीं में वेटेज कितना रहा
पेपर-1 में कक्षा-11वीं से फिजिक्स में 31, केमिस्ट्री में 26 तथा मैथ्स में 30 अंकों के सवाल पूछे गए। जबकि कक्षा-12वीं से फिजिक्स में 30, केमिस्ट्री में 35 तथा मैथ्स में 31 अंकों के सवाल पूछे। इसी तरह पेपर-2 में कक्षा-11वीं से फिजिक्स में 21, केमिस्ट्री में 16 तथा मैथ्स में 13 अंकों के सवाल पूछे गए। जबकि कक्षा-12वीं से फिजिक्स में 40, केमिस्ट्री में 49 तथा मैथ्स में 48 अंकों के सवाल पूछे। 12वीं के प्रश्नों का वैटेज ज्यादा रहा।

केमिस्ट्री से स्कोर तय होगा 

न्यूक्लियस  एकेडमी के निदेशक विशाल जोशी ने बताया कि इस वर्ष केमिस्ट्री से स्कोर तय होगा। कुल मिलाकर केमिस्ट्री के प्रश्न कठिन रहे, फिजिक्स में मॉडरेट प्रश्न पूछे गए जबकि मैथ्स के सवाल आसान रहे। पेपर पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। पेपर-1 में सभी विद्यार्थियों के चेहरे खिले हुए दिखे। दोनों पेपर में केमिस्ट्री ने उनकी कठिन परीक्षा ली। केमिस्ट्री के 1-2 प्रश्नों पर संदेह होने से सभी संस्थानों की आंसर की में अंतर देखा गया।

4 जून को जारी होगी ‘आंसर की’
सबसे कठिन जेईई-एडवांस्ड परीक्षा की अधिकृत ‘आंसर की’ आईआईटी, मद्रास द्वारा जोसा वेबसाइट पर 4 जून को ऑनलाइन जारी की जाएगी। उससे पहले कई कोचिंग संस्थान संभावित ‘आंसर की’ जारी करते हैं। जोसा की वेबसाइट पर परीक्षार्थी ओआरएस तथा स्केन रिस्पांस 31 मई से 3 जून तक ऑनलाइन देख सकेंगे।

रिजल्ट 11 जून को घोषित होगा। आईआईटी, मद्रास की देखरेख में हुई जेईई-एडवांस्ड परीक्षा में 1.74 लाख परीक्षार्थियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। इसमें 33,050 (19 प्रतिशत) गर्ल्स थी।जिसमें से  १.७० लाख छात्रों ने जेईई-एडवांस्ड दिया ।

कोचिंग संस्थानों की फीस के मापदंड भी निर्धारित हों

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कोचिंग संस्थानों के लिए हिदायतें 

  • कोचिंग इंस्टीट्यूट में साप्ताहिक छुट्टी अनिवार्य
  • एक बैच में 30-40 विद्यार्थी से अधिक न हों
  • 3 माह में कोचिंग छोड़ने पर लौटानी होगी फीस

कोटा। कोचिंग विद्यार्थियों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं को रोकने के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कठोर कदम उठाए हैं। आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए कोचिंग संस्थानों, हॉस्टल व मैस संचालकों के लिए 40 बिंदुओं की गाइड लाइन जारी की। इसका विमोचन जिला न्यायाधीश केदारलाल गुप्ता ने किया।

कोचिंग संस्थानों के लिए गाइडलाइन

आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने कहा कि कोटा में कोचिंग छात्रों के सुसाइड के मामले रोकने के लिए यह प्रभावी गाइड लाइन तैयार की है।
विभिन्न राज्यों के 1 लाख 70 हजार से अधिक स्टूडेंट्स कोटा में प्रतिवर्ष आईआईटी तथा मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की क्लास रूम कोचिंग लेते हैं। आयोग की यह निर्देशिका उन्हें आवेदन फॉर्म के साथ अनिवार्य रूप से देनी होगी।

आयोग ने कोचिंग संस्थानों में बढ़ती फीस पर गहरी चिंता जताते हुए फीस के मापदंड तय करने पर जोर दिया। चतुर्वेदी ने कहा कि बाहरी राज्यों के बच्चे कक्षा-6 से ही कोटा के डमी स्कूलों में एडमिशन लेकर कोचिंग लेते हैं। विद्यार्थी पूरे वर्ष कोचिंग में पढाई करते है और अंत में स्कूल में जाकर केवल परीक्षा देते हैं।

प्रमुख कोचिंग संस्थान स्वयं बच्चों के लिए डमी स्कूल की व्यवस्था तक कर देते हैं।इससे स्कूली शिक्षा में गिरावट आ रही है तथा अभिभावकों पर दोहरा आर्थिक भार पड़ रहा है। अभी कुछ कोचिंग संस्थानों में एक फैकल्टी एक बैच में 200-250 स्टूडेंट को पढ़ाते हैं, जबकि यह संख्या 30-40 से अधिक नहीं हो। ताकि प्रत्येक स्टूडेंट पर ध्यान रहे। उन्होंने कहा कि कोचिंग के साथ हॉस्टल, मैस व पेइंग गेस्ट मकान मालिकों के लिए भी दिशानिर्देश जारी करेंगे।

इन बातों की अनुपालना अनिवार्य-

  • राज्य के सभी कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में बोल्ड में यह अंकित करेंगे कि ‘कोचिंग में प्रवेश लेना, कॉलेजों में प्रवेश की गारंटी नहीं है।’
  • कोचिंग संस्थानों की फीस व हॉस्टल की दरें तय करने के लिए निर्धारित मापदंड व नियम बेहद जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों का आर्थिक शोषण न हो सके।
  • प्रत्येक कोचिंग संस्थान में कुल प्रवेश तथा उनमें से कितने प्रतिशत विद्यार्थी चयनित हुए, यह स्पष्ट प्रदर्शित किया जाए।
  • कोचिंग के साथ कक्षा-10वीं तक डमी स्कूल की व्यवस्था पूरी तरह खत्म की जाए। ताकि विद्यार्थी स्कूल की जीवन शैली से विंचत न रहें। इस मामले में सीबीएसई उचित जांच करके नियंत्रण करे।
  • कोचिंग संस्थानों में प्रशिक्षित कॅरिअर काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की सेवाएं दी जाएं।
  • कोचिंग के प्रत्येक बैच में विद्यार्थियों की संख्या 30-40 तक सीमित की जाए ताकि प्रत्येक विद्यार्थी पर ध्यान दिया जा सके।
  • सप्ताह में एक दिन अवकाश अनिवार्य हो। सभी कोचिंग संस्थानों में रविवार को टेस्ट होते हैं, जिससे वे रिलेक्स नहीं हो पाते हैं।
  • कोचिंग विद्यार्थी पढ़ाई के प्रेशर से कोचिंग छोड़ना चाहता है तो 3 माह के भीतर उसे फीस वापस करने का प्रावधान हो।
  • पूरे वर्ष की फीस एकमुश्त न लेकर स्कूलों के अनुसार, त्रेमासिक आधार पर फीस ली लाए।
  •  विद्यार्थियों व अभिभावकों को प्रवेश के समय तथा पूरे सत्र में काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध हो।
  •  सत्र के दौरान टेस्ट के अंकों से बैच बदलने के सिस्टम में परिवर्तन किया जाए।
  • संस्थानों में मेडिटेशन, मनोरंजन आदि को मॉड्यूल में शामिल किया जाए।
  • कोई विद्यार्थी लगातार अनुपस्थित है तो तुरंत उसकी जांच हो तथा परिजनों व बाल कल्याण समिति को सूचित करें।
  • सरकार द्वारा विद्यार्थियों के लिए स्पेशल मेडिकल यूनिट स्थापित की जाए, जहां 24 घंटे सुविधाएं व दवाइयों मिल सके।
  • विद्यार्थियों के आवासीय क्षेत्रों में प्रभावी सीसीटीवी निगरानी हो।
  • बच्चों के कोचिंग आने-जाने के समय टै्रफिक पुलिस का विशेष प्रबंध हो।
  • प्रत्येक कोचिंग में एक डेस्क हो, जहां विद्यार्थी अपने रहने, खानपान, स्वास्थ्य व अन्य शिकायतों को दर्ज करा सके।
  •  सभी संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की सूची एक कॉमन पोर्टल पर हो।
  • उंचे पैकेज के लालच में बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव बनाने वाले कोचिंग शिक्षकों पर कडी कार्रवाई आवश्यक है।
  •  अधिकांश कोचिंग विद्यार्थी 18 वर्ष से कम उम्र के होते हैं, इसलिए संस्थानों में इनकी मॉनिटरिंग बाल कल्याण समिति के क्षेत्राधिकार में हो।
  • रिजल्ट से दो दिन पूर्व सभी संस्थान विद्यार्थियों को सामूहिक प्रोग्राम के जरिए मानसिक रूप से मोटिवेट करें।
  •  प्रवेश परीक्षाओं में जो पास नहीं हो सके, उनके लिए संस्थानों के पास क्या एक्शन प्लान है, यह बताया जाए।

कोर्ट ने व्हाट्सएप के ‘डबल ब्लू टिक’ को सबूत माना, सुनाया फैसला

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नई दिल्ली। शीर्ष अदालतों को पेपरलेस बनाने की योजना का असर अब निचली अदालत में भी देखा जा रहा है। मामला रोहिणी जिला अदालत से जुड़ा है, जहां एक सत्र न्यायाधीश ने प्रतिवादियों को व्हाट्सएप पर मिले अदालत में हाजिर होने की सूचना को समन प्राप्त करना मान लिया और अंतरिम फैसला भी सुना दिया।

व्हाट्सएप पर मिले समन को प्राप्ति मान लेने का ऐसा मामला देश की किसी निचली अदालत में पहली बार है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि समन सर्विस कराने गए कर्मी को कोई प्रतिवादी नहीं मिला। ऐसे में कोर्ट की ओर से उन्हें भेजा गया समन बिना प्राप्ति के वापस आ गया है।

रोहिणी कोर्ट के सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ माथुर की अदालत ने कहा कि यह रिपोर्ट किया गया है कि मामले में प्रतिवादियों को सुनवाई की तारीख पर हाजिर होने के लिए भेजा गया समन बिना प्राप्ति के ही वापस आ गया है।लेकिन अदालत में वादी ने एक शपथपत्र दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि प्रतिवादियों को व्हाट्सएप से समन भेजा गया है।

इसे उन्होंने प्राप्त कर लिया है। दरअसल, मामले में ससुर ने पारिवारिक विवाद में अपनी बहू, उसके मां-बाप और उसके दोस्तों को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा। जब मैसेज उनके फोन में पहुंचा तो उन्होंने इसपर क्लिक किया जिसकी वजह से ससुर के व्हाट्सएप में ‘नीले डबल टिक’ आ गए। ससुर ने इसका प्रिंटआउट निकलवाया और कोर्ट में बतौर सबूत जमा करवा दिया कि बचाव पक्ष को नोटिस सौंप दिए गए हैं।

प्रिंटआउट को रोहिणी कोर्ट के सीनियर सिविल जज कम रेंट कंट्रोलर (नॉर्थ) सिद्धार्थ माथुर ने सबूत के तौर पर मंजूर कर लिया।ऐसे में यह साफ है कि प्रतिवादियों को कोर्ट की सुनवाई के बारे में जानकारी थी। इसके बाद अदालत ने प्रतिवादियों को वादी के फ्लैट में जबरन घुसने पर रोक लगा दी। हालांकि, मामले में अदालत ने प्रतिवादियों को नए सिरे से समन भेजने का निर्देश देते हुए अगली तारीख 24 मई को मुकर्रर कर दी।

यह है मामला

पेशे से वकील ने अदालत में दायर अर्जी में कहा कि उनके बेटे की शादी 13 दिसंबर 2015 को हुई थी। बेटे और बहू वर्णित प्रॉपर्टी के पहले तल पर रहने लगे थे।इसके बाद दोनों के बीच कुछ विवाद हो गया तो बहू जुलाई 2016 में घर छोड़कर चली गई थी, लेकिन वह सितंबर में आ गई। इसके बाद वह 13 फरवरी 2017 को दोबारा चली गई और फिर वापस आ गई।

उन्होंने कहा कि 1 व 2 मई की रात दोनों पक्षों के बीच प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हुआ और इस दौरान बहू ने उनके बेटे को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाई और उनके परिवार को धमकी भी दी।उनका आरोप था कि बहू ऐसा अपने माता-पिता के कहने पर कर रही है। इस घटना के बाद उन्होंने बेटे को घर से बाहर कर दिया है। उन्हें डर है कि बहू और उसके माता-पिता उनके फ्लैट में जबरन घुस सकते हैं। ऐसे में उन्हें ऐसा करने से रोका जाए।

यह तो सच है कि भगवान है…. की धुन पर झूमे श्रोता

एसआर. पब्लिक स्कूल में लक्ष्य समर कैम्प का समापन 

कोटा। एसआर. पब्लिक सी. सै. स्कूल में लक्ष्य समर कैम्प का समापन रविवार को हुआ सांसद ओम बिरला व राजस्थान अभियांत्रिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनपी कौशिक के आतिथ्य  में हुआ । इस अवसर पर जीटीवी टेलेंट हंट में निर्णायक रह चुकी विभा विजयवर्गीय, विद्यालय के चेयरमैन आनंद राठी और निदेशक अंकित राठी भी उपस्थित थे ।

इस अवसर पर बच्चों ने 11 से 21 मई तक समर कैम्प में जो कुछ सीखा उसकी  मंच पर प्रस्तुति दी। तीरंदाजी व शूटिंग में निशाना, कोंगो में ‘मेरा जूता है जापानी, सिन्थेसाइजर में ‘यह तो सच है कि भगवान है’ जैसी धुनों को बजाकर सभी दर्शकों को आनंदित कर दिया ।  विभा विजयवर्गीय ने क्लासिकल राग मल्हार  का प्रदर्शन कर दर्शकों को दाँतों तले अँगुली दबाने को मजबूर कर दिया।

इस कैम्प में पचास से अधिक गतिविधियाँ संचालित की गई । इन गतिविधियों के साथ-साथ बालक-बालिकाओं में अच्छे गुण व संस्कार पल्लवित किए गये । कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी बच्चों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किये गये । शूटिंग रेंज में एसआर स्कूल के छात्र जसवंत शर्मा ने स्वर्ण पदक व दसवीं कक्षा के छात्र अक्षत शर्मा ने रजत पदक प्राप्त किया ।

 इस दौरान मुख्य अतिथि प्रो. कौशिक ने कहा कि बच्चों के विकास में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका एक शिक्षक की होती है । शिक्षक ही वह व्यक्ति है जो बच्चों की क्षमता के अनुरूप उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है । सांसद बिरला ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद जैसी गतिविधियों में भाग लेकर ही बालक का संपूर्ण विकास संभव है ।

 

अब इंजीनियर बनना महज एक सपना रह जाएगा ?

नई दिल्ली। आज भी हर माता पिता अपने बच्चे को इंजीनियर बनाने का ही सपना देखते हैं।  यहीं नहीं, आज की युवा पीढ़ी भी आईटी में ही अपना करियर ढूंढती है। लेकिन क्या उनका ये सपना अब अधूरा रह जाएगा।

पिछले कुछ दिनों से आईटी से जिस तरह की खबरें आ रही है उससे कहीं न कहीं इस क्षेत्र में नौकरी की अनिश्चयता भी बढ़ गई है। पहले हर किसी के मुंह में यहीं था हम इंजीनियर बनेंगे और आईटी में काम करेंगे, लेकिन हाल ही में देश की 7 दिग्गज कंपनियों की जो हालत सामने आई है, उससे लगता है आने वाले दिनों में इंजीनियर बनना एक सपना ही रह जाएगा। 

कॉग्निजेंट के हिमांशु शर्मा ने बताया कि उनको अचानक अपनी कंपनी छोड़नी पड़ी। कंपनी को उनकी जरूरत नहीं है। उनके एचआर ने उनसे आईकार्ड लिया और बाहर निकाल दिया। ये अनुभव केवल हिमांशु का नहीं है, बल्कि इन दिनों लगातार बड़ी कंपनी, जैसे विप्रो, इंफोसिस, टेक एम और आईबीएम से भी ऐसी लेऑफ की खबरें आ रही हैं।

किसी को कंपनी में काम करते हुए 5 साल हुए तो कोई नया है। लेकिन हर किसी को बगैर किसी नोटिस पीरियर्ड के लिए अचानक एक रीजन देकर निकाल दिया जा रहा है। पिछले हफ्ते तीन बड़ी कंपनियों ने अपने 1000 एंप्लाइज को बाहर निकाल दिया। वे कहते हैं कि कंपनी हर साल इस तरह से छंटनी करती है, कई बार ये पॉलिसी के अंतर्गत आता  है। 

छह महीने में 56 हजार बाहर

मिंट ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट दी आईटी की दिग्गज कंपनियों ने इस साल यानी छह महीने के अंदर 56 हजार कर्मियों को बाहर निकाल दिया है। टेक एम और विप्रो ने 1 हजार और 600 कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया है।  मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि आने वाले तीन साल आईटी में 2 लाख की छंटनी होगी, लेकिन स्थिति उसके बाद सुधरेगी। 

5 लाख को ही नौकरी

अनुमान लगाया जाता है कि भारत में हर साल 1.5 मिलियन इंजीनियर ग्रेजुएट होते हैं, जिसमें से 5 लाख को ही नौकरी मिलती है बाकी बेरोजगार रहते हैं। ऐसे में नई तकनीक को अपनाने के साथ कंपनियों को आगे सोचना होगा। 

जीएसटी से इन्श्योरेंस कराना भी हो सकता है महंगा

मुंबई। जीएसटी लागू होने के बाद मिडल क्लास पर पहली मार इन्श्योरेंस के प्रीमयम की पड़ सकती है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में इन्श्योरेंस पर टैक्स दर बढ़ने से प्रीमियम बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे परिवार जिनके पास कार है और वे हेल्थ और टर्म इन्श्योरेंस लिए हुए हैं उन पर सालाना करीब 1000 रुपये का बोझ बढ़ जाएगा।

बजाज आलियांज़ जनरल इन्श्योरेंस के एमडी तपन सिंघल ने कहा, ‘तत्काल प्रभाव (जीएसटी लागू होने के) के रूप में टैक्स 15 फीसदी से 18 फीसदी हो जाएगा जिसका वहन ग्राहकों को करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर इस टैक्स क्रेडिट का कंपनियों पर पॉजिटिव इम्पैक्ट पड़ेगा तो टैक्स प्रीमियम कम हो जाएगा जबकि टैक्स की दर वही रहेगी।

हालांकि नॉन-लाइफ कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल रहा है। सर्विस टैक्स में इन्श्योरेंस को उन बिजनस की श्रेणी में रखा गया है जिनके लिए टैक्स क्रेडिट अवैलवल नहीं है। ठीक इसी तरह जीएसटी में भी इन्श्योरेंस को टैक्स इनपुट क्रेडिट के लाभ से अलग रखा गया है।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के चीफ फाइनैंशल ऑफिसर गोपाल बालचंद्रन ने कहा, ‘सरकार ने मौजूदा छूट को जीएसटी में भी जारी रखा है। जब छूट दी जाति है तो पूरी क्रेडिट वैल्यू चेन गड़बड़ा जाती है।’ इसके परिणामस्वरूप बढ़े हुए टैक्स का बोझ ग्राहक पर पड़ेगा। जो परिवार 20 रुपये से 25,000 रुपये तक हेल्थ कवर, मेडिक्लेम पॉलिसीज पर खर्च करते हैं उनका प्रीमियम तीन फीसदी तक बढ़ जाएगा। ऑटो इन्श्योरेंस के प्रीमियम में भी इतनी ही बढ़ोतरी होगी।

बैकिंग सेवाओं में भी चार्ज बढ़ेंगे। हालांकि इस सेक्टर में ज्यादातर कमाई ब्याज पर निर्भर है इसीलिए इसका प्रभाव केवल लेन प्रोसेसिंग, कार्ड चार्जेज आदि तक ही सीमित रह जाएगा। लाइफ इन्श्योरेंस अलग चीज है। टर्म इन्श्योरेंस को रिक्स प्रीमियम में कैटिगरी में रखा गया है और इस पर मोटर और हेल्थ इन्श्योरेंस के बराबर टैक्स लगता है। इसके अलावा लाइफ पॉलिसीज हेल्थ कंपोनेंट है और इसलिए इस पर अलग तरीके से लगता है।

वाटर कूलर के उद्घाटन में छलका उद्यमियों का दर्द

कोटा।  हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोशियसन की पहल पर शनिवार को इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र  रोड नंबर सात पर देवेंद्र स्टोन एंड मार्बल की ओर से वाटर कूलर लगाया गया।  जिसका शुभारम्भ विधायक प्रहलाद गुंजल ने किया। यह इस औद्योगिक क्षेत्र का 12वां वाटर कूलर है। इस मौके पर विधायक गुंजल ने कहा कि शहर के औद्योगिक विकास के लिए जल्दी ही ओपन हाउस बुलाया जायेगा।

कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने स्टोन उद्यमियों की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कोटा का औद्योगिक माहौल पूरी तरह ठहर गया है। नए उद्योग तो आना दूर, पुराने भी बंद  होते जा रहे हैं। कोटा स्टोन की वर्तमानं में 500 में से मात्र 50 यूनिट ही चल रही हैं। सरकारी स्तर पर इसे बचाने के पिछले तीन साल में कोई प्रयास नहीं किये ।

दी एसएस आई एसोसिएशन के संस्थापक अध्य्क्ष गोविंदराम मित्तल ने औद्योगिक क्षेत्र में पानी की समस्या उठाई। अध्यक्ष छुट्टन लाल शर्मा ने कहा कि एसोसिएशन के प्रयास से जल्दी ही सघन पौधा रोपण अभियान चलाया जायेगा। देवेंद्र स्टोन के संचालक देवेंद्र जैन ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि इस वाटर कूलर से गर्मीं में लोगों को शीतल जल पीने को मिलेगा।

कार्यक्रम का संचालन जम्बू कुमार जैन ने किया। इस अवसर पर एसोसिएशन के संरक्षक विकास जोशी ने भी सम्बोधित किया। समारोह में प्रमुख रूप से देवेंद्र स्टोन परिवार से पूरणमल हरसोरा, बाबूलाल हरसोरा भी मौजूद थे।  इनके अलावा कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष अचल पोद्दार, जिला  अध्यक्ष विपिन सूद, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र जैन, निर्यातक बीएल गुप्ता समेत कई उद्यमी मौजूद थे। 

कोचिंग के दम पर जेईई मेन्स एग्जाम क्वालिफाई करने में राजस्थान तीसरे नंबर पर

कोटा। मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए होने वाली पढ़ाई का हब बन चुके कोटा के दम पर राजस्थान आगे बढ़ रहा है। जेईई मेन्स एग्जाम क्वालिफाई करने वाले छात्रों में राजस्थान देश का तीसरे प्रदेश बनकर उभरा है। इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े केन्द्र माने जाने वाले दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व तमिलनाडु को राजस्थान ने पीछे छोड़ दिया है।

सीबीएसई ने 27 अप्रेल को आयोजित जेईई मेन परीक्षा में सफल हुए छात्रों के राज्यवार आंकड़े जारी किए हैं। जिनके मुताबिक जेईई मेन्स में सफलता का परचम लहराने वालों में उत्तरप्रदेश के विद्यार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है। यूपी के 26,002 विद्यार्थी इस बार जेईई मेन्स क्वालिफाई करने में सफल रहे।

 दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र (22,897 विद्यार्थी) और तीसरे स्थान पर राजस्थान (20, 438 सफल विद्यार्थी) रहा। हालांकि इस सफलता में लड़के-लड़कियों का अनुपात बेहद खराब रहा। सीबीएसई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान के 17,688 लड़के और 2750 लड़कियों ने जेईई मेन्स क्वालिफाई किया है।

हर पांचवा विद्यार्थी कोटा कोचिंग से

जेईई मेन्स में कोटा कोचिंग का जलवा साफ झलक रहा है। सीबीएसई की ओर से सफल घोषित किए गए 2.20 लाख विद्यार्थियों में से 39 हजार से ज्यादा छात्र कोटा कोचिंग्स के छात्र हैं। यानि हर पांचवा विद्यार्थी कोटा कोचिंग से जुड़ा है।