Friday, June 19, 2026
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सोयाबीन के गिरते दाम से किसान परेशान, 2700 रुपये से नीचे वायदा

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मुंबई। मॉनसून की तेज रफ्तार के साथ कृषि जिंसों के दाम भी लुढ़क रहे हैं। सोयाबीन की कीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है। सोयाबीन के दाम पिछले पांच साल के निम्नतम स्तर पर पहुंच गए। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर खरीद किए जाने से नाराज किसान अब सोयाबीन की खेती को ही बंद करने की बात कर रहे हैं। वायदा बाजार में तो सोयाबीन 2,700 रुपये के नीचे पहुंच गई। 
 
एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन की कीमत गिरकर 2,696 रुपये पर आ गई। हाजिर बाजार में सोयाबीन 2,700 रुपये में खरीदी जा रही है। सबसे बड़ी सोयाबीन मंडी इंदौर में सोयाबीन की खरीद 2,700 रुपये पर हुई तो किसान और कारोबारियों के बीच कल झड़प भी हो गई जिसके कारण आज इंदौर मंडी बंद रही।

किसानों का कहना है कि एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन का हाजिर भाव 2,860 रुपये दिखाया जा रहा है और सरकार ने एमएसपी 2,775 रुपये प्रति क्ंिवटल तय किया है लेकिन कारोबारी आपसी सांठगांठ करके कीमतें गिराते हैं और सरकार द्वारा तय की गई कीमत से कम पर माल खरीदते हैं। 

मंडी में मिलने वाली कीमत और व्यवस्था से परेशान किसान इस बार सोयाबीन की फसल छोडऩे की बात कर रहे हैं। सोयाबीन कारोबारी नरेश जैन कहते हैं कि किसानों को उचित कीमत मिलनी चाहिए, वर्ष 2016-16 के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,775 रुपये प्रति क्ंिवटल तय किया गया है लेकिन म ज्यादातर मंडियों में सोयाबीन 2,700 रुपये के नीचे बिक रहा है। 
 
किसानों का सोयाबीन की फसल से मोहभंग हुआ तो वे दूसरी फसल की बुआई करेंगे जिसका नुकसान सोयाबीन उद्योग को होगा। इसीलिए इस मामले में सरकार को ध्यान देना चाहिए। ऐंजल कमोडिटीज के रितेश साहू के मुताबिक सोयाबीन की बुआई शुरू हो चुकी है। पिछले खरीफ सीजन के दौरान देश में सोयाबीन फसल का रकबा बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हुआ था।

उससे पिछले साल देश में 20,000 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई थी। सोयाबीन का उत्पादन सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में होता है, ऐसे में किसानों की नाराजगी बुआई पर असर डाल सकती है। इस साल देश में सोयाबीन की कीमतों में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई है। जुलाई 2012 में सोयाबीन की कीमत 5,000 रुपये के करीब बोली जा रही थी जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।

जिसके बाद किसानों का सोयाबीन की तरफ आकर्षण बढ़ा लेकिन अब एमएसपी से भी कम दर पर खरीदारी की जाएगी तो किसान दोबारा दूसरी फसलों की तरफ जा सकते हैं जो उद्योग के लिए सही नहीं होगा। सोयाबीन की कीमतों में गिरावट की वजह देश में बंपर उत्पादन को माना जा रहा है। अधिक उत्पादन के साथ ही पिछले साल का स्टॉक भी बचा हुआ है जिससे मांग कमजोर बनी हुई है।

जबकि मंडियों में आपूर्ति अधिक हो रही है। सोयाबीन उद्योग की मानी जाए तो 2016-17 के दौरान देश मेंं सोयाबीन का उत्पादन करीब 115 लाख टन हुआ है। इसकेसाथ ही चार लाख टन सोयाबीन पिछले साल के स्टॉक के तौर पर बाजार में जमा था। इस तरह इस साल देश में सोयाबीन का स्टॉक कुल 119 लाख टन हो गया है। 

निर्यातकों को एक जुलाई से देना होगा जीएसटी आईएन

नई दिल्ली । पहली जुलाई से निर्यातकों और आयातकों को विदेशी व्यापार करने के लिए जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर देना अनिवार्य होगा। 15 अंकों वाला जीएसटिन गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) की ओर से जारी किया जाता है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी है।

विभाग के मुताबिक वस्तु एवं सेवा कर लागू होने की तारीख से आयात पर आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) क्रेडिट पाने और निर्यात पर जीएसटी रिफंड लेने के लिए कस्टम दस्तावेज में जीएसटिन का उल्लेख करना जरूरी होगा। यह घोषित जीएसटिन सही आइईसी (इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड नंबर)/पैन लिंकेज के लिए प्रमाणित किया जाएगा।

जीएसटीएन पोर्टल पर करदाताओं के नामांकन की प्रक्रिया पहली जून (गुरुवार) से शुरू हो जाएगी। पंजीकरण का यह काम 15 दिनों के लिए खुलेगा। इससे पहले पोर्टल पर 30 अप्रैल से पंजीकरण प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। एडवाइजरी में कहा गया है कि जीएसटीएन फिर से पंजीकरण के लिए आइईसी को अपडेट करने की खातिर एक जून से 15 जून तक विशेष अभियान चलाएगी।

टैक्स रिफंड को लेकर जताई चिंता:
इस बीच निर्यातकों ने जीएसटी के तहत टैक्स रिफंड प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है। वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें पहले से मिल रहीं रियायतें जीएसटी के अंतर्गत भी जारी रखी जानी चाहिए। जीएसटी में निर्यातकों को ड्यूटी पहले अदा करनी होगी। उसके बाद रिफंड क्लेम करना होगा। ऐसा अनुमान है कि इस रिफंड प्रक्रिया के चलते निर्यातकों की सालाना 1.85 लाख करोड़ रुपये तक की वर्किग कैपिटल फंस जाएगी।

जारी रहे राज्यों के शुल्कों की भरपाई: परिधान निर्यातकों की संस्था अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) ने मांग की है कि इस सेक्टर के लिए राज्यों के शुल्कों पर मिल रही छूट को जीएसटी प्रणाली में भी जारी रखा जाए। उनकी दलील है कि इस छूट से निर्यात को प्रोत्साहन मिल रहा था। एईपीसी ने पिछले हफ्ते वित्त मंत्री अरुण जेटली के समक्ष आरओएसएल (रिबेट ऑफ स्टेट लेवीज) को लेकर एक प्रजेंटेशन दिया था।

इस संस्था का कहना है कि आरओएसएल लागू होने का अपैरल निर्यात को खासा फायदा मिला है। इसके चलते अप्रैल में परिधान निर्यात में 31.7 फीसद का इजाफा हुआ था। बीते साल सितंबर से राजस्व विभाग ने 5,500 करोड़ रुपये वाली आरओएसएल स्कीम चालू की थी। इसके तहत निर्यातकों को राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों की भरपाई की जाती है।

जीएसटीएन का आइटी तंत्र साइबर अटैक से पूरी तरह सुरक्षित
वस्तु एवं सेवा कर के आइटी ढांचे से जुड़ी कंपनी जीएसटी नेटवर्क ने सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा समाधानों से लैस है। इसके चलते जीएसटी तंत्र किसी भी तरह के साइबर अटैक से पूरी तरह सुरक्षित होगा। जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने यह दावा किया है। देश अपनी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का कायाकल्प करने जा रहा है। 

बिना सब्सिडी का रसोई गैस सिलिंडर 80 रुपये सस्ता

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नई दिल्ली। बिना सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलिंडर गुरुवार से 80 रुपये सस्ता हो गया है,  इसके लिए 646.50 रुपये भुगतान करना होगा। फिलहाल इसकी कीमत 726.50 रुपये है। तेल कंपनियों ने रसोई गैस उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है।  

इसी तरह से 19 किलो का कॉमर्शियल सिलिंडर भी 130 रुपये सस्ता हो गया है। अब यह 1259.50 रुपये में मिलेगा। इस समय इसकी कीमत 1397.50 रुपये है। रसोई गैस की कीमत घटने से अब सब्सिडी भी कम मिलेगी। जून से प्रति सिलिंडर 181.53 रुपये रसोई गैस सब्सिडी मिलेगी। फिलहाल यह  264.58 रुपये है। इस तरह से इसमें 83.05 रुपये की कमी आएगी। 

सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर हुआ महंगा
रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर में 3.88 रुपये की वृद्धि की गई है जबकि गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम 78.50 रुपये कम किए गए हैं। 

अब 50 रुपये में जांचें दूध की शुद्धता, डिवाइस तैयार

पुणे। शहर के रीसर्चरों ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिसके जरिए महज दो मिनट में दूध की शुद्धता जांची जा सकती है। रीसर्चरों की टीम ने 30 मई को मंत्रालय में फूड ऐंड ड्रग्स ऐडमिनिस्ट्रेशन(FDA) और ड्रग्स ऐंड सिविल सप्लाइज मिनिस्टर गिरीश बापत के सामने डिवाइस का डेमो भी दिया।

यह प्रॉडक्ट दो साल पहले राइट टु रीसर्च फाउंडेशन के रीसर्चरों द्वारा तैयार किया गया था। इस प्रॉडक्ट में कागज की 4 स्ट्रिप्स हैं और हर स्ट्रिप दूध के कंपोनंट्स की जांच करने में मदद करती है। इन स्ट्रिप्स की मदद से दूध में यूरिया, सॉल्ट, ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की मात्रा की जांच की जा सकती है। पेपर की स्ट्रिप पर दूध का एक ड्रॉप डाला जाता है और अगर दूध में मिलावट है तो स्ट्रिप का रंग बदल जाता है।

उदाहरण से समझिए। मान लीजिए दूध में यूरिया की जांच करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्ट्रिप का रंग पीला है। ऐसे में अगर दूध में मिलावट है तो स्ट्रिप का रंग गुलाबनुमा लाल हो जाएगा। वहीं, दूध में सॉल्ट की जांच करने की जाए तो सॉल्ट की मात्रा अधिक होने पर भूरे रंग की स्ट्रिप पीले में बदल जाएगी।

ग्लोकोज के लिए रंगहीन स्ट्रिप का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी मात्रा अधिक होने पर स्ट्रिप का रंग भूरे में बदल जाएगा और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के केस में हल्के परपल रंग की स्ट्रिप गहरे नीले में बदल जाएगी।

इस डिवाइस को तैयार करने वाली रीसर्च टीम के सदस्य जयंत खांडरे ने कहा, ऐसी डिवाइस तैयार करने का आइडिया FDA कमिश्नर से मिला, जिन्होंने दूध में मिलावट के बढ़ते मामलों का जिक्र किया। उन्होंने बताया, ‘हमारा उद्देशय एक ऐसी डिवाइस तैयार करना था, जो सस्ती होने के साथ-साथ जांच में कम समय ले।

फिलहाल, दूध में मिलावट की जांच करने वाली डिवाइसेस की कीमत 500 रुपये के आसपास है, हम इसे महज 50 रुपये तक लाने में कामयाब हुए हैं। मंत्री चाहते हैं कि इस डिवाइस का दाम महज एक रुपये तक लाया जाए, लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब इसकी सप्लाई में बेतहाशा वृद्धि हो।’

खांडरे ने आगे कहा, ‘हम इस डिवाइस में स्टार्च और कास्टिक के इंडिकेटर्स जोड़ने पर काम कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूध कहीं कृत्रिम तेल से तो नहीं बनाया गया है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इस डिवाइस को घर-घर तक पहुंचाने के लिए सप्लाई-चेन को मेनटेन करने की है।’

जीएसटी : छोटे उद्योगों की मदद के लिए 100 करोड़

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अनुपालन में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) की मदद के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये अलग रखे हैं। एमएसएमई मंत्रालय ने कहा कि नकदी का स्थानांतरण कंपनियों को नहीं किया जाएगा, बल्कि इसका इस्तेमाल हेल्प डेस्क, जागरूकता कैंप और इस तरह का बुनियादी ढांचा बनाने में किया जाएगा।

इस योजना का विस्तृत ब्योरा अभी तैयार किया जाना है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि उम्मीद की जा रही है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से जागरूकता का प्रसार व फर्मों में कराधान मानकों व अंकेक्षण को अद्यतन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। 

 सरकार ने विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगने वाले कर के मुताबिक उन्हें चार ढांचों में रखा है। इस क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां कारोबार के नए नियमों को लेकर चिंतित हैं, जिनका अनुपालन उन्हें करना है। इसमें छोटी औद्योगिक इकाइयों पर छूट सीमा 20 लाख से घटाकर 1.5 करोड़ करने का फैसला और सितंबर से केंद्रीय मूल्य वर्धित कर की वापसी को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाना शामिल है।

उद्योग संगठन लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश मित्तल ने कहा, ‘हम इन नियमों के बारे में सरकार से बातचीत कर रहे हैं, जिन्हें जल्द से जल्द अंतिम रूप दिए जाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा, ‘खासकर अनुपालन मानक बहुत कड़े हो रहे हैं और इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पहली बार कर के दायरे में आ रहा है।’

इस समय सरकार ऐसी इकाइयोंं को सूक्ष्म उद्योग मानती है, जिनके संयंत्र व मशीनरी पर 25 लाख रुपये से कम निवेश हुआ हो। लघु और मझोले उद्योगोंं में वे निवेश आते हैं जिनमें क्रमश: 5 करोड़ व 10 करोड़ रुपये का निवेश किया गया हो। स्टॉक ट्रांसफर पर कर लगाए जाने के प्रावधान का एमएसएमई विरोध कर रहे हैं, जिनकी शिकायत है कि इससे कार्यशील पूजी पर असर होगा। 

बुलेट ट्रेन के लिए शिलान्यास सितंबर माह तक

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नई दिल्ली। भारत में बुलेट ट्रेन को वास्तविक धरातल पर जाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार इस साल सितंबर में पहला कदम बढ़ा सकती है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना के मुंबई में भूमि पूजन और शिलान्यास के दौरान मोदी के साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी शामिल हो सकते हैं। इस परियोजना की लागत 97,636 करोड़ रुपये आने का अनुमान है।

हिंदू परंपरा के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करने से पहले धरती माता के सम्मान और उनके आशीर्वाद के लिए भूमि पूजन किया जाता है।
 हालांकि भारत में सभी बड़ी परियोजनाओं में ऐसी परंपरा रही है लेकिन यह पहला मौका होगा जब इस तरह के आयोजन में कोई वैश्विक नेता शिरकत करेंगे।

 भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम सितंबर में हो सकता है। हालांकि अभी इसकी तिथि तय नहीं है। LEN-DEN NEWS ने इस परंपरा के बारे में एक पुजारी से बात की, तो उन्होंने कहा कि इमारत आदि बनाने से पहले संगठन के वरिष्ठ सदस्यों या परिवार के मुखिया द्वारा यह अनुष्ठान  किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार भी इसी भारतीय परंपरा का पालन कर सकती है।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को 2023-24 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फरवरी 2016 में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना के विकास के लिए विशेष उद्देश्य वाली कंपनी नैशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लि. का गठन किया था। जापान सरकार ने इस परियोजना की लागत का 81 फीसदी तक कर्ज 0.1 फीसदी सालाना ब्याज पर उपलब्ध कराने की सहमति जताई है।

यह कर्ज 50 वर्षों के लिए दिया जाएगा, जिसमें शुरुआती 15 साल कर्ज पुनर्भुगतान में छूट दी जाएगी। इस परियोजना में 50 फीसदी हिस्सेदारी रेल मंत्रालय और 25-25 फीसदी हिस्सेदारी महाराष्ट्र और गुजरात सरकार की होगी। यह ट्रेन जापानी शिंकेंसेन हाई स्पीड तकननीक पर आधारित होगी। शिंकेंसन जापान में तेज रफ्तार रेल लाइनों का नेटवर्क है और सुरक्षा तथा सुविधा के लिए यह दुनिया भर में जाना जाता है।

रफ्तार बढ़ाने के लिए भारतीय रेल बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत हाई स्पीड ट्रेन, सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के परिचालन के साथ ही मौजूदा ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की योजना भी शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर के अलावा, पांच अन्य गलियारों पर भी काम होगा। इन गलियारों में ट्रेनों की रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। 

मोबाइल कंपनियों ने रोका 1000 करोड़ का निवेश

नई दिल्ली। जीएसटी रिजीम में ड्यूटी को लेकर चीजें साफ नहीं होने के कारण हैंडसेट मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में 1,000 करोड़ से भी ज्यादा का निवेश अटका पड़ा है। दरअसल, हैंडसेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स और कंपोनेंट मेकर्स को जीएसटी के तहत लोकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए ड्यूटी में रियायतों को लेकर स्पष्टीकरण का इंतजार है, जिसे 1 जुलाई से लागू किया जाना है।

ओपो, विवो, माइक्रोमैक्स और लावा के अलावा फॉक्सकॉन, फ्लेक्स और आईफोन बनाने वाली इकाई विस्ट्रॉन कॉर्प जैसे इंटरनैशनल इनवेस्टर्स के लिए ड्यूटी में रियायतों का जारी रहना बेहद जरूरी है, ताकि वो मेक इन इंडिया अभियान में शिरकत कर सकें।

इस बीच, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के लागू होने के मद्देनजर फॉक्सकॉन जैसी मैन्युफैक्चरर और कुछ हैंडसेट कंपनियां जून में अपने प्रॉडक्शन में 40 फीसदी तक कटौती करने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ कंपनियों की योजना कंपोनेंट सप्लाई को रोकने की है, ताकि तैयार माल की इनवेंटरी को कम किया जा सके।

इंडियन सेल्युलर असोसिएशन के प्रेसिडेंट पंकज महेंद्रू ने LEN_DEN NEWS को बताया, ‘1,000 करोड़ से भी ज्यादा के इनवेस्टमेंट अटके पड़े हैं और इस निवेश को ड्यूटी डिफरेंशियल या जीएसटी के तहत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाए जाने के बारे में चीजें साफ होने का इंतजार है।’ यह असोसिएशन एपल, सैमसंग और माइक्रोमैक्स समेत तमाम हैंडसेट कंपनियों की नुमाइंदगी करती है।

मोबाइल फोन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने जाने के सरकार के कदम से लोकल स्तर पर तैयार फोन की कीमतें 4-5 फीसदी बढ़ जाएंगी और यह इंपोर्टेड फोन की कीमत के बराबर हो जाएगी। लिहाजा, डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग का फायदा खत्म हो जाएगा, जो मौजूदा ड्यूटी डिफरेंशियल स्ट्रक्चर के कारण मिलता है।

असोसिएशन ने 5,000 रुपये से कम के फोन को जीएसटी से छूट मुहैया कराने या इन पर 5 फीसदी जीएसटी मुहैया कराने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री से दखल की मांग की है, ताकि ऐसे फोन की कीमत कम रखी जा सके। असोसिएशन का कहना है कि बाकी फोन के लिए 12 फीसदी जीएसटी की दर रखी जा सकती है।

असोसिएशन ने मिनिस्ट्री को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए ‘पार्ट्स’ की भी परिभाषा तय करने को कहा है, जिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि सब-पार्ट्स को भी 12 फीसदी की टैक्स सीमा के दायरे में रखा जाना चाहिए। सरकार ने जहां इंडस्ट्री को अपने सहयोग का आश्वासन दिया है, वहीं इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।’

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईट मिनिस्ट्री में एडिशनल सेक्रेटरी अजय कुमार ने बताया, ‘मेक इन इंडिया बेहद अहम प्रोग्राम है और पिछले 2.5 साल में इसने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि रफ्तार सुस्त नहीं पड़े।’ जीएसटी के 1 जुलाई से लागू होने से ज्यादातर फोन की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।

ग्राहकों से सेवा शुल्क वसूली पर आरबीआई सख्त

  • ग्राहकों को भगाने के लिए सेवा शुल्क का सहारा ले रहे हैं बैंक
  • पर्यवेक्षी समीक्षा में होगा शिकायतों पर गौर
  • बैंक खाता संख्या पोर्टेबिलिटी शुरू करने की वकालत
  • ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए धोखाधड़ी, साइबर हमलों के मामले में जल्द दिशानिर्देश

मुंबई। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा ने आज कहा कि कुछ बैंक खातों में न्यूनतम औसत राशि रखने और अन्य सुविधाएं देने में शुल्क के बहाने ग्राहकों को उनकी कुछ सेवाएं लेने से रोक रहे हैं। उन्होंने साथ ही आधार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के विभिन्न प्लेटफॉर्म के जरिये बैंक खाता संख्या पोर्टेबिलिटी शुरू करने की वकालत की।

डिप्टी गवर्नर ने एक कार्यक्रम में कहा कि बैंकों को न्यूनतम औसत शेष या प्रमुख सेवाओं के लिए शुल्क तय करने की आजादी है, लेकिन आम आदमी को बैंकिंग सुविधाओं से वंचित करने के लिए इनको बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कुछ संस्थानों में ऐसा देखने को मिला है। ज्यादातर बैंकों ने खाते में न्यूनतम तय राशि नहीं रखने पर शुल्क लेना शुरू किया है। साथ ही वे बैंकिंग संबंधित सुविधाओं के लिए शुल्क ले रहे हैं। 

मूंदड़ा ने कहा कि बैंकों द्वारा चुनिंदा सेवाओं के लिए शुल्क लेने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन नियमों को इस तरीके से डिजाइन न किया जाए कि ग्राहक सुविधाओं से वंचित हो जाएं। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की चिंता सभी लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित है। केंद्रीय बैंक यह नहीं देख रहा कि ग्राहकों को ये सुविधाएं देने के लिए बैंक कितना शुल्क लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2016-17 की पर्यवेक्षी समीक्षा में बैंकों द्वारा ग्राहकों से ज्यादा सेवा कर वसूलने और गलत ढंग से वित्तीय उत्पादों जैसे म्युचुअल फंड, बीमा पॉलिसी और रिटेल बॉन्ड बेचने की शिकायतों पर गौर किया जाएगा। डिप्टी गवर्नर ने कहा कि पिछले दो साल में आधार नामांकन हुआ है, एनपीसीआई ने प्लेटफॉर्म बनाया है। बैंकिंग लेनदेन के लिए कई ऐप शुरू किए गए हैं।

ऐसे में खाता संख्या पोर्टेबिलिटी की भी संभावना बनती है। खाता संख्या पोर्टेबिलिटी शुरू होने के बाद कुछ नहीं बोलने वाला ग्राहक बैंक से बात किए बिना दूसरे बैंक के पास चला जाएगा। मूंदड़ा ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में बैंक बैंकिंग कोड्स ऐंड स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा डिजाइन आचार संहिता का पालन नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने साथ ही कहा कि धोखाधड़ी के जरिये होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए जल्दी ही अंतिम दिशा निर्देश किया जाएगा। इन नियमों में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में ग्राहकों की देनदारी को सीमित रखने का प्रावधान किया जा सकता है।

केंद्रीय बैंक ने पिछले साल अगस्त में इस बारे में नियमों के मसौदे को सार्वजनिक किया था और उस पर सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की गई थीं। मूंदड़ा ने कहा कि हाल के वर्षों में बैंकिंग सेवाओं के मामले में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी सामने आए हैं।

ये जोखिम कई चर्चित साइबर धोखाधड़ी हमलों, व्यक्तिगत सूचनाओं की चोरी व एटीएम धोखाधड़ी और इंटरनेट बैंकिंग घपलों के रूप में सामने आए हैं। मूंदड़ा ने कहा कि इसके अंतिम दिशानिर्देशों में धोखाधड़ी वाले लेनदेन की जानकारी देने की समयसीमा, अवैध लेनदेन के मामले में ग्राहक द्वारा वहन की जाने वाली देनदारी और इस तरह की घटनाओं में बैंकों की जवाबदेही के बारे में स्पष्ट तौर पर जिक्र होगा।

एसएमएस के माध्यम से जोड़ें आधार को पैन से

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने करदाताओं को एसएमएस सुविधा का उपयोग कर आधार संख्या को पैन से लिंक करने के लिए कहा है। देश के प्रमुख समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों में विभाग ने एसएमएस के माध्यम से आधार और पैन को आपस में लिंक करने की जानकारी दी है।

इसके लिए किसी व्यक्ति को अपने फोन से बड़े अक्षरों में यूआईडीपीएएन के बाद खाली जगह छोड़कर अपनी आधार संख्या और फिर उसके बाद अपनी पैन संख्या को लिखकर 567678 या 56161 को एसएमएस भेजना होगा। इसके अलावा विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाकर भी इनको आपस में लिंक किया जा सकता है।

आयकर विभाग ने हाल में शुरू की थी ई-फैसेलिटी सर्विस
आयकर विभाग ने PAN के साथ आधार को लिंक करने की नई ई-फैसेलिटी हाल में शुरू की थी। इसके लिए विभाग ने ई-फाइलिंग वेबसाइट पर होम पेज पर नया लिंक https://इन्कमटैक्सइंडिएफिलिंग.गॉव.इन दिया है। लिहाजा अब किसी भी इनडिविजुअल को दोनों यूनिक आइडेंटिटीज को आपस में लिंक करना आसान हो जाएगा।

ये हैं आधार और PAN को आपस में लिंक करने का तरीका
इसके लिए सबसे पहले ई-फाइलिंग वेबसाइट के होमपेज पर दिए गए इस लिंक को क्लिक करना होगा। नया पेज खुलने के बाद इसमें अपने आधार नंबर और पैन नंबर के साथ आधार कार्ड के हिसाब से अपने नाम की डिटेल देनी होगी। इन सबके बाद यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा इस डिटेल का वेरिफिकेशन किया जाएगा। सब सही मिलता है तो आधार और पैन कार्ड का लिंक कंफर्म कर दिया जाएगा।