कोटा। सिटी पार्क स्थित एम्फीथिएटर गुरुवार की सायं एक अलग ही संगीतमय दुनिया में तब्दील हो गया, जब सृजन द स्पार्क, कोटा चैप्टर द्वारा आयोजित भव्य ‘म्यूजिकल नाइट ताल तरंग’ के सुर रात के आकाश में गूंजने लगे। रात 8:15 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायक आलोक कटदरे और प्लेबैक सिंगर मोना कामथ (Playback Singer Mona Kamath) ने क्रमशः किशोर कुमार और लता मंगेशकर के कालजयी गीतों को ऐसे जीवंत किया कि श्रोता भावविभोर हो उठे।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीपप्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में आईजी कोटा रेंज राजेंद्र प्रसाद गोयल उपस्थित रहे। उनके साथ अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईजी एवं मुख्य सलाहकार प्रसन्न कुमार खमेसरा, गोविन्द माहेश्वरी, एडिशनल कमिश्नर (जीएसटी) सुनिता डागा, कोटा विकास प्राधिकरण की आयुक्त ममता तिवारी तथा समाजसेवी दीपक राजवंशी,संस्था के अध्यक्ष डॉ. विजय सरदाना, सचिव संजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष अनिमेष जैन, कोषाध्यक्ष विकास अजमेरा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजकुमार जैन, अनिश बिरला एवं उमेश गोयल सहित सृजन के सदस्यो ने कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि 28 जनवरी 2023 को कोटा चैप्टर के गठन के बाद यह 13वां बड़ा आयोजन है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य नए कलाकारों को मंच देना और संगीत को सामाजिक जुड़ाव का सशक्त माध्यम बनाना है। सृजन द स्पार्क ब्रिटेन, दुबई, कनाडा और अमेरिका में भी अपने चैप्टर स्थापित कर एक वैश्विक संगीत संस्थान के रूप में उभर चुकी है।
लता की आवाज़ का जादू फिर जीवंत हुआ
रात की पहली पेशकश थी मोना कामथ की, जिन्होंने मंच संभालते ही ‘रात अकेली है’ से ऐसा समां बांधा कि एम्फीथिएटर में सन्नाटा छा गया – सिवाय तालियों की गड़गड़ाहट के। इसके बाद ‘आइए मेहरबान’ की अदाकारी भरी प्रस्तुति ने दर्शकों को पुरानी हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम दौर में पहुंचा दिया।
‘बाहों में चले आओ’, ‘काँटों से खींच के’ और ‘जवानी जानेमन’ जैसे सदाबहार गीतों ने माहौल को और रूमानी बना दिया। मोना ने अपना एकल गीत प्रस्तुत कर यह साबित किया कि लता की विरासत को आगे ले जाने में वे सक्षम हैं।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजकुमार जैन ने बताया कि मोना कामथ विभिन्न राष्ट्रीय संगीत मंचों पर सक्रिय हैं और लता मंगेशकर के गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के लिए व्यापक रूप से सराही जाती हैं।
किशोर कुमार का दूसरा जन्म
जैसे ही आलोक कटदरे ने ‘मैं हूं डॉन’ के बोल छेड़े, दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी। किशोर कुमार की शरारत, उनकी नटखट शैली और उनके गीतों की बेफिक्री को आलोक ने इतनी सजीवता से उतारा कि कई श्रोताओं की आँखें नम हो गईं। ‘तेरे चेहरे में वो जादू है’, ‘नीले नीले अंबर’ और ‘मेरे नयना सावन भादो’ ने रूमानियत की चाशनी घोली। ‘एक चतुर नार’ पर दर्शक खिलखिला उठे, जबकि ‘ओ माझी रे’ ने भावनाओं की गहराई को छुआ।
‘चाहिए थोड़ा प्यार’ और ‘ओ मेरे दिल के चैन’ ने पुरानी प्रेम कहानियों को एक बार फिर ताज़ा किया। फिर आया वह जादुई क्षण जब आलोक ने ‘मैं शायर बदनाम / चिंगारी / कुछ तो लोग कहेंगे / ये क्या हुआ / खिज़ाँ के फूल’ की मेडली प्रस्तुत की। यह एकल मेडली कार्यक्रम की सर्वाधिक सराही गई प्रस्तुति बनी। ‘मेरे महबूब क़यामत होगी’, ‘पल पल दिल के पास’, ‘प्यार हमें किस मोड़ पे’ और ‘वादा तेरा वादा’ ने रात के अंतिम पहर में ऐसी भावनात्मक तरंगें उठाईं कि श्रोता झूमते रहे।

