रमजान में युद्ध पर आपत्ति, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से समाधान की बात
कोटा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर भारतीय सर्वधर्म संसद के संयोजक एवं महर्षि भृगु पीठाधीश्वर गुरु गोस्वामी सुशील गिरी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पवित्र रमजान माह में ईरान पर हमला मानवीय दृष्टि से अनुचित है, जिसमें निर्दोष नागरिकों, विशेषकर बच्चों को भी नुकसान उठाना पड़ा है।
शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए महर्षि भृगु पीठाधेश्वर गुरू गोस्वामी सुशील गिरी महाराज ने कहा कि जैसे भारत में नवरात्रि आस्था और साधना का पर्व है, वैसे ही रमजान मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत और संयम का समय होता है। ऐसे अवसरों पर युद्ध और हिंसा किसी भी सभ्य समाज के अनुरूप नहीं है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम और सर्वधर्म समभाव की भारतीय परंपरा को वैश्विक शांति का आधार बताते हुए संवाद को ही एकमात्र समाधान बताया।
उन्होंने बताया कि हाल ही में चल रहे ईरान युद्ध के दौरान, होर्मुज़ (Strait of Hormuz) मार्ग बाधित होने से भारत के कई जहाज रुके हुए थे। गोस्वामी ने दावा किया कि उनके प्रयासों से यह मार्ग पुनः सुचारू हो सका, जिससे एलपीजी गैस से भरे जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुँच पाए।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक कूटनीतिक संवाद से जटिल अंतरराष्ट्रीय संकटों का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी हल नहीं है, बल्कि यह मानवता और संसाधनों के विनाश का कारण बनता है। विज्ञान और आविष्कार का दुरुपयोग ही विश्व युद्धों को जन्म देता है, इसलिए मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और धर्म के मूल सिद्धांतों की ओर लौटना होगा।
उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक क्षेत्र में, रामलीला शोध संस्थान द्वारा आधुनिक तकनीक के माध्यम से भारतीय विरासत को विश्व के विभिन्न देशों तक पहुँचाने का सफल कार्य किया गया है। लाइट एवं साउंड तकनीक के उपयोग से अब तक स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका, दुबई, इंडोनेशिया, वेस्टइंडीज और थाईलैंड सहित अनेक देशों में रामलीला मंचन किया जा चुका है, जिससे भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है।
उन्होंने बताया कि कोटा में भी इसी प्रकार के भव्य सांस्कृतिक आयोजन की योजना है, किंतु उपयुक्त स्थान एवं सक्षम आयोजकों के अभाव में यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है। इस संदर्भ में आयोजन की जिम्मेदारी हिमालय परिवार के प्रदेश अध्यक्ष सचिदानंद पारीक द्वारा संभाली जा रही है और स्थानीय सहयोग मिलने पर यह पहल पर्यटन एवं रोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर सकती है।
उन्होंने बताया कि साथ ही प्रधानमंत्री के दूरदर्शी विचारों को आगे बढ़ाते हुए, ऑस्ट्रेलिया के संत डॉ. मोहन के नेतृत्व में केरल में एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि “मन की बात” में व्यक्त पर्यटन विकास की सोच के अनुरूप, कोटा एवं आसपास के क्षेत्रों में सांस्कृतिक रथ, रामलीला मंचन एवं अन्य आयोजन प्रारंभ कर क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि अंततः, यह पहल केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की पहचान को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने, सामाजिक समरसता बढ़ाने एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोटा प्रवास के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर हिमालय परिवार के प्रदेश महामंत्री सच्चिदानंद पारीक, जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा व्यास, किशन पाठक, रमेश राठौड़, श्याम मनोहर हरित, नीलेश पारीक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

