ऊंची वैश्विक कीमतों से खाद्य तेल आयात 10 फीसदी घटा, वनस्पति तेल बढ़ा

0
9

नई दिल्ली। भारत का कुल वनस्पति तेल आयात नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान 8% बढ़कर 65.72 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 60.97 लाख टन था। हालांकि मार्च 2026 में खाद्य तेल आयात फरवरी की तुलना में 10% घटकर 11.73 लाख टन रह गया, जिससे संकेत मिलता है कि ऊंची वैश्विक कीमतों, रुपये की कमजोरी और घरेलू सरसों फसल की बेहतर उपलब्धता के कारण आयातकों ने खरीद धीमी कर दी है।

इस अवधि में पाम तेल आयात तेज़ी से बढ़कर 34.50 लाख टन हो गया, जबकि सॉफ्ट ऑयल (सोया व सूरजमुखी) आयात घटकर 30.03 लाख टन रह गया। पाम तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 53% हो गई, जो पिछले साल 41% थी। इंडोनेशिया और मलेशिया भारत के प्रमुख पाम तेल आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं, जबकि अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोया एवं सूरजमुखी तेल की निर्भरता जारी है।

सरकार की ड्यूटी अंतर नीति का बड़ा असर रिफाइंड तेल आयात पर दिखा है। नवंबर-मार्च के दौरान रिफाइंड पाम तेल आयात घटकर केवल 1.92 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 9.52 लाख टन था। इसके विपरीत क्रूड तेल आयात बढ़कर 62.60 लाख टन पहुंच गया, जिससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को मजबूती मिली है और रिफाइंड तेल आयात का अनुपात 16% से घटकर केवल 3% रह गया।

नेपाल से रिफाइंड तेल आयात लगातार बढ़ रहा है। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच नेपाल ने भारत को करीब 1.62 लाख टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें अधिकांश हिस्सा सोया तेल का रहा। यह प्रवृत्ति घरेलू रिफाइनरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही है।

1 अप्रैल 2026 तक देश में कुल खाद्य तेल स्टॉक बढ़कर 18.98 लाख टन हो गया, जो पिछले महीने से 28,000 टन अधिक है। पर्याप्त स्टॉक और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए निकट अवधि में आयात दबाव सीमित रह सकता है।

हालांकि भारत की खाद्य तेल सुरक्षा अभी भी वैश्विक आपूर्ति, भू-राजनीतिक तनाव और मौसम जोखिमों पर निर्भर बनी हुई है, इसलिए दीर्घकाल में घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाना और आयात स्रोतों का विविधीकरण जरूरी होगा।