ईरान-इजरायल युद्ध से गैस कीमतों में 50% का इजाफा, LPG की सप्लाई संकट में

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नई दिल्ली। ईरान में हुए अमेरिका और इजरायल के हुए संयुक्त हमले के बाद दुनिया भर में नया संकट खड़ा हो गया है। भारत भी इस युद्ध से प्रभावित हो रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। जिसके बाद से ही एनर्जी सेक्टर में एक नई समस्या को जन्म दे दिया है।

अगर यह युद्ध लम्बा चल गया तब की स्थिति में एलपीजी की बड़ी समस्या देश के अंदर खड़ी हो सकती है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति के लिए नए विकल्प खोजने होंगे।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट अनुसार यूरोपियन गैस की कीमतों में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ईरान-अमेरिका युद्ध का सबसे बड़ा असर एलपीजी पर पड़ेगा। भारत अरब देशों से अपनी कुल एलपीजी आपूर्ति का 80 से 85 प्रतिशत इंपोर्ट करता है।

यह सभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। ऐसे में भारत के सामने एलपीजी की समस्या खड़ी है। कच्चे तेल की तरह भारत के पास एलपीजी का बड़ा रिजर्व नहीं है। ऐसे में एलपीजी के लिए कोई समस्या ना खड़ी हो इसके लिए जरूरी है कि आपूर्ति समय से हो।

एलपीजी की तरह ही एलएनजी के लिए भी कोई बड़ा रिजर्व नहीं है। मौजूदा समय में देश अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत एलएनजी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते मंगाता है। ऐसे में एलपीजी और एलएनजी के लिए जल्द ही भारत को नए विकल्प खोजने होंगे।

ईरान के ड्रोन अटैक के बाद कतर ने दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी एक्सपोर्ट सेंटर पर प्रोडक्शन रोक दिया है। मौजूदा समय में कतर दुनिया का 5वां सबसे बड़ा एलएनजी प्रोडक्शन करने वाला देश है। ऐसे में प्रोडक्शन में गिरावट का बुरा असर आपूर्ति पर पड़ेगा।

भारत को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति के लिए तत्काल कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा समय में देश के पास 70 से 80 दिन का रिजर्व है। पिछले महीने भारत ने सउदी अरब से जमकर कच्चा तेल खरीदा था।

लेकिन ईरान युद्ध की वजह से उपजे नए हालात के बाद भारत, अमेरिका, रूस और अन्य देशों को ज्यादा प्राथमिकता दे सकता है। बता दें, ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की उम्मीद की जा रही है। आने वाले समय में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल हो सकता है।

मंत्रालय ने बुलाई आनन-फानन में बैठक
इस पूरे मामले पर सरकार की तरफ से काफी सक्रियता दिखाई जा रही है। सोमवार को पेट्रोलियम डिपार्टमेंट की तरफ से आनन-फानन में एक बड़ी बैठक बुलाई गई। सरकार स्थितियों के आकलन में जुटी है। साथ ही नए विकल्प तलाश रही है।