Tuesday, May 5, 2026
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पी-नोट से निवेश के नियमों को और सख्त बनाने का किया प्रस्ताव

  • प्रत्येक ओडीआई सबस्क्राइबर से 1,000 डॉलर ‘नियामकीय शुल्क’ वसूलने का प्रस्ताव
  •  पी-नोट के जरिये निवेश को हतोत्साहित कर एफपीआई पंजीकरण को बढ़ावा देना है मकसद
  • सट्टेबाजी के मकसद से डेरिवेटिव में निवेश पर होगी रोक
  • इस कदम से बाजार पर मामूली असर पडऩे की आशंका

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पार्टसिपेटरी नोट (पी-नोट) संचालन के नियमन को और सख्त बनाने का आज प्रस्ताव किया। पी-नोट के जरिये विदेशी निवेशकों को भारत में बिना पंजीकरण के ही घरेलू बाजार में निवेश करने की अनुमति होती है।

बाजार नियामक ने अपने परिचर्चा पत्र में वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) खंड में सटोरिया उद्देश्य के लिए पी-नोट या विदेशी डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट (ओडीआई) के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव किया है। सेबी ने कहा है कि पी-नोट धारकों को डेरिवेटिव बाजार में केवल हेजिंग मकसद से ही निवेश की अनुमति होगी और सट्टेबाजी के उद्देश्य से निवेश नहीं किया जा सकेगा।

सेबी ने प्रत्येक ओडीआई निवेशक से 1,000 डॉलर (करीब 65,000 रुपये) ‘नियामकीय शुल्क’ वसूलने का प्रस्ताव भी किया है। यह शुल्क विदेेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) द्वारा जारी पी-नोट पर वसूला जाएगा। सेबी ने परिचर्चा पत्र में कहा है, ‘इस शुल्क को लगाने का मकसद ओडीआई निवेशक को को ओडीआई के जरिये निवेश करने से हतोत्साहित कर उन्हें सीधे एफपीआई के तौर पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।’

पीडब्ल्यूसी में वित्तीय सेवा कर लीडर भवीन शाह ने कहा, ‘यह पी-नोटस के जरिये विदेशी फंडों द्वारा सट्टेबाजी के मकसद से ट्रेडिंग के चलन को कम करना है क्योंकि ऐसे निवेश साधनों में पारदर्शिता अपेक्षाकृत कम होती है। इस कदम से ओडीआई निवेश पर कुछ असर पड़ सकता है। लेकिन कुल डेरिवेटिव निवेश में पी-नोट की हिस्सेदारी कम रहने से बाजार पर इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है।’

पिछले महीने के अंत में डेरिवेटिव में पी-नोट का कुल निवेश 40,165 करोड़ रुपये (सांकेतिक मूल्य) था, जो पी-नोट के कुल निवेश का करीब एक-चौथाई था। उद्योग के अनुमान के मुताबिक भारतीय डेरिवेटिव में विदेशी निवेशकों के कुल निवेश का 15 फीसदी पी-नोट के जरिये किया जाता है। यह आंकड़ा कुल एफपीआई निवेश में पी-नोट की हिस्सेदारी से कहीं ज्यादा है। एफपीआई का पी-नोट से निवेश करीब 6 फीसदी है।

सेबी ने कहा कि अगर प्रस्तावित नियमों को लागू किया जाता है तो पी-नोट धारकों को अपनी मौजूदा पोजिशन के निपटान के लिए 31 दिसंबर 2020 तक का समय दिया जाएगा। काले धन के देश में आने की आशंका के मद्देनजर सेबी पिछले कुछ वर्षों से पी-नोट नियमों को सख्त बनाने में जुटा है।

वर्ष 2016 में सेबी ने अपने ग्राहक को जानें जरूरतों को लागू किया था, वहीं पी-नोट के हस्तांतरण पर रोक लगाने तथा पी-नोट जारीकार्ताओं और धारकों के रिपोर्टिंग नियमों को भी सख्त बनाया गया था। लगातार की जा रही सख्ती से विदेशी निवेशकों के बीच पी-नोट का आकर्षण घट रहा है और निवेश साधन के तौर पर 2007 में यह अपने उच्च स्तर 50 फीसदी पर था जो अब घटकर 6 फीसदी पर आ गया है। नियामक ने अपने नए प्रस्तावों पर 12 जून तक प्रतिक्रिया मांगी है।

एसबीआई ग्राहकों पर अब फिर सर्विस चार्ज की मार

नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एक बार फिर अपनी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क में बदलाव करने जा रहा है। सर्विस चार्ज में ये बदलाव एक जून से लागू हो जाएंगे। बचत खाते में जमा रकम की न्यूनतम सीमा लागू होने से एसबीआई ग्राहकों की जेब नए नियमों से और कटने वाली है।

सबसे अहम बदलाव खाते से कैश निकालने के नियम में किया जा रहा है। एक जून से एक माह में केवल चार बार ही रकम निकासी मुफ्त होगी। इसमें एटीएम के जरिये पैसे निकालना भी शामिल है। अगर कोई व्यक्ति पांचवीं बार रकम निकासी अपनी बैंक शाखा से करता है तो उसे 50 रुपये और सर्विस टैक्स अतिरिक्त चुकाना होगा। वहीं, अगर यह निकासी एसबीआई के एटीएम से होती है तो 10 रुपये और दूसरे बैंक के एटीएम से होती है तो 20 रुपये शुल्क देना होगा। सर्विस टैक्स अलग से लगेगा। 

कटे-फटे नोट बदलना भारी
अगर कोई व्यक्ति 20 कटे-फटे नोट जिनकी कुल कीमत 5000 रुपये तक होगी, बदलता है तो उस पर कोई शुल्क नहीं है। लेकिन बदले जाने वाले नोटों की संख्या अगर 20 से ज्यादा है तो हर नोट पर दो रुपये एवं सर्विस टैक्स देना होगा। इसी तरह अगर नोटों की कीमत 5000 रुपये से ज्यादा है तो दो रुपये प्रति नोट और पांच रुपये प्रति हजार (सर्विस टैक्स सहित), जो भी शुल्क ज्यादा आएगा वह चुकाना पड़ेगा। 

पीएम मोदी ने बना लिया दुनिया को अपना दफ्तर

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगन के सामने दुनिया मानो सिकुड़ सी गई है। उन्हें अपनी आक्रामक विदेश नीति के मद्देनजर दुनियाभर का दौरा करने की जरूरत है, इसलिए मोदी को अच्छी तरह पता है कि कैसे पूरी दुनिया को ही अपने दफ्तर में तब्दील कर दिया जाए। यही वजह है कि अपने कार्यकाल का तीन साल पूरा करने के बाद भी उनकी ट्रैवल स्टाइल में कोई फर्क नहीं आया है। इसी क्रम में वह अगले महीने यूरोप और इस्राइल का दौरा करने वाले हैं।

45 देशों का दौरा, अभियान जारी है
मई 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से मोदी आधिकारिक विदेश यात्रा के रूप में कथित रूप से 3.4 लाख किलोमीटर का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने बतौर पीएम 45 देशों में 119 दिन बिताए हैं। यह अवधि उनके अब तक के कार्यकाल का करीब 10 प्रतिशत है।

विदेश यात्रा में मनमोहन के मुकाबले मोदी की उपलब्धियां ज्यादा
मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले दो वर्षों में कुल 95 दिन विदेश में बिताए जबकि यूपीए की पहली और दूसरी सरकार में बतौर पीएम पहले दो-दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह ने 72 दिन विदेश में बिताए थे। लेकिन, मोदी ने जहां 20 यात्राओं में 40 देशों के दौरे किए, वहीं मनमोहन सिंह ने यूपीए-1 के पहले दो सालों में 15 विदेशी यात्रा कर 18 देशों के दौरे किए थे। उन्होंने यूपीए-2 के पहले दो सालों में 17 विदेशी यात्राओं में 24 देशों के दौरे किए थे।

मोदी का पसंदीदा ठिकाना
मोदी कौन-कौन से देश बार-बार जाते हैं, इससे आपको उनकी विदेशी नीति की दिशा का अंदाजा लग सकता है। उन्होंने नौ देशों की बार-बार यात्रा की है। वह चार बार अमेरिका गए हैं जबकि चीन, फ्रांस, अफगानिस्तान, जापान, नेपाल, रूस, सिंगापुर, श्री लंका और उज्बेकिस्तान का दो-दो बार दौरा कर चुके हैं।

पल-पल के उपयोग की अनोखी कला
विदेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी एक-एक सेकंड का हिसाब-किताब रखते हैं। उन्होंने विदेशी यात्रा के दौरान वक्त बचाने का शानदार तरीका इजाद कर लिया है। वह होटल के बजाय प्लेन में सोते हैं। उड़ान के वक्त प्लेन में सोने से सुबह उनकी नींद उसी देश में खुलती है जहां उनका अगला कार्यक्रम होता है। अगर वह रात में होटल में रुक रहे होते तो वह सुबह जगने के बाद ही नई जगह पर पहुंच पाते।

पिछले साल 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच बेल्जियम, अमेरिका और सऊदी अरब की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने तीन रातें एयर इंडिया वन में ही बिताईं जब वह दिल्ली से ब्रसल्स, ब्रसल्स से वॉशिंगटन डीसी और वॉशिंगटन डीसी से रियाद का सफर कर रहे थे। पूरे दौरे में उन्होंने महज दो रातें होटलों में बिताईं- एक रात वॉशिंगटन में और दूसरी रियाद में। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, ‘किसी पीएम के अमेरिका समेत कई देशों का दौरा महज 97 घंटों में पूरा करने का यह पहला उदाहरण है। पीएम अगर प्लेन में नहीं सोते तो हम कम-से-कम छह दिनों में तो नहीं ही लौट पाते।’

प्लेन में भी गहरी नींद सोते हैं पीएम
क्या अलग-अलग देशों के दौरे से मोदी को नींद नहीं आने की समस्या नहीं झेलनी पड़ती है? भला नींद से सराबोर कोई पीएम दूसरे देश के प्रमुख के साथ महत्वपूर्ण मीटिंग में क्या हासिल कर सकते हैं? एक अधिकारी ने एक बार कहा था, ‘उन्हें अनिद्रा की समस्या खाक होगी, जब उन्हें गहरी नींद आ जाती है।’ दरअसल, पीएम मोदी कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति हैं। इसलिए वह यात्रा के दौरान ऐसी समस्याओं का सामना करना अच्छी तरह जानते हैं।

प्लेन ही बन जाता है पीएमओ
पीएम मोदी प्लेन में भी सिर्फ सोते ही नहीं रहते हैं। एक अधिकारी ने ईटी को बताया, ‘जब सफर का कोई हिस्सा पूरा हो जाता है तो वह (पीएम मोदी) प्लेन में इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांग लेते हैं। अधिकारियों को इतनी छूट नहीं मिलती है कि वो भारत लौटकर ही रिपोर्ट दें।’ इतना ही नहीं, ‘जब किसी देश में महत्वपूर्ण मीटिंग होनी होती है तो पीएम होटल में प्रवेश करने के 30 मिनट के अंदर ही ब्रीफिंग का बुलावा भेज देते हैं।’

अब दौरे में कमी
मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले साल में ही ज्यादा-से-ज्यादा दौरे किए क्योंकि तब बतौर पीएम उन्हें बहुत ग्राउंड वर्क करना था। धीरे-धीरे उनकी विदेश यात्राओं में कमी आ गई। साल-दर-साल विदेश में उनके ठहरने का वक्त भी कम हुआ है। पहले साल (मई 2014 से मई 2015) पीएम ने 55 दिन दूसरे देशों में बिताए। दूसरे साल में यह आंकड़ा घटकर 40 और तीसरे साल 24 हो गया।

मोदी के हवाई सफर पर 275 करोड़ खर्च
पीएमओ की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी के हवाई सफर पर 275 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें पांच यात्राओं पर खर्च के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 9 से 17 अप्रैल 2015 के दौरान फ्रांस, जर्मनी और कनाडा की यात्रा पर सबसे ज्यादा 31.2 करोड़ रुपये खर्च हुए।

इस लिहाज से दूसरे नंबर पर 11 से 20 नवंबर 2014 के दौरान म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और फीजी की यात्रा है जिसकी लागत 22.58 करोड़ रुपये आई। पीएम मोदी की तीसरी महंगी विदेश यात्रा 13 से 17 जुलाई 2014 के दौरान ब्राजील की थी जिस पर 20.35 करोड़ रुपये का खर्च आया।

 

 

भारत-जर्मनी के बीच हो सकती है एक नए संबंध की शुरुआत

बर्लिन। जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से आज बर्लिन के पास उनके आधिकारिक अतिथि गृह में निजी रात्रिभोज पर अनौपचारिक बातचीत के लिए मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों के बीच ‘बहुत अच्छी बातचीत’हुई। जर्मनी के ब्रैंडनबर्ग जिले में स्थित 18वीं सदी के महल ‘शलॉस मीजेबर्ग’ के बाग में खिली धूप में दोनों नेता साथ में टहले।

बैठक ‘शलॉस मीजेबर्ग’ की आगंतुक पुस्तिका में मोदी के हस्ताक्षर करने के साथ शुरु हुई। मर्केल जिस तरह एशियाई देशों के तवज्जो दे रही हैं और डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन को निशाना बना रही हैं, उससे लगता है कि वे भारत के साथ जर्मनी के संबंध को एक नए मुकाम पर ले जाएंगी। वह इस हफ्ते भारतीय और चीनी लीडरों से मुलाकात कर रही हैं।

रविवार को म्यूनिख में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि वे एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर देंगी। उन्होंने चुनावी रैली में स्पष्ट तौर पर अमेरिका को निशाने पर लिया। मर्केल पैरिस जलवायु समझौते पर डॉनल्ड ट्रंप के रुख को लेकर काफी बरसीं।

उन्होंने कहा, ‘कुछ हद तक वह युग खत्म हो गया है, जब हम एक-दूसरे पर पूरी तरह भरोसा कर सकते थे। पिछले कुछ दिनों से मैंने यही महसूस किया है।’बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, ‘चांसलर मर्केल के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।’ बैठक को एक बेहद अनौपचारिक मामला बताया गया।

मोदी के दो दिन के जर्मनी के दौरे के औपचारिक कार्यक्रम कल से शुरु होंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में आलीशान महल के बाग में दोनों नेताओं के आपस में बातचीत के दौरान ली गई तस्वीरें डालते हुए कहा, ‘एक सार्थक भागीदारी का बंधन। चांसलर मर्केल ने निजी रात्रिभोज से पहले शलॉस मीजेबर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी की।’

 

जीएसटी क्रियान्वयन के पहले नौ माह में उपकर से मिलेंगे 55,000 करोड़

नयी दिल्ली। केंद्र को उम्मीद है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी )के क्रियान्वयन के बाद उसे पहले नौ माह में उपकर से 55,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इनमें एक बड़ा हिस्सा अहितकर ओर लग्जरी उत्पादों  पर उपकर से प्राप्त होगा। 

कोयले, लग्जरी उत्पादों तथा अहितकर वस्तुओं पर उपकर से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल नई कर प्रणाली लागू होने के बाद राज्यांे को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा।

राजस्व विभाग के अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष की जुलाई से मार्च अवधि के दौरान कोयला, लिग्नाइट और दलदली कोयले पर उपकर से 22,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है। एक सूत्र ने कहा कि तंबाकू पर उपकर से 16,000 करोड़ रुपये की प्राप्ति की उम्मीद है।

सूत्र ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर मुआवजा कोष में शेष राशि पान मसाला, एरेटेड ड्रिंक ओर मोटर वाहनों पर उपकर से आएगी।राजस्व विभाग को उम्मीद है कि विभिन्न प्रकार के उपकर से राज्यों  को जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकेगी।

राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने हाल में पीटीआई भाषा से साक्षात्कार में कहा था कि हमारा मोटा मोटा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के लिए मुआवजे को जितनी भी राशि की जरूरत होगी वह उपकर आय से पूरी हो जाएगी।  इसी वजह से छोटी कारों पर भी उपकर लगाया गया है।

विभाग की आंतरिक गणना के अनुसार मार्च, 2018 तक इस मुआवजा या क्षतिपूर्ति कोष में अधिशेष होगा, क्यांेकि कुछ बड़े राज्यांे को राजस्व का नुकसान नहीं होगा और सिर्फ छोटे राज्यांे के नुकसान की भरपाई करनी होगी।

वित्त वर्ष 2016-17 की जीडीपी वृद्धि दर संशोधित कर 7.6 किये जाने की संभावना

 नयी दिल्ली। देश की आर्थिक वृद्धि दर 2015-16 और 2016-17 के लिए नयी आईआईपी और जीडीपी श्रृंखला के कारण संशोधित कर क्रमश: 8.3 फीसद और 7.6 फीसद किये जाने की संभावना है।

एसबीआई की शोध रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार जीडीपी आंकड़े 31 मई को जारी किये जाने है और उम्मीद है कि यह बेहतर होंगे। नयी आईआईपी और डब्ल्यूपीआई श्रृंखला का 2013-14 से सभी जीडीपी आंकड़े पर असर होगा।

इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हम आशा करते हैं कि नयी आईआईपी और जीडीपी श्रृंखला के कारण 2013-14 की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसद से संशोधित कर 7.3 फीसद जबकि 2015-16 की जीडीपी वृद्धि दर 7.9 फीसद से संशोधित कर 8.3 फीसद की जाएगी।

वित्त वर्ष 2016-17 की जीडीपी वृद्धि दर 7.1 फीसदी से संशोधित कर 7.6 फीसद किये जाने की संभावना है।’’ रिपोर्ट के अनुसार 19 मई, 2017 तक नये नोट डालने का काम 80 फीसदी पूरा हो चुका है।

इसमें कहा गया है, ‘‘हमारा यह भी अनुमान है कि आठ नवंबर, 2016 और 12 मई, 2017 के बीच जो अतिरिक्त सात लाख करोड़ रपये व्यवस्था में आए उनका 65 फीसदी हिस्सा अब भी इधर-उधर घूम रहा है।

’’ एसबीआई के आर्थिक शोध विभाग के मुख वित्तीय सलाहाकार सौम्या कांति घोष की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रचुर तरलता और निम्न मुद्रास्फीति के साथ अच्छा जीडीपी आंकडा आने वाला है लेकिन इससे आरबीआई मौद्रिक प्रबंधन का काम मुश्किल हो जाएगा।

ब्याज दर में कटौती की संभावना नहीं -इक्रा

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक अगले सप्ताह होने वाली अपनी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों  में संभवत: कटौती नहीं करेगा। हालांकि, पूर्व की तुलना में केंद्रीय बैंक का रख कम आक्रामक हो सकता है। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह बात कही है।

इक्रा के प्रबंध निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेश टक्कर ने कहा, ‘‘अप्रैल में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुद्रास्फीति को लेकर जो कुछ जोखिम बताए थे, अब वे मानसून के परिदृश्य में सुधार, वस्तु एवं सेवा कर के कर ढांचे को तय किए जाने और जिंस कीमतांे में कमी से अब इनमें से कई चीजें नहीं रह गईं हैं।’’

उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के आंकड़े से नीचे आ गई है। लगातार छठे महीने यह इस स्तर पर रही है। सरकार ने रिजर्व बैंक के लिए मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति का यही लक्ष्य तय किया है। टक्कर ने कहा कि मुद्रास्फीति जोखिम में कमी के मद्देनजर एजेंसी को उम्मीद है कि मौद्रिक नीति संबंधी वक्तव्य और एमपीसी उसका ब्योरा अप्रैल की तुलना में कुछ नरम रह सकता है।

इक्रा ने कहा कि मुद्रास्फीति जोखिम में कुछ कमी से एमपीसी वित्त वर्ष 2017-18 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के लक्ष्य को कुछ संशोधित कर सकती है।रेटिंग एजेंसी ने कहा कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष के लिए अपने 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान में भी बदलाव कर सकता है।

जीएसटी : चम्मच हुआ थाली से दूर, एक ही तरह के आइटमों पर अलग-अलग रेट

नई दिल्ली। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की दरों को खंगालने में जुटी ट्रेड-इंडस्ट्री को अब इसकी बारीकियां खटकने लगी हैं। एक ही मटीरियल से बनी और एक जैसे इस्तेमाल वाली चीजों पर अलग-अलग टैक्स दरों को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। स्टील से बनी थाली पर जहां 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, वहीं चम्मच, कांटा और दूसरे कटलरी आइटमों पर रेट 18 प्रतिशत होगा। इसी तरह बिल्डिंग मिटीरियल, स्टेशनरी और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली कई चीजों पर भी रेट में अंतर का विरोध हो रहा है।

स्टेनलेस स्टील से बने कई आइटमों को अलग एचएसएन कोड और स्लैब दिए जाने से नाराज दिल्ली बर्तन निर्माता संघ के प्रेजिडेंट सतीश कहते हैं, ‘स्टील के बरतन और कटलरी आइटमों पर एक्साइज, कस्टम ड्यूटी और वैट दरों में भी कोई अंतर नहीं है। दोनों ही तरह के सामान साथ बिकते हैं और कई बार पैकेज के रूप में भी वितरित होते हैं। ऐसे में इन पर 12 और 18 प्रतिशत रेट से पूरी इंडस्ट्री चेन प्रभावित होगी। हमने वित्त मंत्री को भी इस बारे में लिखा है।’

चावड़ी बाजार में बिल्डिंग मटीरियल कारोबारी बताते हैं, ‘लोहे की खिड़की, दरवाजे, चौखट, शटर पर मामूली बदलावों के चलते 12 और 18 के दो रेट सामने आ रहे हैं, जबकि फ्लोरिंग, किचन फिटिंग और बाथ फिटिंग से जुड़े उपकरणों पर यह रेंज 12 से 28 फीसदी तक जाती है। रेट में अंतर से व्यापार घाटे के अलावा कंप्लायंस कॉस्ट भी एक बड़ी चिंता होगी।’

वह बताते हैं कि सेरामिक टेबलवेयर, किचनवेयर, टॉइलट आर्टिकल्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि कुछ सेरामिक फ्लोरिंग ब्लॉक और टाइल्स पर 28 प्रतिशत रेट होगा। इसी मार्केट में स्टेशनरी के होलसेल ट्रेड में भी रेट अंतर पर सवाल उठ रहे हैं। स्लेट पेंसिल, चॉक स्टिक कर मुक्त हैं, लेकिन आम पेंसिल, क्रेऑन, पेस्टल पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। कागज की किस्म और इस्तेमाल के आधार पर टैक्स रेट में भी काफी अंतर है।

डेयरी प्रॉडक्ट्स के बाजार में भी अलग-अलग रेट की चिंता ट्रेडर्स को खाए जा रही है। फ्रेश मिल्क को टैक्स फ्री रखा गया है, लेकिन घी और मक्खन पर 12 प्रतिशत जीएसटी होगा। बेबी फीड मिल्ड या शुगर ऐडेड मिल्क पर 5 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है। ब्रेल क्लॉक, टेबल क्लॉक, कलाई घड़ी और स्टॉप वॉच में रेट का अंतर 12 से 28 प्रतिशत तक का है। इसी महीने जीएसटी काउंसिल ने 211 वस्तुओं और 36 सेवाओं को चार टैक्स स्लैब में डाला था।

ऑडी पर बंपर डिस्‍काउंट, कारों के दामों में 10 लाख तक की कटौती

नई दिल्ली। अगर आप एक लग्जरी कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो यह गोल्डन चांस है आपके लिए। जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी ऑडी ने अपनी कारों पर कीमतों में 10 लाख रुपए तक की कटौती कर दी है।यह कटौती कंपनी ने भारतीय कार बाजार के लिए की है जोकि 30 जून तक जारी रहेगी।

ऑडी डीलर के मुताबिक ऑडी की कारों पर 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक दाम घटा दिए हैं और यह दाम ऑडी A3 एंट्री सेडान से लेकर महंगी A8 मॉडल पर लागू होंगे।  ये हमारे पुराने स्टॉक को खत्म करने का तरीका नहीं है, बल्कि हम अपनी नई कारों पर भी कंज्यूमर्स को डिस्काउंट दे रहे हैं।

इस समय ऑडी भारत में A3 सेडान से लेकर A 8 प्रीमियम सेडान कारें बेचती है जिनकी कीमत 30 लाख रुपए 1.15 करोड रुपए के बीच हैBMW ने दिये ये ऑफर्सBMW ने ग्राहकों को कम दरों पर ब्याज की पेशकश की है। कंपनी अपने ग्राहकों को बैंक से कम ब्याज दर पर ऑटो लोन फाइनेंस कर रही है। इसके साथ साथ कार का फ्री इंश्योरेंस और गाड़ी पुरानी हो जाने के बाद वापस खरीदने जैसी पेशकश भी कर रही है।

यह सभी आफर्स कंपनी की ओर से 30 जून तक दिये जा रहे हैं।इसके साथ साथ कंपनी कार की मेंटेनेंस पर भी ग्राहकों को अच्छे ऑफर्स दे रही है। कंपनी की ओर से यह कहा गया कि ने कहा है कि BMW ने भले ही अपनी गाड़ियों की कीमतें कम नहीं की हों लेकिन उनकी ओर से दिये जा रहे ये आकर्षक ऑफर्स कीमतें कम करने से ज्यादा लाभकारी हैं।

बैंकों की किस्त चुकाना भी मुश्किल हुआ अनिल अंबानी की आरकॉम का

नई दिल्ली। रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की हालत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के अनुमान से कहीं ज्यादा खराब है। अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप की यह कंपनी 10 भारतीय बैंकों को लोन की किस्त नहीं चुका पाई है। इनमें से कुछ ने आरकॉम के लोन को अपनी एसेट बुक में ‘स्पेशल मेंशन अकाउंट (एसएमए)’ कैटेगरी में डाल दिया है।

एसएमए एसेट्स वैसे लोन को कहते हैं, जिसमें कर्ज लेने वाले का ब्याज बकाया होता है। अगर तय तारीख के 30 दिनों तक इसका भुगतान नहीं होता तो उसे एसएमए 1 और 60 दिनों के बाद एसएमए 2 कैटेगरी में डाल दिया जाता है। वहीं, अगर 90 दिनों तक ब्याज का भुगतान नहीं होता तो लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) हो जाता है।  यहां के 10 बैंकों ने या तो इस लोन को एसएमए 1 या एसएमए 2 कैटेगरी में डाल दिया है।

केयर और इकरा के रेटिंग घटाए जाने के बाद आरकॉम के शेयर पिछले दो हफ्ते में 20 पर्सेंट गिरे हैं। हालांकि, रेटिंग एजेंसियों के पास एसएमए लोन की जानकारी नहीं है। बैंक आपस में इस इंफॉर्मेशन को शेयर करते हैं और वे आरबीआई को भी इसकी जानकारी देते हैं। केयर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो के चलते आरकॉम का रिस्क प्रोफाइल बढ़ गया है। इसलिए उसकी रेटिंग घटाई गई है।

अगर कंपनी के लोन डिफॉल्ट की जानकारी उन्हें मिलती है तो आरकॉम की रेटिंग में और कुछ नॉच की कमी की जा सकती है।
आरकॉम के लोन डिफॉल्ट के बारे में ईटी की तरफ से पूछे गए सवाल पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘एयरसेल और ब्रुकफील्ड के साथ डील एग्रीमेंट के बाद आरकॉम ने बैंकों से कहा है कि वह 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज 30 सितंबर 2017 तक या उससे पहले चुकाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि आरकॉम अभी इन दोनों सौदों के लिए बैंकों से सहमति ले रही है। उन्होंने कहा कि अपने स्टेकहोल्डर्स के हित में कंपनी जल्द से जल्द दोनों सौदों को पूरा करना चाहती है। प्रवक्ता ने बताया, ‘दोनों डील के लिए कई अप्रूवल पहले ही मिल चुके हैं। दूसरी मंजूरियों को लेकर हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इन प्लान्स को देखते हुए हमें सभी लोन देनदारियों को समय पर पूरा किए जाने का भरोसा है। इससे कंपनी पर कर्ज भी काफी कम होगा।’ आरकॉम को मार्च 2017 क्वॉर्टर में 966 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। यह लगातार दूसरी तिमाही थी, जब कंपनी घाटे में रही थी। वहीं, वित्त वर्ष 2017 भी कंपनी के लिए लॉस का पहला साल रहा।

टेलीकॉम कंपनी पर 31 मार्च तक 42,000 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसमें वह एयरसेल और ब्रुकफील्ड डील्स के जरिये कमी की उम्मीद कर रही है। आरकॉम ब्रुकफील्ड को अपनी टावर यूनिट रिलायंस इंफ्राटेल की 51 पर्सेंट हिस्सेदारी 11,000 करोड़ रुपये में बेच रही है।