नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में भारत के 20 से ज्यादा टैंकर फंसे हैं। इन टैंकरों में तेल और गैस है। ईरान के साथ भारत सरकार बातचीत कर रही है। इसका मकसद इन टैंकरों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट से इसका पता चलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत विदेश मंत्रालय देख रहा है।
ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला पतला पानी का रास्ता अभी बंद है। दुनिया का पांचवां हिस्सा कच्चा तेल (क्रूड) आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।
ये टैंकर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं। इनमें लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) और कच्चा तेल (क्रूड) है।
इससे पहले दिन में इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची ने बातचीत की थी। इस बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पानी के रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी। फिर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत का जिक्र किया। लेकिन, ज्यादा डिटेल साझा करने से मना कर दिया।
एक-दूसरे के संपर्क में हैं ईरान और भारत
जयशंकर ने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्वीट करके कहा था कि उन्होंने अपने अराघची से बात की है। दोनों पक्ष संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने जहाजों का जिक्र नहीं किया। इस बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।
पुरी ने बताया, ‘आधुनिक एनर्जी इतिहास में दुनिया ने ऐसा समय पहले कभी नहीं देखा…भारत की क्रूड सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है और जो वॉल्यूम मिला है, वह होर्मुज से मिलने वाले क्रूड से ज्यादा है। संकट से पहले भारत का लगभग 45 फीसदी क्रूड इंपोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होता था। प्रधानमंत्री की शानदार डिप्लोमैटिक पहुंच और गुडविल की वजह से भारत ने उतना क्रूड वॉल्यूम हासिल किया है, जितना उसी समय में होर्मुज स्ट्रेट से मिल सकता था।’
नॉन-होर्मुज रूट से ऑयल इंपोर्ट में बढ़ोतरी
मंत्री ने आगे कहा कि तेल रिफाइनरियां हाई कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर काम कर रही हैं। इनमें से कई 100 फीसदी से भी ज्यादा हैं। पुरी ने कहा कि नॉन-होर्मुज देशों से क्रूड ऑयल के इंपोर्ट में भी करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, लड़ाई शुरू होने पर यह 55 फीसदी थी।
उन्होंने संसद को बताया, ‘रिफाइनरियां हाई कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर काम कर रही हैं। कई मामलों में वे 100% से भी ज्यादा काम कर रही हैं। पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ या फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, केरोसीन और फ्यूल ऑयल की अवेलेबिलिटी पूरी तरह से पक्की है। देश भर के रिटेल आउटलेट्स में स्टॉक है। इन प्रोडक्ट्स के लिए सप्लाई चेन नॉर्मल तरीके से काम कर रही है।’

