वीरचक्र विजेता को अपना आशियाना बचाना भी हो रहा मुश्किल

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कोटा। जिसने सरहद पर दुश्मनों को एक इंच जगह पर भी कब्जा नहीं करने दिया। पाकिस्तान को घुटनों पर लाने को मजबूर कर दिया। आज वहीं वीर चक्र विजेता अपने आशियाने को बचाने के लिए अपनों से ही संघर्ष कर रहे हैं। उनकी व उनके परिवार की जान को खतरा बना हुआ है।

ग्रेनेड विला, नेहरू नगर लाल कोठी के पीछे निवासी सेना में वीर चक्र विजेता कर्नल श्याम वीर सिंह राठौर व उनकी पत्नी आनंद कंवर राठौर को उनके परिवार के लोग ही उन्हें उनके मकान से बेदखल करने के लिए जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

कर्नल श्याम वीर सिंह (82) एवं पत्नी आनंद कंवर राठौर ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वर्ष 1971 में पाकिस्तान को युद्ध में पटकनी देने के बाद उन्हें केन्द्र सरकार ने वीर चक्र से नवाजा था। उन्होंने 1963 से लेकर 1991 तक देश की सेवा की और अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया।

उन्होंने एसपी को दिए परिवाद में बताया कि उनका ग्रेनेड विला नेहरू नगर में मकान है जिस पर उनके ससुराल पक्ष के लोग उन्हें बेदखल करना चाहते हैं। जबकि उनके पास उस मकान के स्वामित्व के सभी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर वह लडाई करते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं। इस सम्बंध में थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। साथ ही एसपी को पूरी घटना की जानकारी दी है।

आमजन की सुनवाई कैसे होगी
कर्नल श्यामवीर ने कहा कि हमने देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, पत्नी के परिवार से एक भाई भी शहीद हो गया, जिसकी प्रतिमा मल्टीपरपज स्कूल में लगी हुई है, लेकिन अपने हक के लिए ही हमे प्रताडित किया जा रहा है। हमारी पुलिस प्रशासन से मांग है कि उपद्रव करने वाले लोगों को पाबंद किया जाए। देश के सिपाही के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है तो आमजन की सुनवाई कैसे होती होगी।

श्यामवीर सिंह की पत्नी आनंद कंवर ने बताया कि हमने ये प्लाट अपने पिता ठाकुर बने सिंह से ही खरीदा था। वह इस प्लाट को अपनी बेटी यानी मुझे बिना पैसे ही देना चाहते थे, लेकिन पति फौजी थे, इसलिए वह अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि प्लाट जब लेंगे जब इसकी कीमत अदा कर देंगे।

उस समय हमने पिता को पांच हजार रुपये दिए और प्लाट लिया। कर्नल उस समय नौकरी पर थे। उस समय मकान बनाने की बात हुई तो यू.आई.टी. से नक्शा पास करवाया गया। उसके बाद मकान बनवाने का कार्य शुरू हुआ। कर्नल श्यामवीर सेवारत होने व डयूटी पर बाहर होने के कारण ससुर ठाकुर बनेसिंह को पैसा भेजते रहे और ससुर की देख रेख में मकान का निर्माण पूरा हुआ।

मकान बनाने का पूरा खर्च स्वयं उठाया
मकान बनाने का पूरा खर्च कर्नल श्यामवीर सिंह ने ही किया। क्योंकि 89 में कर्नल श्याम सिंह की पोस्टिंग कोटा में एन.सी.सी. ग्रुप कमाण्डर के रूप में हुई थी। तभी से वे यहां पर निवास कर रहे हैं। अब भतीजे, उनकी पत्नी व बच्चें बडे हुए तो उनके मन में लालच आ गया और वह इस मकान पर कब्जा करना चाहते हैं। हमारी पुलिस व जिला प्रशासन से मांग है कि फौजी परिवार को स्वाभिमान से जीने का अधिकार दिलाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।