एक्ट्रेस आशा पारेख को 30 सितंबर को मिलेगा दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड

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मुंबई। बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस आशा पारेख को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। आशा पारेख को फिल्म जगत के इस सबसे बड़े सम्मान को 30 सितंबर को होने वाले नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में दिया जाएगा। इसका ऐलान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया। आशा पारेख ने 60 और 70 के दशक में बॉलीवुड पर राज किया और कई यादगार फिल्में कीं।

सबसे महंगी एक्‍ट्रेस : आशा पारेख (Asha Parekh) भारतीय सिनेमा में ‘द हिट गर्ल’ के नाम से भी मशहूर रही हैं। उन्‍होंने अपने पूरे करियर में कर्मश‍ियल फिल्‍मों में खूब शोहरत पाई है। आशा पारेख अपने दौर की सबसे महंगी एक्‍ट्रेस रही हैं। बॉलीवुड में 1960 और 1970 के दशक में उनके नाम सबसे ज्‍यादा हिट फिल्‍में देने का भी रिकॉर्ड है। आशा पारेख की सबसे पॉपुलर फिल्‍मों में ‘जब प्यार किसी से होता है’ (1961), ‘फिर वही दिल लाया हूं’ (1963), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), ‘बहारों के सपने’ (1967), ‘प्यार का मौसम’ ‘ (1969), ‘कटी पतंग’ (1970) और कारवां (1971) शामिल हैं। आशा पारेख ने नासिर हुसैन की फिल्म ‘मंजिल मंजिल’ (1984) में भी एक कैमियो किया था, जिसके साथ उन्होंने पहले 6 फिल्में की थीं।

चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरुआत: आशा पारेख उम्दा एक्ट्रेस ही नहीं बल्कि कमाल की क्लासिकल डांसर भी हैं। उन्होंने बचपन से डांस सीखना शुरू कर दिया था। आशा पारेख ने फिल्मों में बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था। मात्र 10 साल की उम्र में उन्होंने 1952 में आई फिल्म ‘मां’ में काम किया। इसके बाद आशा पारेख ने कुछ और फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काम किया। लेकिन बाद में एक्टिंग छोड़ दी और पढ़ाई पर ध्यान देने लगीं।

कर दिया था रिजेक्ट: पढ़ाई पूरी करने के बाद आशा पारेख ने 16 साल की उम्र में 1959 में आई फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ से हीरोइन के तौर पर डेब्यू करना चाहा। लेकिन उन्हें इस फिल्म से यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि वह स्टार मटीरियल नहीं हैं। लेकिन नासिर हुसैन ने उन्हें उसी साल फिल्म ‘दिल देके देखो’ में साइन किया। इस फिल्म में आशा पारेख के ऑपोजिट शम्मी कपूर थे। फिल्म सुपरहिट रही और इसने आशा पारेख को रातोंरात स्टार बना दिया।

1992 में मिल चुका है पद्मश्री : साल 1992 में इससे पहले सिनेमा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। आशा पारेख को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने लिविंग लीजेंड अवॉर्ड से सम्‍मानित किया था। आशा पारेख भारत के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) की पहली महिला अध्यक्ष थीं।

मुंबई में चलाती हैं डांस एकेडमी: मौजूदा वक्‍त में वह फिल्‍मों से दूर मुंबई में अपनी खुद की एक डांस एकेडमी चलाती हैं। इसके अलावा वह सांता क्रूज इलाके में आशा पारेख अस्पताल का भी काम देखती हैं।