होलिका दहन पर प्रतीकात्मक पुतला दहन का निर्णय, नीतिगत पुनर्विचार की मांग
कोटा। समता आंदोलन समिति के नेतृत्व में सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को यूजीसी के नए नियमों के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एडीएम सिटी अनिल सिंघल को सौंपा। ज्ञापन में नियमों को “काला कानून” बताते हुए इन्हें निरस्त करने की मांग की गई।
इससे पूर्व भगवान बजरंगबली के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर हनुमान चालीसा से प्रारंभ कर कलेक्ट्रेट परिसर में समिति के लोगो ने धरना दिया। इस अवसर पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होलिका दहन के अवसर पर नए कोटा एवं पुराने कोटा क्षेत्र में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन किया जाएगा। मंच संचालन समता आंदोलन जिला महामंत्री रासबिहारी पारीक ने किया।
ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी के नए नियमों में “एनी कास्ट/कास्ट न्यूट्रल” शब्दावली शामिल करने, प्रत्येक शिकायत के साथ शपथ-पत्र (हलफनामा) अनिवार्य करने, बालिकाओं को छोड़कर अन्य मामलों में शिकायतकर्ता की पहचान उजागर करने, जाति आधारित नियमों, कानूनों एवं लाभकारी योजनाओं को निलंबित करने तथा भारत के प्रत्येक नागरिक के साथ जातीय आधार पर भेदभाव न किए जाने की मांग उठाई गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए समता आंदोलन के संभागीय अध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि विभिन्न सामाजिक मंचों से आरक्षण नीति, एट्रोसिटी एक्ट तथा यूजीसी के नए नियमों जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के दूरगामी प्रभावों को समाज के समक्ष तथ्यात्मक रूप से रखा जाना आवश्यक है, ताकि आमजन इनके प्रभावों से अवगत हो सकें।
अन्य वक्ताओं ने एक स्वर में कहा, “लोकतंत्र में असहमति दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि किसी नीति या कानून से समाज के किसी वर्ग में असंतोष है, तो उसे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी वर्ग विशेष के प्रति विरोध नहीं, बल्कि नीतिगत पुनर्विचार की मांग है।”
वक्ताओं ने यह भी कहा कि संबंधित प्रावधान सामान्य वर्ग के मौलिक अधिकारों—अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21—पर प्रभाव डाल सकते हैं और समाज में जातिगत विभाजन की आशंका उत्पन्न कर सकते हैं। इन नियमों से सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और व्यापक पुनर्विचार की आवश्यकता है।
इन प्रतिनिधियों ने किए हस्ताक्षर
ज्ञापन पर समता आंदोलन समिति से डॉ. अनिल शर्मा एवं गोपाल शर्मा, ब्राह्मण समाज से राजेंद्र गौत्तम एवं रामस्वरूप शर्मा, कायस्थ समाज से निमिष सक्सेना, जैन समाज से प्रकाश बज, वैश्य समाज से हुकुम मंगल तथा राजपूत समाज से निर्भय सिंह ने हस्ताक्षर कर प्रशासन को सौंपा।

