स्कूलों में अटपटे नामों से अब नहीं उड़ेगा मजाक, शिक्षा विभाग की अनूठी पहल

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जयपुर। स्कूलों में कई जगहों खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में बच्चें के घरेलू, अटपटे और अर्थहीन नाम सामने आते हैं। बचपन में स्कूलों में लिखवाए गए नाम बड़े होने बच्चों में हीन भावना महसूस करते हैं। इसका समाधान राजस्थान शिक्षा विभाग ने निकालने का फैसला ले लिया है। विभाग ने इसे लेकर प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू करने के आदेश जारी किए हैं।

संयुक्त शासन सचिव ने माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों को निर्देशित किया है कि व्यक्ति का नाम केवल उसकी पहचान नहीं, बल्कि उसके संस्कारों और सामाजिक छवि का प्रतीक होता है। विभाग का मानना है कि नकारात्मक या त्रुटिपूर्ण नाम होने से बच्चों के मानसिक विकास और आत्मसम्मान पर बुरा असर पड़ता है। एक सार्थक और सकारात्मक नाम बच्चे में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता है, जो उसके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

2950 नामों की विशेष ‘कैटलॉग’ तैयार
विभाग ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है राजस्थान शिक्षा विभाग ने 2950 सुंदर और सार्थक नामों की एक सूची तैयार की है। इस लिस्ट में 1541 छात्राओं और 1409 छात्रों के नाम शामिल हैं। बड़ी बात यह है कि जो लिस्ट तैयार की गई है उसमें नाम की अर्थ सहित व्याख्या की गई है। केवल नाम ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को उनके अर्थ भी समझाए जाएंगे ताकि वे समझ सकें कि एक अच्छे नाम का क्या महत्व है।

कैसे काम करेगा यह अभियान

  1. इस मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है:
  2. अभिभावकों की काउंसलिंग: स्कूलों में होने वाली PTM (अभिभावक-शिक्षक बैठक) और SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) की बैठकों में माता-पिता को जागरूक किया जाएगा।
  3. एडमिशन के समय विकल्प: पहली कक्षा में प्रवेश के समय ही अभिभावकों को यह लिस्ट दिखाई जाएगी ताकि वे शुरू से ही बच्चे का एक अच्छा नाम चुन सकें।