मुम्बई। चालू मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी नवम्बर 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान भारत में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 78.15 लाख टन पर पहुंच गया जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के आयात 68.76 लाख टन से करीब 13 प्रतिशत अधिक रहा। इसी तरह समीक्षाधीन अवधि में खाद्य तेलों का आयात खर्च भी 73,000 करोड़ रुपए से लगभग 19 प्रतिशत उछलकर 87,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से ज्ञात होता है कि खाद्य तेलों पर आयात खर्च में हुई अधिक बढ़ोत्तरी का कारण वैश्विक बाजार भाव ऊंचा रहना तथा भारतीय मुद्रा (रुपया) की विनिमय दर में गिरावट आना माना जा रहा है।
एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में हाल के महीनों में खाद्य तेलों का भाव तेजी से बढ़ा है जिससे आयात खर्च में ज्यादा वृद्धि हुई है।
हालांकि खाद्य तेलों का सकल आयात मार्च के 11.73 लाख टन से बढ़कर अप्रैल में 13.07 लाख टन पर पहुंच गया लेकिन पाम तेल के आयात में कमी आई। इस अवधि में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात 6.73 लाख टन से 24.21 प्रतिशत घटकर 5.10 लाख टन तथा आरबीडी पामोलीन का आयात 13,498 टन से 88.62 प्रतिशत लुढ़ककर 1536 टन पर अटक गया।
भारतीय आयातकों द्वारा अप्रैल में सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल मंगाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके फलस्वरूप मार्च की तुलना में अप्रैल के दौरान सूरजमुखी तेल का आयात दोगुने से ज्यादा बढ़ गया जबकि सोयाबीन तेल के आयात में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।

