दूध बेचकर बच्चे को पढ़ाया, अब वह बनेगा परिवार का पहला डॉक्टर

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कोटा। प्रतिभा पानी की तरह होती है जो अपना रास्ता तलाश ही लेती है। परिस्थितियां प्रतिकूल हों तो भी रास्ता बन जाता है। विपरीत परिस्थितियों में कुछ ऐसे ही अपनी प्रतिभा के दम पर मुकाम हासिल किया है एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के छात्र विक्रम गुर्जर ने। पारिवारिक परिस्थितियां प्रतिकूल होने के बाद भी विक्रम ने पढ़ाई के प्रति अपनी एकाग्रता जारी रखी और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में 625 अंक प्राप्त किए।

ओवरआल रैंक 3359 तथा ओबीसी रैंक 1008 रही। अब जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना चाहता है। इसके बाद न्यूरोलॉजी में कॅरियर बनाने की इच्छा है।
विक्रम ने बताया कि परिवार बारां जिले के तिसाया गांव में रहता है। बीपीएल श्रेणी में परिवार है तथा मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी पिता चौथमल गुर्जर नरेगा में मजदूरी करते हैं। इसके अलावा अन्य दिनों में दूध बेचने का काम करते हैं।

मां विद्या बाई का निधन तीन साल पहले सड़क दुर्घटना में हो गया था। वो सीताबाड़ी मेले में गईं थीं और वापस लौटते समय बाइक और ट्रक का एक्सीडेंट हो गया, इस एक्सीडेंट में दो की मौत हुई, जिसमें मां और एक गांव के ही दूसरे भइया थे। मां के निधन से परिवार को बड़ा आघात लगा और पूरा परिवार अस्त-व्यस्त हो गया।

मां के बाद अब 85 वर्षीय दादी घर का काम करती हैं। हम लोग भी उनका थोड़ा बहुत साथ देते हैं। छोटा भाई इस बार दसवीं की परीक्षा देगा। परिवार में संपत्ति के नाम पर दूसरे गांव में कुछ जमीन है, जिससे खाने का खर्च चल जाता है। घर में दो भैंसे हैं, जिनका दूध बेचकर ही गुजारा चलता है।

शिक्षकों ने प्रेरित किया
विक्रम ने बताया कि दसवीं तक गांव के ही सरकारी स्कूल में राजकीय माध्यमिक विद्यालय तिसाया में पढ़ा। यहां 93.50 प्रतिशत अंक हासिल किए। शिक्षकों ने प्रेरित किया तो साइंस बॉयलोजी ली और अधिक मेहनत कर डॉक्टर बनने की ठानी। बारां आकर पढ़ा और 94.80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

शिक्षकों की सलाह पर कोटा में एलन में पढ़ाई करने की सलाह दी। एलन आकर मिला तो मुझे मेरी प्रतिभा के आधार पर रियायत दी गई। मुझे लगभग निशुल्क प्रवेश दिया गया। यहां आकर बहुत कुछ बदलाव महसूस किया। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में पढ़ाई के दौरान टीचर्स और स्टाफ का जो सपोर्ट मिला वो जीवनभर याद रहेगा। यहां पढ़ाई करने में इतना मजा आता था कि समय कब बीत जाता पता ही नहीं चलता।