सर्वोच्च न्यायालय की समिति में भारतीय किसान संघ का प्रतिनिधित्व होना चाहिए

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कोटा। कृषि सुधार से संबंधित तीन कानूनों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समिति गठन के निर्णय का भारतीय किसान संघ से स्वागत किया है। साथ ही कहा है देशभर के किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र संगठन भारतीय किसान संघ का समिति में प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

भारतीय किसान संघ के संभाग प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा किया गया निर्णय न्यायसंगत है। इस निर्णय के बाद 50 से अधिक दिनों से न्याय की उम्मीद में बैठे किसानों के न्यायिक तरीके से घर लौटने का रास्ता निकलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निर्विवाद, तटस्थ और सभी पक्षकारों को प्रतिनिधित्व करने वाली समिति का सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में जो संकेत दिया था, उस संतुलन का अभाव इस समिति में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

प्रदेश महामंत्री कैलाश गैंदोलिया ने कहा कि कोर्ट के द्वारा बनाई गई समिति सम्पूर्ण देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। इसमें केवल उत्तर भारत के कुछ क्षैत्र और मध्य भारत का ही प्रतिनिधित्व हो रहा है। समिति में दक्षिण भारत, पूर्व भारत, उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल, आसाम के साथ सम्पूर्ण पूर्वाेत्तर भारत छूट रहा है। उसी प्रकार से आईसीएआर से विशेषज्ञ भी शामिल नहीं किए गए हैं।

प्रान्त महामंत्री जगदीश कलमंडा ने कहा कि तीनों कानून देश के हर नागरिक को प्रभावित करने वाले हैं। इसलिए सम्पूर्ण भारत में कार्य करने वाले भारतीय किसान संघ जैसे पंजीकृत संगठनों के साथ देश के सभी भौगोलिक हिस्सों का प्रतिनिधित्व समिति में दिखना चाहिए। इन कानूनों से प्रभावित होने वाले घटकों उपभोक्ता, व्यापारी संगठनों का भी समिति में होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ भी मामले में पक्षकार था। जिसका कार्य 30 लाख सदस्यता के साथ देश के 30 प्रान्तों के 55 जिलों के 4 हजार तहसीलों और 50 हजार गांवों तक फैला हुआ है।