कोटा। जब सुसज्जित बग्गियों पर सवार दूल्हे-दुल्हन भगवान परशुराम की भव्य झांकी के साथ नगर की गलियों से गुजरे, तो राहगीर ठिठककर देखते रह गए। यह दृश्य था आध्या सेवार्थ फाउण्डेशन के तत्वावधान में आयोजित प्रथम सनाढ्य आदिगौड़ सामूहिक निःशुल्क कन्या विवाह महोत्सव का, जो दो दिवसीय आयोजन के बाद हर्षोल्लास एवं घर जैसे पारिवारिक वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
मुख्य संयोजक लोकेश शर्मा ने बताया कि वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार 8 जोड़ों का विधिवत पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ और नवदंपतियों ने जीवन भर साथ निभाने का पवित्र वचन लिया। मुख्यअतिथि खाटू श्याम बाबा रहे उनका विशाल दरबार सजा। महंत सत्यप्रकाश बनखण्डी ने नव वरवधुओं आशीर्वाद दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौत्तम ने नव जोडो को अपनी शुभकामनाएं दी।
नगर भ्रमण बना आकर्षण का केंद्र
मुख्य संयोजक शर्मा ने बताया कि भगवान परशुराम की भव्य झांकी के साथ निकली इस बारात ने नगर के मार्गों पर एक अलग ही उत्सव का माहौल रच दिया। नगरवासी इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। शोभायात्रा के पश्चात दूल्हों ने तोरण मारकर मंगल प्रवेश किया और वरमाला की पावन रस्म के साथ अपने जीवनसाथी का चयन किया।
खाटू श्याम के दरबार में लिए सात फेरे
फाउण्डेशन के कोषाध्यक्ष प्रियांशु शर्मा ने बताया कि आयोजन स्थल पर खाटू श्याम का भव्य दरबार सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ 8 जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। अग्नि के सात फेरों के साथ प्रत्येक जोड़े ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन पर्यंत साथ चलने की शपथ ली। वातावरण में गूंजते मंगलाष्टक और आशीर्वाद के बीच यह क्षण अत्यंत भावुक और पवित्र रहा।
गृहस्थी का सामान दिया फाउण्डेशन ने
फाउण्डेशन की अध्यक्ष शालू शर्मा ने बताया कि प्रत्येक वधू को सोने की लौंग, चांदी की पाजेब, बिछिया, अंगूठी और टॉप्स सहित आभूषण भेंट किए गए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक नवदंपती को अलमारी, पंखा, टीवी, ड्रेसिंग टेबल, गद्दा, तकिया, बेडशीट, सूटकेस, दीवार घड़ी, सेंटर टेबल, कुर्सी, डिनर सेट, गैस चूल्हा एवं संपूर्ण रसोई सामग्री सहित 120 से अधिक उपयोगी उपहार प्रदान किए गए। दूल्हे के लिए कोट-पैंट और दुल्हन के लिए बेस व चूड़ा भी समिति की ओर से उपलब्ध कराया गया। आयोजन समिति ने यातायात सुरक्षा का संदेश देते हुए नवदंपतियों को हेलमेट भेंट कर यातायात नियमों के पालन का संकल्प भी दिलाया।
नई उम्मीदों के साथ रुखसत हुईं बेटियां
ओमप्रकाश टंकारिया ने बताया कि महोत्सव का सबसे भावपूर्ण क्षण था विदाई का। जब नवविवाहिताएं अपने माता-पिता और परिजनों से गले मिलकर अश्रुपूरित नेत्रों से रुखसत हुईं, तो उपस्थित जनसमूह की आंखें भी नम हो गईं।

