बांग्लादेश के नए पीएम रहमान हिंदुओं पर क्या बोले, जानिए उनके विचार

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ढाका। बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शपथ लेकर प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। इसके साथ ही बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का शासन खत्म हो गया है।

जहां एक तरफ यूनुस के राज में बांग्लादेश में अराजकता और भीड़ तंत्र पूरी तरह हावी रहा, वहीं दूसरी तरफ पीएम पद की जिम्मेदारी संभालते ही तारिक रहमान ने बड़ा बयान दिया है। रहमान ने कहा है कि उनकी सरकार देश को सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित बनाएगी, चाहे वे किसी भी पार्टी, मत, धर्म या जातीयता के हों।

इससे पहले रहमान ने बीते मंगलवार को 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी BNP को भारी बहुमत मिला।

पदभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्र को दिए गए अपने पहले टेलीविजन भाषण में, 60 वर्षीय रहमान ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुधारना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री रहमान ने कहा, ”हम इस देश को हर नागरिक के लिए सुरक्षित बनाना चाहते हैं। मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, ईसाई। चाहे किसी पार्टी, धर्म, मत या जातीयता को मानने वाले हों। चाहे पहाड़ों में हों या मैदानों में-यह देश हम सभी का है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चाहे लोगों ने बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) या ना दिया हो, सरकार पर सभी का बराबर अधिकार है। उन्होंने कहा, “एक बांग्लादेशी के रूप में हम सभी को इस देश में समान अधिकार प्राप्त हैं।”

रहमान की बहुलतावादी समाज पर की गई यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद देश में हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया गया है। अंतरिम सरकार के शासनकाल में भीड़ हिंसा के साथ साथ अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की कई खबरें सामने आईं।

हिंदुओं पर लगातार अत्याचार
मानवाधिकार संगठन एमएसएफ (मनवाधिकार संघर्षकृति फाउंडेशन) ने जनवरी 2026 में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की 21 और मारपीट की 28 घटनाएं दर्ज की है। वहीं, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने 2025 में 522 सांप्रदायिक हमले दर्ज किए, जिनमें हत्याएं, बलात्कार और मंदिरों में तोड़फोड़ शामिल हैं। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदाय के 116 लोग मारे गए जिनमें अधिकांश हिंदू हैं।