आवासीय क्षेत्र और बेहतरीन कनेक्टिविटी विकसित की जाए: अशोक माहेश्वरी
कोटा। शहर में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित एरोसिटी निर्माण को लेकर मंगलवार को केडीए आयुक्त ममता तिवारी की अध्यक्षता में शहर के व्यापार जगत, होटल व्यवसाय, कोचिंग व्यवसाय एवं उद्योग जगत से जुड़े लोगों की एक बैठक केडीए सभागार में संपन्न हुई।
बैठक मे एरोसिटी के नजदीक प्रस्तावित कार्य योजना के तहत 4 जोन में विकसित किया जाने, जिसमें कमर्शियल, इंडस्ट्रियल, एजुकेशनल सहित कई अन्य गतिविधियां संचालित करने के लिए बेहतरीन स्वरूप प्रदान करने पर प्रकाश डाला गया। शहर से बेहतरीन कनेक्टिविटी दिए जाने की यह कार्य योजना बनाई गई है।
केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि एरोसिटी के नजदीक 658 हेक्टर जमीन रीको को दी गई है और 755 सेक्टर जमीन पर कमर्शियल, शैक्षणिक, हॉस्पिटैलिटी, होटल रिसोर्ट एवं आवासीय क्षेत्र के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है।
बैठक में होटल फेडरेशन आफ राजस्थान कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने कहा कि प्रस्तावित कार्य योजना बेहतरीन है। लेकिन इसको विकसित करने के लिए अभी से इसका इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना होगा। सड़के, बिजली एवं पानी की व्यवस्था के साथ-साथ सबसे पहले शहर की दो-तीन सड़कों को सीधा इस क्षेत्र को जोड़ना होगा।
साथ ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के साथ ही यहां पर समस्त प्रोजेक्ट निर्माण की गतिविधियां शुरू करनी होगी। यहां पर एयरपोर्ट के निर्माण के साथ ही एरोसिटी की समस्त निर्माण की गतिविधियां भी विकसित हो सके। भारत माला रोड एवं रेलवे कनेक्टिविटी से भी एरोसिटी को जोड़ने की व्यवस्था के साथ ही मेट्रो ट्रेन का प्रोविजनल भी इसमें जोड़ना पड़ेगा।
इस कार्य योजना के क्षेत्र में प्राइवेट जमीनों पर 92 बी पर लगाई गई रोक को भी हटाया जाना चाहिए, जिससे प्राइवेट सेक्टर के लोग भी आवासीय कालोनियां व अन्य गतिविधियों का संचालन यहां पर कर सकेंगे।
माहेश्वरी ने कहा कि रामनगर पत्थर मंडी में अलॉट हुए भूकंप पिछले 25 वर्षों से खाली पड़े हुए हैं। अतिक्रमण और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने की वजह से यह क्षेत्र अभी तक विकसित नहीं हो पाया है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की कीमत जो वर्तमान में ₹400 प्रति वर्गफिट बाजार भाव है।
जबकि डीएलसी की रेट ₹2100 प्रति वर्गफूट है। इसकी वजह से यहां पर खरीद बिक्री भी नहीं हो पा रही है। पिछले 25 वर्षों से कोई सेकंड रजिस्ट्री यहां पर नहीं हुई है। आने वाले समय में यह क्षेत्र एयरोसिटी से मात्र 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है।
अतः यहां पर लैंड यूज में कन्वर्जन करके अन्य गतिविधियां भी संचालित करने की अनुमति दी जाए। पिछले दिनों केडीए द्वारा इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया है। 46 करोड रुपए की सड़कों के कार्य भी इस क्षेत्र में शुरू किए गए हैं। अन्य गतिविधियों की अनुमति मिलने के बाद निश्चित ही यह क्षेत्र तेजी से विकसित होगा।
माहेश्वरी ने कहा कि कार्य योजना को मूर्त रूप देने के लिए एरोसिटी के निर्माण का राष्ट्रीय स्तर का इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए, जिससे बाहर के निवेशक भी इस क्षेत्र में अपना निवेश कर सके।
इसके लिए एक नोडल अधिकारी और अलग से एक विभाग के अधिकारियों का गठन किया जाए, जिसके साथ ही एक एकल खिड़की विंडो के आधार पर इस क्षेत्र में निवेश करने वालों को कम समय में सभी काम एक साथ हो सके।
साथ ही एक मार्केटिंग टीम भी अलग से घटित की जाए, जिससे पूरे देश में इसका प्रचार प्रसार कर पूरे देश की निवेशकों को कोटा में आमंत्रित किया जाए। हमें गुजरात मॉडल पर जाना होगा, जिससे यह क्षेत्र शैक्षणिक औद्योगिक और पर्यटन से जुड़े निवेशकों को आकर्षित कर सके।
यहां पर हवाई अड्डे के निर्माण के साथ ही हमें इस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास के नए क्षेत्र भी विकसित करने होंगे। अगर इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो यहां ट्रैफिक मिलने की चुनौती का भी हमको सामना करना पड़ सकता है। एरोसिटी विकसित करने के लिए एक टेक्निकल टीम का गठन किया जाए, जिसमें व्यापार उद्योग व अन्य तकनीकी से जुड़े लोगों को इस टीम में शामिल किया जाए।
इस अवसर पर होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान कोटा डिवीजन के महासचिव संदीप पाडिया ने कहा कि आधे अधूरे विकास से बचने के लिए हमें शुरुआत से ही संतुलित विकास करना होगा। केडीए आयुक्त ममता तिवारी, सचिव मुकेश चौधरी ने कहा कि सभी के सुझाव से केडीए इस योजना को बेहतरीन स्वरूप प्रदान करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। इस योजना को मूर्त रूप एवं एरोसिटी निर्माण के बाद कोटा शहर का स्वरूप अलग ही होगा।
बैठक मे एक्सईएन रविंद्र माथुर नगर प्लानर निदेशक प्लानिंग मुकेश मालव, नगर नियोजन सलाहकार संदीप दंडवते सहित कोटा व्यापार महासंघ के पदाधिकारी होटल फेडरेशन आफ राजस्थान कोटा डिवीजन के पदाधिकारी, कोचिंग एवं बिल्डर्स सहित से कई विभागों के पदाधिकारी भी मौजूद थे।

