जयपुर। राजस्थान में हाल ही में हुई बारिश से बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, नोखा लाइन पर इसबगोल फसल को 10-15 प्रतिशत तक नुकसान होने की सम्भावना है। जबकि मेड़ता एवं नागौर लाइन पर फसल की स्थिति अच्छी है।
उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के लिए प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में इसबगोल की बिजाई 50/60 प्रतिशत क्षेत्रफल पर की गयी थी इसके अलावा गुजरात में भी इसबगोल की बिजाई 17284 हेक्टेयर की गयी।
जबकि गत वर्ष गुजरात में बिजाई का क्षेत्रफल 27488 हेक्टेयर का रहा था। उल्लेखनीय है कि इसबगोल के कुल उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 70/75 प्रतिशत एवं गुजरात की 25/30 प्रतिशत की रहती है।
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर नए इसबगोल की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन आवक का दबाव अप्रैल माह में बनेगा। उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर इसबगोल के भाव 110/135 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि आवक का दबाव बनने के पश्चात भी कीमतों में अधिक मंदे के आसार नहीं है क्योंकि दूसरे वर्ष भी देश में इसबगोल का उत्पादन कम माना जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान देश में इसबगोल उत्पादन 20/22 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 70/75 किलो) होने की सम्भावना है। जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 28/30 लाख बोरी एवं वर्ष 2024 में 38/40 लाख बोरी का उत्पादन रहा था।
व्यापारियों का मानना है कि आगामी दिनों में आवक बढ़ने पर अप्रैल माह के दौरान इसबगोल के दामों में 5/10 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ सकती है। लेकिन वर्ष 2026 में भाव तेज रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
निर्यात: चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम 10 माह में इसबगोल का निर्यात गत वर्ष की तुलना में कम रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रिअल-जनवरी 2026 के दौरान इसबगोल भूसी का निर्यात 49814.76 टन का रहा। जबकि अप्रैल-जनवरी 2025 में निर्यात 52977.46 टन का हुआ था। जनवरी 2026 में भी निर्यात गत वर्ष के 5756.30 टन के मुकाबले 5030.50 टन का हुआ है।

