नई दिल्ली। टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत के लिए रूसी तेल खरीदने का रास्ता खुल सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक, भारत शायद रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को गैर-कानूनी ठहराने वाले फैसले ने उनकी ट्रेड पॉलिसी के ऑप्शन को कम कर दिया है।
क्विंसी इंस्टीट्यूट फॉर रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट में ग्लोबल साउथ प्रोग्राम के डायरेक्टर सारंग शिदोरे ने सीएनबीसी के इनसाइड इंडिया को बताया, ‘मुझे उम्मीद है कि भारत रूस के साथ एनर्जी समेत अच्छे रिश्ते बनाए रखेगा।’ उन्होंने आगे कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना कम कर सकता है। लेकिन, पूरी तरह से बंद होने की उम्मीद कम है।
एनर्जी डेटा प्रोवाइडर केप्लर के अनुसार, भारत ने फरवरी में अब तक 11.6 लाख बैरल प्रति दिन (mbd) रूसी तेल इंपोर्ट किया है। यह 2025 में 17.1 लाख बैरल प्रति दिन के औसत इंटेक से कम है।
हालांकि, मार्च और अप्रैल में आने वाले तेल का डेटा देना अभी जल्दबाजी होगी। केप्लर में क्रूड ऑयल के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट मुयू जू ने कहा कि मार्केट की चर्चा से पता चलता है कि भारतीय रिफाइनर अंतरिम भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद इस महीने रूसी तेल की अप्रैल डिलीवरी बुक करने से बच रहे हैं।
हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कि ट्रंप के पास इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत बड़े इंपोर्ट टैरिफ लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं है। जू ने कहा कि भारत के पास अब रूसी तेल इंपोर्ट को 8,00,000 से 10 लाख बैरल प्रति दिन के बीच बनाए रखने की गुंजाइश है।
शिदोरे के मुताबिक, कोर्ट के फैसले की वजह से ट्रंप की रूसी तेल खरीदने या ट्रेड या इकोनॉमिक्स से अलग वजहों से टैरिफ में बदलाव करने की काबिलियत पर रोक लगेगी।भारत के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने सीएनबीसी के कमेंट के रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया। भारत का रूसी तेल खरीदना एक जटिल मुद्दा रहा है। इसकी वजह से पिछले साल अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते खराब हुए थे।
अगस्त में ट्रंप ने रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए नई दिल्ली को सजा देने के लिए भारतीय सामान पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया। यह दावा करते हुए कि भारत यूक्रेन के खिलाफ रूस की वॉर मशीन को फ्यूल दे रहा है। इस तरह अमेरिका को भारतीय एक्सपोर्ट पर कुल 50% टैरिफ लगा। यह अमेरिका के सभी ट्रेडिंग पार्टनर्स में सबसे ज्यादा था। अंतरिम ट्रेड डील के बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अपना टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया।
6 फरवरी को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अपना 25% एक्स्ट्रा टैरिफ हटा दिया। इसमें कहा गया कि नई दिल्ली ने सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ का तेल इम्पोर्ट करना बंद करने का वादा किया है। वह अमेरिका से एनर्जी प्रोडक्ट खरीदेगा।
रूसी तेल न खरीदने का वादा नहीं
यह और बात है कि अंतरिम ट्रेड डील की घोषणा करते हुए भारत और अमेरिका की ओर से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने के वादे का कोई जिक्र नहीं था। हालांकि, स्टेटमेंट में नई दिल्ली के इस इरादे का जिक्र था कि वह डील के हिस्से के तौर पर अगले पांच सालों में एनर्जी सहित अमेरिका के आधे ट्रिलियन डॉलर के सामान खरीदेगा।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की लीड इकोनॉमिस्ट एलेक्जेंड्रा हरमन ने कहा कि रूसी तेल खरीद कम करने के भारत के वादे कभी भी औपचारिक रूप से कोडिफाई नहीं किए गए थे। असल में लागू करना हमेशा मुश्किल लगता था।
हरमन ने आगे कहा कि भारत की एनर्जी स्ट्रैटेजी मूल रूप से कीमत के हिसाब से और किसी एक सप्लायर से बंधे न रहने की प्रेरणा से चलती है। हरमन ने कहा, ‘अमेरिकी क्रूड ऑयल के किसी भी तरह से रूसी बैरल की जगह लेने की उम्मीद कम है।’

