अप्रैल में सर्विस सेक्टर में जोरदार तेजी, PMI 5 महीने के टॉप पर

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नई दिल्ली। Services PMI India: सर्विस सेक्टर की ग्रोथ को लेकर बड़ा बूस्ट देखने को मिला है। बुधवार को जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग, ई-कॉमर्स गतिविधियों में तेजी और नए ऑर्डर्स में सुधार के चलते अप्रैल में भारत की सर्विस सेक्टर की गतिविधियां पांच महीनों टॉप पर पहुंच गईं। सीजनली एडजस्टेड इंडेक्स मार्च के 57.5 के 14 महीने के निचले स्तर से बढ़कर अप्रैल में 58.8 पर पहुंच गया।

सर्वे के मुताबिक, यह दमदार ग्रोथ मजबूत घरेलू मांग, नए ऑर्डर्स, प्रतिस्पर्धी कीमतों और ई-कॉमर्स गतिविधियों में तेजी के चलते हुई, जबकि पश्चिम एशिया युद्ध के चलते निर्यात ग्रोथ कमजोर रही और लागत का दबाव ऊंचा बना रहा।

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, “भारत का सर्विसेज PMI अप्रैल में बढ़कर पांच महीने के टॉप 58.8 पर पहुंच गया। गतिविधियों और नए ऑर्डर्स में मजबूती आई, हालांकि नए निर्यात ऑर्डर्स में नरमी रही। इससे संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच मांग विदेशी बाजारों से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर शिफ्ट हो रही है।

इनपुट लागत महंगाई में कुछ कमी आई, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि आउटपुट प्राइस महंगाई सीमित रही। इसका मतलब है कि कुछ कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालने के बजाय खुद वहन कर रही हैं। भारत का कंपोजिट PMI भी मार्च के 57.0 से बढ़कर अप्रैल में 58.2 हो गया, जो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों क्षेत्रों में नई मजबूती का संकेत देता है।”

घरेलू मांग ने कमजोर निर्यात की भरपाई की
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स की जगह घरेलू सप्लायर्स की ओर बढ़ते रुझान ने अप्रैल में ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को बढ़ावा दिया। हालांकि भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर रही। सीजनली एडजस्टेड न्यू एक्सपोर्ट बिजनेस इंडेक्स पांच अंकों से अधिक गिरकर एक साल से ज्यादा समय के दूसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कंपनियों ने इस गिरावट के लिए पश्चिम एशिया संघर्ष और कमजोर इनबाउंड टूरिज्म को जिम्मेदार ठहराया।

लागत दबाव में हल्की राहत
सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने अप्रैल में ऑपरेटिंग खर्च में तेज बढ़ोतरी दर्ज की। हालांकि मार्च के मुकाबले इनपुट लागत महंगाई में कमी आई, लेकिन यह नवंबर 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में बनी रही। खाद्य पदार्थों, विशेषकर खाद्य तेल, अंडे, गैस की कमी, मांस और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के साथ गैस और श्रम लागत बढ़ने से कुल खर्च बढ़ा।

लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने इसका केवल एक हिस्सा ही ग्राहकों पर डाला। आउटपुट चार्ज तीन महीनों की सबसे धीमी गति से बढ़े, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ कंपनियां बढ़ी हुई लागत खुद वहन कर रही हैं। इनपुट और आउटपुट कीमतों में सबसे ज्यादा महंगाई उपभोक्ता सेवाओं, ट्रांसपोर्ट, सूचना और संचार क्षेत्रों में देखी गई।

हालांकि सर्विस सेक्टर की कंपनियां भविष्य को लेकर पॉजिटिव रहीं, लेकिन मार्च के मुकाबले कुल कारोबारी भरोसे में कुछ कमजोरी आई। सर्वे में शामिल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष और लगातार ऊंची लागत को भविष्य के लिए प्रमुख जोखिम बताया।

नए कारोबार से हायरिंग में तेजी
नए कारोबार में मजबूती के चलते वित्त वर्ष की पहली तिमाही की शुरुआत में भर्ती गतिविधियों में तेजी आई। काम का दबाव बढ़ने के कारण कंपनियों ने शॉर्ट-टर्म स्टाफ और जूनियर लेवल कर्मचारियों की नियुक्तियां बढ़ाईं। सर्वे में शामिल सेवा अर्थव्यवस्था के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा। लगातार भर्ती के चलते चार महीनों में पहली बार लंबित काम के बोझ में कमी आई, हालांकि इसकी रफ्तार सीमित रही।

कंपोजिट PMI में भी मजबूती
HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मार्च के 57.0 से बढ़कर अप्रैल में 58.2 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों क्षेत्रों में सुधार के कारण निजी क्षेत्र का उत्पादन तेजी से बढ़ा। कंपोजिट स्तर पर इनपुट कीमतों की महंगाई मार्च से कम हुई, लेकिन अगस्त 2023 के बाद यह अब भी दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर रही। वहीं बिक्री कीमतों में वृद्धि तीन महीनों की सबसे धीमी गति से हुई।