Thursday, May 7, 2026
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जीमेल पर पाएं अपने फोन के सभी एसएमएस और कॉल

ई दिल्ली माईएसएमएस (mysms) एप फोन पर आने वाले मैसेज को सीधे आपके जीमेल या गूगल चैट पर भेज देता है। इसके जरिए यूजर किसी भी व्यक्ति को डेस्कटॉप के माध्यम से अपने फोन नंबर से मैसेज या कॉल कर सकते हैं। 

गूगल प्लेस्टोर पर यह एप mysms SMS Text Messaging Sync के नाम से मौजूद है। 4.2 रेटिंग वाली इस एप को अब तक करीब दस लाख से भी ज्यादा यूजर डाउनलोड कर चुके हैं। 

इसके प्रीमियम वर्जन में दो फोन को आपस में जोड़ने की सुविधा भी मौजूद है। एक फोन पर आने वाले मैसेज ऑटोमेटिकली दूसरे फोन पर भी दिखेंगे।

एप के बेसिक फीचर इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। हालांकि इसके प्रीमियम वर्जन के लिए सालाना 600 रुपये की कीमत चुकानी पड़ेगी।

सभी राज्य 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने पर सहमत

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को राजधानी के विज्ञान भवन में हुई मीटिंग में ट्रांजिशन और रिटर्न्स समेत कई नियमों मंजूरी दे दी गई। अभी गोल्ड समेत 6 वस्तुओं पर टैक्स की दर तय नहीं हुई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में सभी राज्यों के फाइनैंस मिनिस्टर्स ने 1 जुलाई से जीएसटी को लागू किए जाने पर सहमति जताई।

केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने पत्रकारों से कहा, ‘हमने मीटिंग में नियमों पर चर्चा की और इन्हें मंजूरी दी। ट्रांजिशन नियमों को मंजूरी दे दी गई है और सभी ने 1 जुलाई से जीएसटी लागू किए जाने पर सहमति जाहिर की है।’ पिछले महीने ही जीएसटी काउंसिल ने 1,200 वस्तुओं और 500 सेवाओं पर जीएसटी की दरें तय की थीं। काउंसिल ने 5, 12, 18 और 28 फीसदी के टैक्स स्लैब में दरें तय की हैं।

जीएसटी काउंसिल की इस 15वीं मीटिंग गोल्ड, टेक्सटाइल और फुटवियर समेत 6 वस्तुओं पर टैक्स की दर तय करने के लिए बुलाई गई थी। सभी राज्यों की ओर से जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने पर सहमति जताए जाने का इसाक का बयान इसलिए मायने रखता है क्योंकि पिछले ही दिनों पश्चिम बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने राज्य में मौजूदा जीएसटी को लागू किए जाने से इनकार किया था।

हालांकि शनिवार को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा मीटिंग में मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने शुक्रवार को ही कहा था कि उनकी सरकार मौजूदा प्रावधानों के साथ जीएसटी कानून को लागू नहीं करेगी। उन्होंने कहा था कि हम जीएसटी के नियमों में बदलाव के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखेंगे।

काउंसिल की ओर से मंजूर किए गए ट्रांजिशन नियमों के मुताबिक जीएसटी लागू होने से पहले कंपनियां स्टॉक पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी के 40 पर्सेंट हिस्से को सेंट्रल जीएसटी के तहत क्लेम कर सकेंगे। आपको बता दें कि जीएसटी के चलते ज्यादातर डीलर नया स्टॉक लेने से बच रहे हैं। हाल ही में कारोबारियों ने सरकार से क्रेडिट लिमिट बढ़ाने की मांग की थी।

सीबीएसई 10th का रिजल्ट घोषित, 16 लाख स्टूडेंट्स ने दी थी परीक्षा

नई दिल्ली । सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने शनिवार को 10th क्लास का रिजल्ट डिक्लेयर किया। इस साल कुल 16 लाख 67 हजार 573 स्टूडेंट्स ने यह एग्जाम दिया। 12th के नतीजे बोर्ड 28 मई को ही डिक्लेयर कर चुका है।

यहाँ  देखें रिजल्ट…

  •  रिजल्ट आप CBSE की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.nic.in या उसकी होस्टिंग वेब लिंक cbseresults.nic.in पर देख सकते हैं।
  • इनके अलावा results.gov.in और results.nic.in पर भी रिजल्‍ट चेक किया जा सकता है
  • इसके लिए वेबसाइट क्लिक करें। यहां CBSE Class 10th results सिलेक्ट करें। नई विंडों में तय जगह पर रोल नंबर और सिक्युरिटी कोड डालें और सबमिट करें।
  • इसके बाद आपका रिजल्स सामने होगा। यहीं से आप मार्कशीट प्रिंट ले सकते हैं या डाउनलोड कर सकते हैं।

पिछले साल लड़कियों का रिजल्ट रहा था बेहतर

  • CBSE 10th में पिछले साल लड़कियों ने बेहतर परफॉर्म किया था। 96.36% लड़कियां, जबकि 96.11% लड़के पास हुए थे। पिछले साल कुल पास पर्सेंटेज 96.21 रहा था। 2015 में ये 97.32% था।
  • पिछले साल कुल 14 लाख 91 हजार 293 स्टूडेंट्स इस एग्जाम में शामिल हुए थे। 2015 के मुकाबले 2016 में 8.5% ज्यादा स्टूडेंट्स एग्जाम में बैठे थे।
  • तिरुवनंतपुरम रीजन का रिजल्ट सबसे बेहतर रहा था। वहां 99.87% स्टूडेंट्स ने एग्जाम में कामयाबी हासिल की थी।

 

 

 

जुलाई तक होगा शुरू चम्बल नदी के हैंगिंग ब्रिज से यातायात

कोटा। नेशनल हाईवे ऑर्थोरिटी ऑफ इंडिया द्वारा 213.58 करोड़ की लागत से बनाये गए चंबल नदी पर  हैंगिंग ब्रिज का काम लगभग पूरा हो चुका है।  इन दिनों लोड टेस्टिंग का काम चल रहा है। यह जुलाई तक शुरू होगा ।  हैंगिंग ब्रिज की सेंसर द्वारा 24 घंटे ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। 

ब्रिज में 29 सेंसर लगाए हैं, जिन्हें वाईफाई की मदद से ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा गया है। जिससे पुल के झुकाव, घुमाव, केबल और वायब्रेटिंग की रीडिंग और तकनीकी गड़बड़ी तुरंत पता चल सकेगी। ताकि समय रहते ठीक कराया जा सकेगा। हैंगिंग ब्रिज के सेंसर से यह मॉनिटरिंग कोटा के अलावा हैडक्वार्टर दिल्ली के साथ फ्रांस में भी होगी। 

कोरियन कंपनी कर रही लोड टेस्टिंग 
प्रदेश में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग 76 के कोटा बाइपास पर निर्मित हैंगिंग ब्रिज की  फिलहाल लोड टेस्टिंग सहित कई जांचें चल रही हैं। क्रांकीट से भरे डम्परों को ब्रिज के कई हिस्सों पर एक साथ रख परखा गया है। इस दौरान केबल, ब्रिज के झुकाव, घुमाव की जांच भी की गई है। निर्माण में लगी कंपनी हुंडई ब्रिज की जांच कोरिया की एचक्यू कंपनी के प्रतिनिधियों से करवा रही है। 

इनकी रिपोर्ट के बाद हुंडई ब्रिज निर्माण पूरा होने का प्रमाण पत्र एनएचएआई को देगी। इसके बाद एनएचएआई की कंसल्टेंट कंपनी यूके की लुईस बर्जर ग्रुप इसकी जांच करेगा। उसकी रिपोर्ट पर एनएचएआई इस ब्रिज को हैण्डओवर लेगा। इसमें एक माह का समय लग सकता है। हुंडई ही इस ब्रिज की मेंटीनेंस का कार्य अगले छह साल तक देखेंगी। 

चलते वाहन का वजन
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनुपम गुप्ता ने बताया कि स्ट्रक्चर हेल्प मॉनिटरिंग सिस्टम से सौ साल तक होगी। ब्रिज से आेवरलोड व्हीकल नहीं गुजर सकेगा। वाहनों का चलते समय ही वजन वे इन मोशन सिस्टम से होगा। ब्रिज के दोनों हिस्सों पर बनने वाले टोल प्लाजा पर इन वाहनों को रोका जाएगा। चालक को संतुष्ठ करने के लिए टोल पर धर्मकांटा लगाया जाएगा। 

शहर को ये 4 बड़े फायदे होंगे

  • जयपुर से बारां जाने वाले वाहन अभी बड़गांव से चंबल ब्रिज, अंटाघर चौराहा होते हुए जाते हैं, इसके बनने के बाद वाहन हैंगिंग ब्रिज से होकर बाईपास से बारां जा सकेंगे।
  • चित्तौड़-उदयपुर से बारां व झालावाड़ जाने वाले वाहनों शहर के भीतर आने की बजाय हैंगिंग ब्रिज से होकर निकल जाएंगे।
  • रावतभाटा से झालावाड़ रोड जाने के लिए चंबल ब्रिज तक का 16 किमी लंबा चक्कर नहीं लगाना होगा।
  • जयपुर-जबलपुर हाइवे अभी शहर के बीच से होकर गुजर रहा है। हैंगिंग ब्रिज बनने के बनने के बाद ये ट्रैफिक भी बाईपास से ही गुजर जाएगा।

तेल कंपनियों के अधिग्रहण के बजाय विलय की तैयारी

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नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के एकीकरण में अधिग्रहण के बजाय विलय का रास्ता अख्तियार किया जा सकता है। इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि विलय की स्थिति में खुली पेशकश की जरूरत से बचा जा सकता है। सबसे पहले तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के विलय की योजना है।

विलय से ओएनजीसी पर किसी तरह का दबाव भी नहीं आएगा। अधिग्रहण की सूरत में एचपीसीएल ओएनजीसी की अनुषंगी इकाई बन जाती। हालांकि एक अधिकारी ने कहा कि गेल लिमिटेड भी अधिग्रहण करने या ऑयल इंडिया जैसी किसी दूसरी तेल विपणन कंपनी के साथ विलय को तैयार है लेकिन पहले ओएनजीसी-एचपीसीएल के विलय का निर्णय हुआ है।

इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है लेकिन हाल में ही सरकार ने एकीकरण के विकल्प मुहैया कराने की जिम्मेदारी डेलॉयट को दी है। उसे जुलाई तक इस संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा तय अधिग्रहण संहिता में अगर कोई सूचीबद्ध इकाई किसी अन्य इकाई में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदती है या प्रबंधन अपने नियंत्रण में लेती है तो इसे खुली पेशकश लानी होगी।

जिस कंपनी का अधिग्रहण हो रहा है उस कंपनी में सार्वजनिक शेयरधारिता 25 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। सिंघी एडवाइजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक महेश सिंघी ने कहा, ‘विलय का रास्ता आसान होगा क्योंकि इसमें खुली पेशकश की जरूरत नहीं होगी। दो कंपनी के निदेशक मंडलों को शेयर अदला-बदला की मंजूरी देनी होगी और शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी।

इसके अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की अनुमति की भी दरकार होगी।’ मौजूदा बाजार मूल्य पर और सरकारी शेयरधारिता का मूल्य बरकरार रहने की स्थिति में विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली इकाई में सरकारी हिस्सेदारी 65 प्रतिशत हो जाएगी। सरकार बाद में उसी स्थिति में इस सौदे को भुना पाएगी जब यह नई इकाई में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला करेगी। 

 

 

इनपुट टैक्स की बढ़ेगी रिफंड सीमा, वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक आज

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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में शनिवार को सरकार कारोबारियों द्वारा मौजूदा भंडार यानी स्टॉक पर चुकाए गए इनपुट कर के लिए रिफंड सीमा पूर्व निर्धारित 40 फीसदी से बढ़ा सकती है। इसके लिए बिल यानी इन्वॉयस की जरूरत भी नहीं रह जाएगी। कंपनियां स सीमा को बढ़वाने के लिए मुहिम चला रही हैं अैर उनका कहना है कि आंशिक क्रेडिट रिफंड से आपूर्ति शृंखला प्रभावित होगी। 

कंपनियों का कहना है कि ज्यादातर वितरक यही चाहते हैं कि उनका मौजूदा स्टॉक जीएसटी लागू होने से पहले खत्म हो जाए। उद्योग जगत ने तो रिफंड सीमा बढ़ाकर 60 से 100 फीसदी के बीच रखने की मांग की है। एक सरकारी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘हम उद्योग जगत की ङ्क्षचताएं दूर करेंगे।

हमने मौजूदा सीमा 40 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी के आसपास करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही हमें अपना राजस्व संतुलन भी देखना होगा। हम कर राजस्व से अधिक रिफंड नहीं बांट सकते।’ जीएसटी के तहत भंडार स्थानांतरण पर चुकाया गया कर पूरी तरह इनपुट टैक्स के्रडिट के तौर पर उपलब्ध रहता है।

हालांकि मौजूदा प्रणाली में डीलरों को चुकाए गए उत्पाद शुल्क पर किसी तरह का रिफंड नहीं मिलता है। सरकार महंगी सामग्री के लिए भी दिशानिर्देश दे जारी कर सकती है। 100 फीसदी क्रेडिट रिफंड लेने के लिए बिल नहीं रहने की स्थिति में वैकल्पिक दस्तावेज दिखाए जा सकते हैं। आगामी 1 जुलाई से जीएसटी लागू किए जाने की संभावना है।

ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ जीएसटी व्यवस्था में प्रवेश और अन्य बातों के लिए अंतिम नियम-शर्तें तय कर करने में जुटे हैं। पीडब्ल्यूसी इंडिया में लीडर (अप्रत्यक्ष कर) प्रतीक जैन ने कहा, ‘उद्योग जगत ने 40 फीसदी की सीमा को बढ़ाए जाने की मांग की है। जैन ने कहा कि यह सीमा बढ़ाई जाती है तो उद्योग जगत को शुकून मिलेगा ।

विमान के टिकट की जगह चेहरे और फिंगरप्रिंट्स का होगा इस्तेमाल

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नई दिल्ली। सोचिए, यात्रा कितनी सुविधाजनक हो जाएगी जब आपको एयरपोर्ट में घुसने या फ्लाइट पर बैठने के लिए सिर्फ फिंगरप्रिंट्स स्कैन करवाने पड़ें या फिर चेहरा स्कैन करवाना पड़े। इस काम की शुरुआत हो गई है और अमेरिका में दो कंपनियों ने टिकट और बोर्डिंग पास की जगह इस सिस्टम को अपनाने के लिए टेस्टिंग शुरू कर दी है।

डेल्टा एयरलाइन ने ऐलान किया है कि उसने बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन पायलट प्रोग्राम शुरू किया जिसके तहत यात्री प्लेन के टिकट के बजाय अपने फिंगरप्रिंट्स इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे कुछ घंटे पहले जेटब्लू ने ऐलान किया था कि बॉस्टन में ऐसे प्रोग्राम की टेस्टिंग की जा रही है जो यात्रियों के चेहरों का मिलान यूएस कस्टम ऐंड बॉर्डर प्रॉटेक्शन के पासपोर्ट डेटाबेस से करेगा।

डेल्टा ने ‘क्लियर’ के साथ मिलकर वॉशिंगटन के रीगन नैशनल एयरपोर्ट पर इस प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए यात्री का डेल्टा के ‘फ्रिक्वेंट फ्लायर स्काईमाइल्स’ प्रोग्राम का मेंबर होना जरूरी है। साथ ही उसके पास क्लियर की भी सब्स्क्रिप्शन होनी चाहिए।

डेल्टा के प्रोग्राम के पहले चरण में इलीट-टियर के पैसंजर्स को लाउंज में जाने के लिए बोर्डिंग पास की जगह अपने फिंगरप्रिंट इस्तेमाल करने होंगे। दूसरे चरण में वे बोर्डिंग पास की जगह अपने फिंगरप्रिंट इस्तेमाल कर सकेंगे।

प्रिवेसी पॉलिसी के मुताबिक यूजर्स की बायोमीट्रिक इन्फर्मेशन का रख-रखाव ‘क्लियर’ को करना होगा। यूजर्स कभी भी अपनी इन्फर्मेशन को कंपनी के सर्वर से हटाने और अपने अकाउंट को बंद करने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।

एयरलाइन ने यह ऐलान भी किया है कि वह चेहरा पहचानने वाली तकनीक का इस्तेमाल बैग ड्रॉप करने में करेगी। आने वाले वक्त में वह मिनीऐपलस सेंट पॉल इनंटरनैशन एयरपोर्ट पर पायलट प्रोग्राम को टेस्ट करेगी।

जेटब्लू एयरलाइन के प्रोग्राम की बात करें तो यह यूएस कस्टम्स ऐंड बॉर्ड प्रॉटेक्शन (CBP) और टेक कंपनी SITA के साथ मिलकर काम करता है। बॉस्टन के लोगन इंटरनैशनल एयरपोर्ट और क्वीन बीट्रिक्स इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर कंपनी के ग्राहकों के पास दो ऑप्शन होंगे।

या तो वे पहले वाली नॉर्मल बोर्डिंग लाइन में जा सकते हैं या फिर उन्हें दूसरी लाइन में जाना होगा जहां पर फोटो लेने के लिए कैमरा लगा है। SITA का सिस्टम यात्री के फोटो को CBP के पास भेजेगा और उसे डेटाबेस से मैच किया जाएगा। जेटब्लू का कहना है कि मैचिंग की यह प्रक्रिया तुरंत हो जाती है।

जेटब्लू का कहना है कि न तो हमारे पास CBP के डेटाबेस का ऐक्सेस है और न ही SITA के पास। कंपनी का कहना है कि SITA और जेटब्लू यूजर्स की बायोमीट्रिक इन्फर्मेशन को स्टोर नहीं करेंगे। अगर अभी चेहरा स्कैन करने पर किसी यात्री की वेरिफिकेशन नहीं हो पाती है तो उसे ट्रेडिशनल लाइन में लगाया जाएगा और पुराने ढंग से ही उसकी वेरिफिकेसन होगी। 

 

दो लाख से ज्यादा के नकद लेन-देन पर होगी कड़ी कार्रवाई

2.50 लाख रुपए नकद प्राप्त करने पर  2.50 लाख की ही पेनल्टी लगेगी 

नई दिल्ली। भारी मात्रा में नकद लेन देन करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है। आयकर विभाग ने ऐसे लोगों को चेतावनी दी है जो दो लाख रुपए से ज्यादा का लेन देन नकद के रूप में कर रहे हैं। आयकर विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसे लेन देन में जो व्यक्ति नकदी पाने वाला होगा उस पर भारी पेनल्टी लगेगी।

यह पेनल्टी नकदी के रूप में प्राप्त की जाने वाली राशि के बराबर होगी। गौरतलब है कि कालेधन पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सरकार ने नकदी के लेन देन की सीमा 1 अप्रैल से 2 लाख रुपए तक तय कर दी है। वित्त विधेयक 2017 में इसका प्रावधान किया गया है। आयकर विभाग ने लोगों को ऐसे लेन देन की जानकारी टैक्स विभाग से साझा करने की भी सलाह दी है।

कोई भी व्यक्ति अगर टैक्स विभाग को दो लाख से ज्यादा की नकदी के लेन देन के बारे में सूचना देना चाहता है तो वह [email protected] पर ई-मेल करके इसकी जानकारी दे सकता है।आयकर अधिनियम में जोड़ी गई नई धारा 269एसटी दो लाख से ज्यादा के लेन देन पर पाबंदी लगाती है।

कोई भी व्यक्ति अगर किसी एक लेन देन में 2 लाख से ज्यादा की नकदी का इस्तेमाल करता है तो वह आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा। साथ ही कोई भी एक दिन में या किसी एक मद में भी दो लाख से ज्यादा का लेन देन करने पर भी दोषी माना जाएगा।

आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर प्राप्त किये जाने वाली रकम के 100 फीसद के बराबर पेनल्टी का प्रावधान है। आसान शब्दों में समझें तो यदि कोई व्यक्ति 2.50 लाख रुपए नकद के रूप में प्राप्त करता है तो उस पर 2.50 लाख रुपए की ही पेनल्टी लगाई जाएगी।

देश की जीडीपी बढ़कर 7.2 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान : यूबीएस

नई दिल्ली। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में सुधरकर 7.2 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी, जबकि 2018-19 में यह 7.7 प्रतिशत पर पहुंचेगी। 2016-17 में जीडीपी की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही है।

वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी यूबीएस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा सुधारों को आगे बढ़ाने और निजी निवेश की स्थिति बेहतर होने से जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होगा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2016-17 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 6.1 प्रतिशत पर आ गई। 2016-17 में यह 7.1 प्रतिशत रही। यूबीएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि धीरे-धीरे सुधार से उत्पादकता की स्थिति बेहतर होगी और इससे आगे सतत वृद्धि का रास्ता खुलेगा।

रिपोर्ट में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की सराहना की गई है। फिलहाल सरकार जीएसटी, मुद्रास्फीति लक्ष्य, नई दिवालापन संहिता, वित्तीय समावेशन, एफडीआई नियमों में ढील, कालेधन पर अंकुश और डिजिटाइजेशन को प्रोत्साहन जैसे सुधारों को आगे बढ़ा रही है।

यूबीएस सिक्यॉरिटीज इंडिया की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि 2017-18 में जीडीपी की वृद्धि दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी और 2018-19 यह 7.7 प्रतिशत रहेगी।’

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना फ्लॉप, सिर्फ 5,000 करोड़ डिक्लेयर

नई दिल्ली। ब्लैक मनी का खुलासा करने के लिए डीमॉनेटाइजेशन के दौरान घोषित की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) ज्यादा सफल नहीं हुई है। इस स्कीम के तहत लगभग 5,000 करोड़ रुपये ही घोषित किए गए हैं।

रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने इस स्कीम में लोगों के ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेने के दो कारण बताए। उनका कहना था कि स्कीम की घोषणा से पहले लोगों ने अपनी नकदी को अलग-अलग खातों में जमा करने की कोशिश की थी। एक अन्य कारण इसमें इंटरेस्ट न मिलना था।

दिसंबर 2016 में शुरू की गई इस स्कीम में डीमॉनेटाइजेशन के बाद अपनी अघोषित नकदी बैंकों में जमा करने वाले लोगों को सरकारी कार्रवाई से बचने का अंतिम मौका दिया गया था। स्कीम के तहत लोगों को घोषित की गई रकम का 50 पर्सेंट टैक्स और पेनाल्टी के तौर पर चुकाना था और 25 पर्सेंट चार वर्षों के लिए एक बिना इंटरेस्ट वाले डिपॉजिट में रखना था।

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा कि PMGKY को मिली प्रतिक्रिया को अलग से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे पहले ब्लैक मनी घोषित करने के लिए इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (IDS) पेश की गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हुई थी।
जेटली के मुताबिक, ‘पहले IDS पेश की गई।

इसके बाद लोगों ने यह सोचकर बैंकों में कैश जमा किया कि उस पर टैक्स देना होगा और फिर PMGKY घोषित की गई थी। जब आप घोषित की गई कुल रकम को देखते हैं तो आपको इन तीनों को एक साथ देखना होगा।’ IDS के तहत कुल डिक्लेयरेशन 65,000 करोड़ रुपये से अधिक का था।
हालांकि, ब्लैक मनी का डिक्लेयरेशन सरकार की उम्मीद से कम रहा है, लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 2016-17 में लगभग 91 लाख नए टैक्सपेयर्स जोड़ने में सफल रहा। डीमॉनेटाइजेशन के बाद वापस आई कुल करेंसी के बारे में पूछने पर, जेटली ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अभी इसका कैलकुलेशन कर रहा है।

उन्होंने बताया, ‘बैंकों को दी गई कुल करेंसी के बारे में RBI ने डीमॉनेटाइजेशन प्रोसेस के दौरान समय-समय पर एक आंकड़ा दिया था, लेकिन अब यह काम पूरा हो चुका है और RBI एक महत्वपूर्ण संस्थान होने के नाते अनुमान नहीं दे सकता। अब प्रत्येक करेंसी नोट की गिनती करनी होगी। अगर कोई जाली नोट आता है तो उसे हटाना होगा और वास्तविक आंकड़ा पेश करना होगा।