शिक्षा को स्किल के साथ जोड़ना जरूरी: भटनागर

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कोटा। देश में आजादी के बाद डेढ़ दर्जन शिक्षा आयोग और शिक्षा नीति बन चुकी है, लेकिन क्रियान्विती का सदैव अभाव रहा है। हर आयोग ने देश में शिक्षा की बेहतरी के लिए उपयुक्त सुझाव दिए, लेकिन कोई सरकार इसे लागू करने की दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं दिखा सकी। सरकारों को दृढतापूर्वक शिक्षा का आधुनिकीकरण,भारतीयकरण करना होगा।

बिना दृढता के शिक्षा नीति को यूरोप से मुक्त करना आसान नहीं होगा। विद्या भारती के राष्ट्रीय महासचिव अवनीश भटनागर ने शनिवार को स्वामी विवेकानन्द स्कूल में मीडिया से रूबरू होते हुए यह बात कही। शिक्षा की वर्तमान व्यवस्था सैद्धान्तिक है। इस शिक्षा को व्यवहार में लाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। शिक्षा को स्किल के साथ जोड़ने से ही शिक्षा का सही लाभ मिलेगा। वर्तमान में पढाई के दौरान परिपथ के बारे में पढाई तो करता है, लेकिन घर का फ्यूज जोड़ने के लिए मैकेनिक को ढूढता है।

भटनागर ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की शिक्षा उसकी मातृभाषा में ही होनी चाहिए। जब ब्रिटेन आयरिश और स्काॅटिश भाषा अंग्रेजी को चुनौती दे रही है, तो हम ही इसके पीछे क्यों भाग रहे हैं? मेडिकल शिक्षा का सबसे बड़ा देश चीन सारी शिक्षा चाइना में देता है। आस्ट्रेलिया में स्पेनिश और जापान में जापानी भाषा में पढाई कराई जा रही है। हमें अंग्रेजी सीखनी चाहिए, अंग्रेजीयत नहीं। इस दौरान प्रान्त महामंत्री वीरेन्द्र कुमार शर्मा, प्राचार्य महेश शर्मा भी मौजूद रहे।

लेह से कन्याकुमारी तक शिक्षा का केन्द्र विद्या भारती
उन्होंने कहा कि देश में वैकल्पिक शिक्षा के लिए विद्या भारती सबसे बड़ा केन्द्र बनकर उभरे हैं। आज देश में विद्या भारती के 24600 विद्यालय देश के कोने कोने में संस्कारित, नैतिक, चारित्रिक, गुणात्मक शिक्षा देने के लिए कार्य कर रहे। जिनमें डेढ लाख शिक्षक शिक्षा दे रहे हैं और 37 लाख शिक्षार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

इसके 20 लाख पूर्व छात्रों और अभिभावकों समेत तीन करोड लोगों का परिवार है। विद्या भारती ने शिक्षा देने कर नया माॅडल विकसित किया है। जो 67 वर्ष से देश के कोने कोने में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

नक्सल प्रभावित क्षैत्रों में भी बिना डरे बच्चों को शिक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। ये सारी गतिविधियां सामाजिक सहयोग से बिना सरकारी सहयोग के चलाई जाती हैं। इसके दम पर विद्या भारती से निकले छात्र छात्राएं अच्छे मुकाम हासिल कर रहे हैं। अभी तक 44 छात्र सिविल सेवा में तो 300 छात्र सेफ गेम्स में मेडल ले चुके हैं।