Tuesday, May 5, 2026
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नवीनतम तकनीक और नवाचार अपनाकर किसान बढाएं अपनी आय

ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट के तहत आयोजित जाजम चौपाल में कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा

कोटा।  कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा है कि केन्द्र व राज्य सरकार की मंशा है कि खेत में बुवाई से लेकर कटाई तक किसान की फसल हर तरह से सुरक्षित रहे। इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं संचालित कर किसान की खुशहाली सुनिश्चित की है।

श्री सैनी ने यह बात कोटा के आरसीसी मैदान पर ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट के तहत कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित जाजम चौपाल में उपस्थित काश्तकारों से कही। उन्होंने कहा कि ग्राम में बताई जा रही कृषि की नवीनतम तकनीक और नवाचार को खेती में अपनाकर किसान अपनी आय को बढा सकते हैं। साथ ही साथी काश्तकारों को भी नवाचारों और तकनीकों की जानकारी दें, जिससे वे भी इसका लाभ उठा सकें। 

ग्लोबल एग्रीटेक मीट के आयोजन के दौरान किसानों और जनप्रतिनिधियों का मनोरंजन करती लोक कलाकार

उन्होंने कहा कि काश्तकार जैविक खेती को अपनाएं। साथ ही बदल-बदल कर फसल की बुवाई करनी चाहिए। खाद व दवाईयों का उपयोग कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही करें। ज्यादा मात्रा में खाद् के प्रयोग से भूमि का उपजाउ क्षमता पर विपरीत प्रभाव पडता है। 
 
उन्होंने कहा कि काश्तकार ग्राम में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होकर यहा प्रदर्शित खेती के नवीनतम तकनीक की जानकारी लें  और इसे अपनाएं। साथ ही इसमें किसी तरह की समस्या आए तो इसके लिए स्थानीय कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से समाधान करें।

जाजम चौपाल में खान राज्यमंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टी.टी. ने कहा कि खेती स्वाभिमान का कार्य है। आप अपनी जमीन और फसल के मालिक है। उन्होंने किसानों को फसल की पैदावार बढाने के कई उपाय बताये। उन्होेंने कहा कि किसान सॉयल हेल्थ कार्ड अवश्य बनायें।  सांसद ओम बिरला ने कहा कि हाडौती संभाग में लहसुन की खेती को बढ़ावा देने के लिए इसके लहसुन की हाईब्रिड बीज तैयार करने पर कार्य किया जा रहा है।  जाजम चौपाल में धन्नालाल एण्ड पार्टी के कलाकारों ने राजस्थानी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियांं दी।

 

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सेंसेक्स, 448 अंक उछल कर 30750 पर हुआ बंद

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे संकेतों के चलते गुरुवार के कारोबारी दिन शेयर बाजार रिकॉर्ड तेजी के साथ बंद हुए है। सेंसेक्स ने जहां 448 अंक चढ़कर 30750 का स्तर छुआ वहीं निफ्टी भी 9505 पर जाकर बंद हुआ। मजबूत वैश्विक संकेतअंतरारष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मजबूती के संकेतों के बीच तमाम एशियाई बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।

फेड रिजर्व के बाद तेजी के साथ बंद हुए अमेरिकी बाजार

बुधवार को फेडरल रिजर्व की मीटिंग के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। फेड रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स के बाद एसएंडपी500 ने रिकॉर्ड हाई का स्तर छुआ। प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.36 फीसद की बढ़त के साथ 21012 के स्तर पर, एसएंडपी500 चौथाई फीसद की बढ़त के साथ 2404 के स्तर पर और नैस्डैक 0.40 फीसद की तेजी के साथ 6163 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। इसी तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

रुपया हुआ मजबूत
गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपये की शुरुआत मजबूती के साथ हुई है। एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 19 पैसा मजबूत होकर 64.54 के स्तर पर खुला है। आपको बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे की मजबूती के साथ 64.73 के स्तर पर बंद हुआ था।

 

गर लिख दिया उसने, तो उसे मिटाने वाला कौन…….

शायर तरुमीत सिंह बेदी से LEN-DEN NEWS की विशेष बातचीत 

“गर लिख दिया उसने, तो उसे मिटाने  वाला कौन
तारीख गवाह है इस दुनिया में आज तक सिकंदर कौन “

आइये हम आपको मिलाते हैं ऐसे ही शख्स से, जो अभी  तक शायरी पर तीन किताबें लिख चुके हैं, यह शख्स कोटा ही नहीं बल्कि देश भर में शायर के रूप में अपनी पहचान बना चुके तरुमीत सिंह बेदी हैं । हालांकि वह पहचान के मोहताज नहीं हैं, वह खुद शायरी की दुनिया के ऐसे हस्ताक्षर हैं, जिनकी शायरी सुनने वाले के दिल को छू जाती है। शायरी की  पहली किताब उन्होंने वर्ष 2011 में “यादें “लिखी, यह किताब उन्होंने अपने पिता श्री जगदीश सिंह बेदी को समर्पित की।
उनकी दूसरी किताब “तस्सवुर” वर्ष 2013 में आई। यह किताब टाइम्स प्रकाशन ने छापी थी, जो अमेजॉन, फिल्पकार्ट, बुकअड्डा एवं क्रॉस वर्ल्ड आदि पर ऑनलाइन सेल हो रही है। उनकी तीसरी किताब पगडण्डी भी बाजार में आ चुकी है। इसे भी शायरी के शौकीनों ने हाथों हाथ लिया। तो आइये सुनते हैं उन्हीं की कहानी,उन्हीं की जुबानी जो  LEN-DEN NEWS के साथ  शेयर की

बेदी जी आप बिज़नेस मेन से शायर कैसे बने
 वर्ष 2009 में जब मेरा एक्सीडेंट हुआ, वह एक्सीडेंट इतना खतरनाक था, मगर उस समय मित्रो, शुभचिंतको की दुआ से आज आप सबके बीच हूँ। वह समय मेरी लाइफ का एक टर्निंग प्वाइंट था। वहीँ से पिता को याद करते हुए यादें लिखने का ख्याल आया। किताब लिखने के बाद प्रकाशक नहीं मिले तो खुद ही अपने दम पर किताब प्रकाशित कर दी। इसके बाद आज तक मुड़कर नहीं देखा। शायरी लिखने का सिलसिला जारी है

“अपने आप को बच्चे की तरह जिन्दा रखता हूँ
बढ़ा हो गया तो जिंदादिली निकल जाएगी “
इस शेर के साथ वह कुछ पल के लिए यादों में खो जाते हैं , फिर बोलते हैं …… “तस्सवुर” लिखने से पहले मुझे अमिताभ बच्चन की फिल्म का सीन याद आया। यह फिल्म मैंने अपने पिता के साथ देखी थी, जिसमें अमिताभ एक शेर कहते हैं कि –आँखें मूंद के बैठे हो “तस्सवुर” में किसी की , ऐसे में कोई छम से आ जाये तो क्या हो।

यह मेरा बहुत ही पसंदीदा शेर है। जब मैंने यह किताब लिखी तो मौका आया,  किताब का नाम बताने का… तभी दिल से आवाज आई “तस्सवुर” रख दे। यह किताब टाइम्स ग्रुप ने प्रकाशित की, जो बाद में ऑल इण्डिया रिलीज हुई। यह किताब रॉयल्टी में चल रही है। जो शायरी में बहुत कम देखा जाता है।

लोगों के पास शायरी समझने का वक्त नहीं, फिर भी आपकी तीन किताबे बाजार में छा गई
बेदी ने शायराना अंदाज में फिर अपनी बात यूँ बयां की–“जहां जज्बे, मोहब्बत, वफ़ाएं आबाद हों , वहां गुलिस्तां अपने आप खिलते हैं।” 
इस शेर के बाद बेदी इतने भावुक हो गए और बोले वैसे तो मैं इस काबिल नहीं कि मेरी किताब लोगों के दिल की आवाज का तराना बनकर इस जहाँ में गूंजे, लोगो की मोहब्बत है जिसने  मुझे इस मुकाम तक पहुंचा दिया। 

उन्होंने बताया कि इसके बाद मेरे जीवन में एक अद्भुत घटना घटी। वर्ष 2015 में सेंट पॉल स्कूल के प्रिंसीपल फादर क्लेरेंस एंथनी जो सात साल फादर भी और आठ साल पूर्व प्रिंसीपल रहे उनसे मुलाकात हो गई। स्कूल के गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन में उन्होंने इच्छा जाहिर की कि एक किताब उनके साथ संयुक्त रूप से लिखी जाये , जिसमें पवित्र बाइबिल के सन्देश की  हिंदी में व्याख्या कर कविता में लिखने का सुझाव दिया।

यह मेरे लिए बहुत काठी रास्ता था , क्योंकि पवित्र संदेशों को शायरी में ढालना आसान काम नहीं था। हालांकि किताब लिखी गई जो “पगडंडिया”के नाम से बाजार में आई। इस किताब को लिखने के बाद मैंने खुद अपना प्रकाशन हाउस शुरू कर दिया। यह जानकर मुझे ख़ुशी है कि इसकी ४००० प्रतिया तुरंत बिक गई। पगडंडियां मेरे फादर एवं प्रिंसीपल की निशानी है।

बेदी ने अपने संदेश में कहा है कि
“किसी भी कार्य को वजह से नहीं जज्बे और वफ़ा से करें
तो मंजिल मिलनी मुश्किल नहीं। “

बेदी का परिचय

  • अध्यक्ष कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन
  • चेयरमैन ऑर्गेनाइजेशन कमेटी फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स
  • महासचिव उम्मीद क्लब कोटा
  • अध्यक्ष कोटा सिख प्रतिनिधि सोसायटी
  • अध्यक्ष सेंट पॉल ओल्ड बॉयज एसोसिएशन
  • सक्रिय सदस्य हार्टवाइज

कोटा विश्व का 7वां सबसे अधिक घनी आबादी वाला शहर, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने जारी की लिस्ट

*दिनेश माहेश्वरी

कोटा । कोचिंग संस्थानों को लेकर अकसर चर्चा में रहने वाला शहर कोटा एक बार फिर सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम लिस्ट में कोटा को  7वां सबसे अधिक घनी आबादी वाला शहर बताया गया है। कोटा में प्रति वर्ग किमी 12100 लोग रहते हैं। हालांकि इस मामले में कोटा से आगे भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई है।

महाराष्‍ट्र की राजधानी मुंबई को दूसरा सबसे अधिक घनी आबादी वाला शहर बताया गया है, यहां 31,700 प्रति वर्ग किमी की आबादी पाई जाती है।  पहले स्थान पर ढाका वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की लिस्ट में बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका को पहले स्थान पर रखा गया है।

यह विश्व में सबसे अधिक घनी आबादी वाला शहर है। यहां पर प्रति वर्ग किमी 44,500 की आबादी है। फोरम ने अपने लिस्ट में कुल 10 टॉप शहरों को शामिल किया है जहां सबसे ज्यादा आबादी पाई जाती है। 

मेडेलिन तीसरे स्थान पर
कोलंबिया की राजधानी मेडेलिन को लिस्ट में तीसरा स्थान दिया गया है। यहां 19,700 प्रति वर्ग किमी की आबादी पाई जाती है। जबकि फिलीपिंस की  राजधानी मनीला 14,800 प्रति वर्ग किमी की आबादी के साथ चौथे स्थान पर है।

मोरक्‍को के कासाब्लांका (14,200 प्रति वर्ग किमी) पांचवें स्थान पर है। नाइजीरिया  के लागोस की आबादी 13,300 प्रति वर्ग किमी है और इसे लिस्ट में छठे स्थान पर रखा गया है।  

7वें स्‍थान पर भारत का शहर कोटा है,  जबकि सिंगापुर (10,200 प्रति वर्ग किमी) 8वें और इंडोनेशिया का जकार्ता (9,600 प्रति वर्ग किमी) 9वें स्थान पर है। दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले शहरों में एशिया के छह.शहर, तीन अफ्रीका के जबकि एक साउथ अमेरिका का है।

ये है शहर में आबादी बढ़ने की वजह

वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम ने कहा कि कई कारण से बहुत से लोग शहरी इलाकों में बसने का निर्णय लेते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में सामान्य तथ्य यह है कि लोग शहर में काम करने की वजह… से रहते हैं।

सीबीएसई : जारी रहेगी नंबर बढ़ाकर देने की पॉलिसी, 12वीं का रिजल्ट लेट

नई दिल्ली। सीबीएसई के 12वीं क्लास के छात्रों को रिजल्ट के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रों को नंबर बढ़ाकर देने की सीबीएसई की पॉलिसी को जारी रखने का निर्देश दिया है। इस कारण छात्रों के अंकों में एडजस्ट करने में थोड़ा समय लगेगा, जिससे रिजल्ट में देरी होगी।

सीबीएसई ने छात्रों को नंबर बढ़ाकर देने की अपनी पॉलिसी को इस साल से खत्म करने का फैसला लिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने सीबीएसई के फैसले को खारिज कर दिया है। ग्रेस मार्क्स यानी नंबर बढ़ाकर देने की पॉलिसी खत्म करने के सीबीएसई के फैसले को एक पैरंट और एक वकील ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

उनका तर्क था कि इसका छात्रों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि इस पॉलिसी को खत्म करने से खासतौर पर वे छात्र बुरी तरह प्रभावित होंगे, जो विदेश से पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने के बाद सोमवार को पॉलिसी जारी रखने का निर्देश दिया और इस पॉलिसी को खत्म करने के कदम को ‘अनुचित एवं गैरजिम्मेदाराना’ बताया।

सीबीएसई के 12वीं क्लास के रिजल्ट को 24 मई, 2017 यानी बुधवार को आने की उम्मीद थी। अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद छात्रों के मार्क्स को अजस्ट करने में समय लगेगा, जिस कारण रिजल्ट लेट हो जाएगा। सीबीएसई ने 12वीं क्लास के रिजल्ट जारी करने की तारीख और समय को लेकर अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की है।

विनिर्माण बढ़ाने के लिए खरीद नीति को मंजूरी

नई दिल्ली। सरकार ने दो खरीद नीतियों को आज मंजूरी दे दी। उसने मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक खरीद नीति और सामरिक साझेदारी मॉडल पर आधारित रक्षा खरीद नीति पर मुहर लगा दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं को बताया कि आयुध के हर क्षेत्र के लिए एक स्थानीय साझेदार का चयन करना होगा।

उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत भविष्य में रक्षा संबंधी ऑर्डर चुनिंदा कंपनियों को देने के लिए विनिर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। 
 रक्षा में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस नीति का लंबे समय से इंतजार था। इसके तहत भारतीय कंपनियां विदेशी साझेदारों से करार करेंगी और आधुनिक रक्षा उपकरण बना सकेंगी।

सामरिक साझेदारी मॉडल के तहत सरकार भारतीय कंपनियों को शॉर्टलिस्ट करेगी और फिर ये कंपनियां विदेशी फर्म के साथ उद्यम लगाकर लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पनडुब्बियां बनाएंगी। इस पर एक साल से भी अधिक समय से काम चल रहा था। इस कारण अरबों डॉलर के रक्षा सौदे अटके हुए थे।

अब आधार नामांकन के लिए आयु प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं

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दिल्ली। आधार नामांकन के लिए आयु प्रमाण पत्र मुहैया कराना अनिवार्य नहीं है, लेकिन विशिष्ट पहचान संख्या में पंजीकृत जन्मतिथि को ठीक कराने के लिए वैध दस्तावेज का होना अनिवार्य है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने अनुसार, ‘आधार हासिल करने के लिए उम्र प्रमाण के दस्तावेज प्रदान करना अनिवार्य नहीं है।देश में बहुत से लोग अपनी वास्तविक जन्मतिथि नहीं जानते हैं, या उनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है। ऐ

से मामलों में, व्यक्ति को अपनी उम्र स्पष्ट करने के लिए अनुरोध किया जाता है।जो जन्मतिथि वह बताएंगे यूआइडीएआइ उसे ही स्वीकार करेगा।’ आधार कार्ड में गड़बड़ी को लेकर हाल ही में छपी एक खबर पर वह प्रतिक्रिया दे रहे थे।खबर थी कि इलाहाबाद के पास स्थित कंजासा गांव के निवासियों को जो आधार कार्ड मिले हैं उनमें हर पांचवें व्यक्ति की जन्मतिथि एक जनवरी अंकित है।

राजस्थान के एक गांव के बारे में भी कुछ इसी तरह की खबर आई थी।अधिकारी ने बताया कि ऐसे मामलों में आवेदक अपनी जन्मतिथि का जो वर्ष बताता है, उस साल की एक जनवरी की तारीख मानी जाती है। अधिकारी ने कहा, ‘आधार कार्ड में कोई गड़बड़ नहीं है।यह UIDAI की स्वीकृति नीति है।

विदेश से एमबीबीएस करने के लिए भी नीट जरूरी

नई दिल्ली। विदेश से एमबीबीएस करने के इच्छुक भारतीय छात्रों को भी जल्द ही मेडिकल के नीट से गुजरना पड़ेगा। इस टेस्ट में निर्धारित न्यूनतम नंबर हासिल करने पर ही किसी को विदेशी संस्थान से मेडिकल की पढ़ाई करने की परमिशन दी जाएगी। इस कवायद का मकसद पैसे और संपर्कों के दम पर विदेशी संस्थानों से मेडिकल की डिग्री हासिल करने वालों पर लगाम लगाना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय फिलहाल इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए जरूरी कार्रवाई कर रहा है। इस योजना पर अगले साल से अमल होने के आसार हैं।  विदेशी मेडिकल संस्थानों में योग्यता का ध्यान नहीं रखा जाता और महज पैसे के दम पर वहां दाखिला मिल जाता है। ऐसे में अयोग्य छात्र भी मेडिकल की डिग्री हासिल कर लेते हैं।

वापस भारत आने पर इन स्टूडेंट्स को प्रैक्टिस करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) का स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना होता है और इसमें ज्यादातर छात्र नाकाम हो जाते हैं। पिछले पांच साल के दौरान एमसीआई का स्क्रीनिंग टेस्ट पास करने वाले छात्रों का प्रतिशत 13 से 27 प्रतिशत के करीब रहा है।

ज्यादातर भारतीय स्टूडेंट्स अभी देश में किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला न मिल पाने पर चीन, रूस, बांग्लादेश, नेपाल और यूक्रेन आदि से एमबीबीएस  कर लेते हैं। सरकार का इरादा है कि जो स्टूडेंट NEET में निर्धारित अंक हासिल करेगा उसे ही विदेश से मेडिकल की पढ़ाई के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।

मसालों में चार फीसदी का सर्किट, धनिया NCDEX पर 5000 से नीचे बंद

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 कोटा। बुधवार को NCDEX की सभी कमोडिटीज़ में भारी गिरावट देखने को मिली। जौं में हल्का हरा निशान जरुर नज़र आया लेकिन बाकी सभी कमोडिटीज़ में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। मसालों में 4 फीसदी तक के सर्किट देखने को मिले। धनिया 4 फीसदी की गिरावट के साथ 5000 रुपए के नीचे बंद हुआ।

5 साल के बाद धनिया की कीमतों में 5000 के नीचे के भाव देखने को मिलें हैं। अप्रैल से लगातार धनिया की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। हल्दी की कीमतों में भी 4 फिसदी की गिरावट देखने को मिली। हल्दी 4 फिसदी लुढ़क कर 5300 के नीचे बंद हुई। जीरा 2.5 फिसदी लुढ़क कर 17600 रुपए के करीब बंद हुआ।

कैस्टरसीड, ग्वार, कपासखली, सरसों रिफाइंड और रिफाइंड तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। दरअसल, जीएसटी से पहले कारोबारी अपने माल को लिक्विडेट करने पर जोर दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि स्टाॅक को डप्स् करने के लिए कारोबारियों ने एग्री कमोडिटीज़ पर दबाव बनाया है। 

वहीं मौसम के सकारात्मक रहने की खबरों ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। प्री-माॅनसून हो रही बारिशों से बाज़ारों में गिरावट का दबाव बढ़ा है।  कारोबारी जीएसटी के नए मसौदे को ठीक से समझ नहीं पा रहे और बाजार में लगातार बनते अफवाहों के चक्रव्यूह में वो किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते जिसके चलते अपने पुराने माल को बाजार में निकाल रहे हैं। 

 

कृषि क्षेत्र में अब एवरग्रीन रिवोल्यूशन, ’फोर आई’ से बदलेगी तस्वीर : नायडू

कोटा । केन्द्रीय शहरी विकास तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री  वेंकैया नायडू ने कहा कि किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुना करने के उद्देश्य से केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर कृषि के क्षेत्र में ’फोर आई’ यानि इरिगेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम इंटे्रस्ट रेट पर कृषि ऋण एवं इंश्योरेंस पर फोकस कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में एवं मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में एवरग्रीन रिवोल्यूशन की शुरूआत हो चुकी है। कोटा में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम-2017) का आयोजन इस दिशा में राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।

 नायडू एवं मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने बुधवार को आरएसी ग्राउण्ड में ग्राम-2017 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री नायडू ने कहा कि देश हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन कृषि के क्षेत्र में अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। पुरानी सरकारों के ध्यान नहीं देने के कारण देश में यह धारणा बन चुकी है कि कृषि लाभ का व्यवसाय नहीं है, हमें इस धारणा को तोड़ना होगा।

उन्होंने राज्य में फसलों में विविधता लाने और कृषि उत्पादों के वैल्यू एडीशन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग आदि के जरिए कृषि को और लाभदायक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि किसानों के लिए नवीनतम तकनीकी ज्ञान, विविधतापूर्ण कृषि, उन्नत एवं सुलभ बाजारों के विकास, खाद्य प्रसंस्करण और आधारभूत संरचनाओं को बढावा देने जैसे उपाय करने होंगे।
 
गांव और नगर दोनों का हो विकास
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री ने कहा देश में सर्वांगीण विकास के लिए ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों का विकास साथ-साथ होना चाहिए। इसीलिए एक ओर जहां स्मार्ट सिटी योजना शुरू की गई है, वहीं आदर्श ग्राम जैसी योजनाओं के जरिए गांवों को उन्नत बनाया जा रहा है। नायडू ने कहा कि कोटा में संभाग स्तरीय ’ग्राम’ के जरिए किसान कृषि क्षेत्र की नवीन तकनीकों, उपकरणों, फसलों, प्रसंस्करण पद्धतियों, सफलता की कहानियों से रूबरू होंगे।

जैविक खेती को अपनाने की पहल करें किसान-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने अपने सम्बोधन में जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जैविक ढंग से उगाए गई फसलें बेहतर दाम पर बिकती है और सेहत के लिए भी अच्छी होती है इसलिए किसान अपने खेतों में एक हिस्सा जैविक खेती के लिए विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिस तरह डूंगरपुर जिले को पूर्ण रूप से जैविक खेती के लिए विकसित किया जा रहा है। उसी तर्ज पर  संभाग के जिले भी जैविक खेती को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जैविक कृषि के लिए 1150 क्लस्टर तैयार किये जा रहे हैं। 

प्रसंस्करण इकाई के लिए किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान
श्रीमती राजे ने कहा कि कोई किसान अपनी जमीन पर कृषि प्रसंस्करण इकाई लगाना चाहता है तो उसे 40 लाख रुपये तक के निवेश पर 20 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन की सेहत सुधारना, उन्हें अच्छी खाद-बीज उपलब्ध कराना ही काफी नहीं है।

किसानों को कृषि प्रसंस्करण और एग्रो इण्डस्ट्री से जोड़ना भी जरूरी है, ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप पैदावार लेकर अपनी आय बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष 15 हजार करोड़ रुपये का फसली ऋण देकर करीब 25 लाख किसानों को लाभान्वित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को 7.1 प्रतिशत की दर से फसली ऋण दिया जा रहा है। 
 
 संभाग के किसान भी जुडें नवाचार से 
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेती के क्षेत्र में नित नवाचार हो रहे हैं। जैतून और खजूर की खेती के बाद अब क्विनोवा की खेती भी शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि कोटा संभाग में डे्रगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों में भी पैदावार की अपार संभावनाएं हैं। कोटा संभाग के किसान प्रगतिशील एवं नवाचार सीखने को तत्पर हैं। ऎसे में वे ग्राम 2017 में जाजम बैठकों एवं सेमीनार में हिस्सा लेकर तथा स्मार्ट फार्म एवं प्रदर्शनी में नई कृषि पद्धतियों की जानकारी लेकर जरूर लाभांवित होंगे।