Wednesday, April 15, 2026
Home Blog Page 6

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकेगी यूएस नेवी, डोनाल्ड ट्रंप का आदेश

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किया जाएगा। ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को तत्काल रोकने आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में यातायत की पूरी तरह से नाकेबंदी की जाएगी।

ट्रंप का यह आदेश इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की सीजफायर समझौते पर बातचीत फेल होने के बाद आई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के अलावा ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन गई थी।

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार शाम को कहा है कि अमेरिकी नेवी तत्काल प्रभाव से अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या उससे बाहर निकलने की कोशिश करने वाले जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल लगाने की चर्चा है। ऐसे में इसे ईरान को जहाजों से फीस लेने से रोकने के कदम की तरह देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का ब्लॉकेड तुरंत प्रभावी होगा। दुनिया में सबसे बेहतरीन यूनाइटेड स्टेट्स की नेवी को मैंने यह निर्देश दिया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसे हर जहाज को खोजे और रोके, जिसने ईरान को कोई फीस दी हो। ऐसे जहाज को खुले समुद्र में सुरक्षित मार्ग नहीं मिलेगा।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के एक बड़े हिस्से की एनर्जी सप्लाई के लिए अहम समुद्री रूट है। अमेरिका औरइजरायल के28 फरवरी को किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने इस समुद्री गलियारों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को काफी परेशान किया है। ट्रंप ने बार-बार इस मुद्दे पर बयान दिए हैं और ईरान को धमकियां भी दी हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के ताजा गुस्से की वजह ईरान का होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से फीस लेने का फैसला है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रविवार को बताया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन 10 जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का फैसला लिया है। इसके लिए ईरान एक जहाज से दो मिलियन डॉलर की फीस लेगा।

ईरान की योजना है कि होर्मुज स्ट्रेट जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर सुपरटैंकर से ली जाने वाली फीस 20 लाख डॉलर रखी जाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल कई देशों के जहाजों की ओर से होर्मुज से गुजरने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संपर्क किया गया है। इस पर ट्रंप भड़क गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट चर्चा में क्यों
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का महत्वपूर्ण समुद्री रूट और रणनीतिक तेल चोकपॉइंट है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इससे दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का तकरीबन 25 फीसदी और एलएनजी का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत अहमियतरखता है।

ईरान के करीब होने की वजह से इस परआसानी से कंट्रोल कर सकता है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ऐसा किया है। 28 फरवरी के बाद से ईरान ने इस समुद्री रूट को बाधित किया है। इसके चलते दुनिया के बड़े हिस्से, खासतौर से दक्षिण एशियाई देशों में तेल और गैस का संकट साफ देखा जा रहा है।

जेईई-मेन 2026 अप्रैल सेशन के चार प्रश्नों पर आपत्ति, एक में बोनस अंक की मांग

कोटा। एनटीए द्वारा आयोजित जेईई-मेन अप्रैल सेशन के प्रश्नपत्र, आंसर की और रिकॉर्डेड रेस्पोंस शनिवार देर रात को जारी कर दिए गए। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को आपत्तियां लगाने का भी अवसर दे दिया गया। स्टूडेंट्स ने अपने रिकॉर्डेड रेस्पोंस और आंसर का मिलान किया।

स्टूडेंट्स की कई सवालों पर आपत्तियां भी रही। इन सवालों के जवाबों को लेकर स्टूडेंट्स ने एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट्स से चर्चा की और उसके बाद चार सवालों के जवाब सामने आए जिसमें एनटीए और एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट्स व स्टूडेंट्स की राय भिन्न थी।

एलन कोटा के प्रेसिडेंट विनोद कुमावत ने बताया कि स्टूडेंट्स और एलन एक्सपर्ट्स के अध्ययन के बाद जेईई मेन अप्रैल सेशन की परीक्षाओं में चार सवालों के जवाब ऐसे थे जिनके एलन के जवाब कुछ और थे और एनटीए द्वारा जारी की गई आंसर की में जवाब कुछ और दिए गए हैं।

चार में से एक प्रश्न में बोनस अंक देने की मांग की गई है। कुमावत ने बताया कि एलन एक्सपर्ट्स द्वारा पेपर्स का अध्ययन कर आंसर की तैयार की जा चुकी है और स्टूडेंट्स अपने आंसर का मिलान कर सकते हैं। एनटीए की ओर से जारी नोटिस के अनुसार विद्यार्थी 13 अप्रैल को रात 11.50 बजे तक आंसर की को चैलेन्ज कर सकता है।

इन प्रश्नों में आपत्तियां
जेईई मेन अप्रैल सेशन परीक्षा में 2 अप्रैल को शाम की पारी में कैमिस्ट्री के पेपर में काॅर्डिनेशन टाॅपिक से संबधित प्रश्न में आपत्ति दर्ज कराई गई है। इसी प्रकार 5 अप्रैल को शाम की पारी में मैथ्स के पेपर में डिफरेन्शियल इक्वेशन टाॅपिक से संबंधित प्रश्न में आपत्ति दर्ज कराने के साथ ही इसमें बोनस अंक की मांग की गई है। जबकि 6 अप्रैल को सुबह की पारी में फिजिक्स के पेपर में थर्मोडाइनेमिक्स टाॅपिक एवं कैमिस्ट्री के पेपर में हाइड्रोकाॅर्बन टाॅपिक से संबंधित प्रश्न में आपत्तियां दर्ज कराई है।

एलन शिक्षा संबल की प्रवेश परीक्षा में चयनित छात्रों को मिलेगी नीट की निशुल्क कोचिंग

कोटा। Allen Shiksha Sambal Entrance Exam: एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट एवं एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के संयुक्त तत्वावधान में संचालित एलन शिक्षा संबल कार्यक्रम की पहली प्रवेश परीक्षा रविवार को आयोजित की गई। इस वर्ष यह परीक्षा दो बार ली जा रही है।

न्यास के सदस्य नवीन माहेश्वरी ने बताया कि परीक्षा में शामिल होने का दूसरा अवसर 10 मई को मिलेगा। जो विद्यार्थी किसी कारण से परीक्षा में शामिल नहीं हो सके वो दूसरे चरण की परीक्षा में शामिल होकर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। परीक्षा में वर्ष 2025 व 2026 में 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं।

परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर चयनित 126 विद्यार्थियों को एलन कोटा में नीट-2027 की निशुल्क तैयारी के साथ एल एन माहेश्वरी परमार्थ न्यास की ओर से निशुल्क आवास व भोजन की सुविधा दी जाएगी। इस कार्यक्रम के तीसरे वर्ष के लिए यह परीक्षा है।

माहेश्वरी ने बताया कि सरकारी स्कूलों के हिन्दी माध्यम के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 2024 में यह कार्यक्रम शुरू किया गया था। यह परीक्षा उत्तर भारत के प्रमुख हिन्दी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड एवं उत्तराखंड के कोटा सहित 77 शहरों में आयोजित की गई।

परीक्षा में सफल रहने वाले विद्यार्थियों को कोटा वरीयता क्रम में 81 छात्राएं एवं 45 छात्रों को एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग दी जाएगी, वहीं एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास द्वारा विद्यार्थियों के लिए निशुल्क आवास एवं भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे: शिक्षा मंत्री दिलावर

‘प्रवेशोत्सव’ अभियान के पोस्टर का विमोचन

कोटा। राजस्थान सरकार के महत्वाकांक्षी प्रवेशोत्सव कार्यक्रम को शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा (696 आर) कोटा-बारां द्वारा अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना और नामांकन बढ़ाने के साथ-साथ ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करना है। इसी कड़ी में रविवार को कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रवेशोत्सव अभियान के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने शिक्षा सहकारी, स्काउट-गाइड और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

शिक्षा सहकारी के अध्यक्ष स्काउट गाइड जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत कोटा जिले के विभिन्न ब्लॉकों में पीईईओ स्तर तक व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रवेशोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का एक जनआंदोलन है, जिसमें हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उपाध्यक्ष महेंद्र नागर एवं मंत्री जमनालाल गुर्जर ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में शिक्षा ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा अभिभावकों को बच्चों के नियमित विद्यालय आने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

डायरेक्टर गायत्री मीणा एवं दिनेश कुमार मीणा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों का स्वागत उत्सव के रूप में किया जाएगा, वहीं नामांकन बढ़ाने के लिए घर-घर संपर्क अभियान भी चलाया जाएगा। इसके साथ ही स्काउट-गाइड और एनसीसी कैडेट्स की मदद से रैलियां, जागरूकता कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बने।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री के ओएसडी सतीश गुप्ता, ज्वाइंट डायरेक्टर आशा मंडावत, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल कृष्ण जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा, सीबीईओ गायत्री मीणा, स्नेहलता शर्मा, डायरेक्टर गायत्री मीणा, दिनेश कुमार मीणा, सीओ स्काउट बृज सुंदर मीणा, जिला उप प्रधान विजय माहेश्वरी, डॉ. मुकेश मोहन दाधीच, एनसीसी अधिकारी देवेंद्र गौतम, मनराज गुर्जर, सूरज दारोकर, मदन मोहन सिंह, पुरुषोत्तम मालव, सारिका सक्सेना सहित बड़ी संख्या में स्काउट-गाइड, रोवर-रेंजर एवं एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे।

Cumin Price: मई में चीन और बांग्लादेश की खरीदारी से जीरे में तेजी का अनुमान

नई दिल्ली। Cumin Price: इस हफ़्ते जीरे की कीमतें कम रहीं। हालांकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस सीज़न में घरेलू जीरे का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले कम है, लेकिन प्रोडक्शन सेंटर्स में अच्छी आवक और एक्सपोर्टर्स की कम डिमांड की वजह से स्पॉट मार्केट में कीमतें 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम कम थीं। सूत्रों का कहना है कि अभी कीमतों में कोई बड़ी तेज़ी की उम्मीद नहीं है, क्योंकि इस हफ़्ते राजस्थान के मार्केट में नए जीरे की आवक ज़ोरों पर होने की उम्मीद है। गुजरात के मार्केट में भी आवक अच्छी हो रही है। आवक कम होने पर कीमतों में सुधार होना तय है।

गुजरात और राजस्थान जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में इस साल 11.18 लाख हेक्टेयर में जीरा बोया गया, जबकि पिछले साल 11.71 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। बुआई के बाद मौसम भी फसल के लिए खराब रहा। इसलिए, इस सीजन में घरेलू जीरा प्रोडक्शन 88 से 90 लाख बैग के बीच रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 97 से 98 लाख बैग का प्रोडक्शन हुआ था। ट्रेड अनुमान बताते हैं कि गुजरात में जीरा प्रोडक्शन 32 से 35 लाख बैग के आसपास रहेगा, जबकि राजस्थान में यह 52 से 55 लाख बैग के आसपास रहने की उम्मीद है।

अभी, नए जीरे की रोज़ाना आवक 80,000 से 85,000 बैग है, जो इसका मुख्य उत्पादक राज्य गुजरात है, जिसमें अकेले ऊंझा मार्केट में 45,000 से 50,000 बैग की आवक होती है। वहीं, राजस्थान के मार्केट में रोज़ाना की एवरेज आवक 50,000 से 55,000 बैग चल रही है। राजस्थान के एक बड़े मार्केट मेरटा में अभी आवक 18,000 से 20,000 बैग है। आवक में देरी के कारण, इस साल अप्रैल महीने में राजस्थान के मार्केट में इनकमिंग सप्लाई का दबाव बना रहने की उम्मीद है।

कमज़ोर डिमांड और बढ़ती आवक के कारण, इस हफ़्ते जीरे की कीमतों में 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट देखी गई। गुजरात के बाज़ारों में, क्वालिटी के आधार पर जीरे की कीमतें अभी 185 से 220 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बताई जा रही हैं। राजस्थान के बाज़ारों में औसत क्वालिटी वाले जीरे की कीमत 190-225 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। अभी, जीरे की एक्सपोर्ट कीमत 4,250 रुपये प्रति 20 किलोग्राम बताई जा रही है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीरे की मौजूदा कीमतों में ज़्यादा गिरावट की उम्मीद कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आने वाले दिनों में मार्केट में जीरे की रोज़ाना आवक कम होने की उम्मीद है। इसके उलट, अप्रैल और मई के महीनों में चीन और बांग्लादेश की खरीदारी बढ़ने का अनुमान है। इसलिए, आने वाले समय में जीरे की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।

निर्यात: मौजूदा सीज़न (2025-26) के दौरान, जीरे के एक्सपोर्ट में 15 परसेंट की गिरावट आई है; इसके अलावा, कम एक्सपोर्ट रियलाइज़ेशन के कारण रेवेन्यू में 28 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है। स्पाइसेस बोर्ड द्वारा जारी डेटा के अनुसार, मौजूदा सीज़न (अप्रैल 2025 जनवरी 2026) के पहले 10 महीनों के दौरान कुल 166,878 टन जीरे का एक्सपोर्ट हुआ, जिससे 3,885.33 रुपये करोड़ का रेवेन्यू मिला।

इसकी तुलना में, पिछले साल इसी समय के दौरान, जीरे का एक्सपोर्ट 197,050 टन था, जिससे 5,386.32 रुपये करोड़ का रेवेन्यू मिला था। साल 2024-25 में, कुल जीरे का एक्सपोर्ट 229,881 टन था। जीरे के एक्सपोर्ट का रिकॉर्ड साल 2020-21 में बना था, जब शिपमेंट 298,423 टन तक पहुंच गया था।

गायिका आशा भोसले 92 वर्ष की उम्र में दुनिया से अलविदा, अंतिम संस्कार कल

मुंबई। Singer Asha Bhosle is no more: मशहूर गायिका आशा भोसले हमारे बीच नहीं रहीं। 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है। करीब सात दशक तक सिनेमाई दुनिया में अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाने वाली गायिका को कल शनिवार को तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज यूनिट में उनका उपचार चल रहा था। दुनियाभर के फैंस दुआएं कर रहे थे। मगर, रविवार को गायिका ने दुनिया को अलविदा कह दिया। आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने इस खबर की पुष्टि की है।

बॉलीवुड में पहला गाना 1948 में गाया था
8 सितंबर 1933 को आशा भोसले का जन्म एक संगीत से जुड़े परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक एक्टर और क्लासिकल सिंगर थे। आशा भोसले स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। आशा भोसले जब नौ साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी फैमिली पुणे से कोल्हापुर और बाद में मुंबई आ गई। बड़ी बहन लता मंगेशकर के पद चिन्हों पर चलते हुए वह भी संगीत की दुनिया में आईं। आशा भोसले ने पहला गीत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) में ‘चला चला नाव वाला’ गाया था। जबकि बॉलीवुड में उनका पहला गाना ‘चुनरिया (1948)’ फिल्म में ‘सावन आया’ था। यहां से शुरू हुआ संगीत और गीतों का सफर पांच दशक से ज्यादा समय तक चला और आशा भोसले देखते-देखते भारतीय संगीत की दिग्गजों में शामिल हो गईं।

आशा भोसले की नेटवर्थ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आशा भोसले की अनुमानित कुल संपत्ति 150 से 200 करोड़ रुपये के बीच है। उनकी कमाई का मुख्य जरिया उनका ऐतिहासिक गायन करियर, रॉयल्टी और दशकों से चले आ रहे हिट एल्बम रहे हैं। आशा भोसले ने ना केवल सुरों से जादू बिखेरा बल्कि कारोबार की दुनिया में भी सफल रही हैं। उन्होंने दुनियाभर में Asha’s’ (आशाज) नाम से एक अंतरराष्ट्रीय डाइनिंग ब्रांड शुरू किया है। इसकी शुरुआत साल 2002 में दुबई से हुई थी। आज इसके रेस्तरां दुबई के अलावा कुवैत, बहरीन, अबू धाबी के साथ-साथ ब्रिटेन के बर्मिंघम और मैनचेस्टर जैसे शहरों में भी स्थित हैं। मिडिल ईस्ट और यूके में लगभग 14 आउटलेट संचालित हैं।

कल होगा अंतिम संस्कार
आशा भोसले का अंतिम संस्कार कल सोमवार को होगा। गायिका का पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे लोअर परेल में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यही वही जगह है, जहां उनकी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था।

यूएस-ईरान की समझौता वार्ता विफल, शेयर बाजार में सोमवार को आ सकता है भूचाल

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। इसका नकारात्मक असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार भारी गिरावट के साथ खुल सकता है। इस हफ्ते निवेशकों की नजर युद्ध के हालातों के साथ-साथ महंगाई के आंकड़ों और बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी।

अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं, तो सोमवार की सुबह आपके लिए उथल-पुथल भरी हो सकती है। पश्चिम एशिया से आ रही खबरों ने भारतीय बाजार में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। अब विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर सोमवार को बाजार खुलते ही देखने को मिल सकता है।

रविवार को ईरान की ओर से आए बयान ने साफ कर दिया कि कूटनीति की राह इतनी आसान नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने बताया कि अमेरिकी पक्ष की अत्यधिक मांगों के कारण बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का रुख कड़ा रहा। उन्होंने कहा कि शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा ईरान का अपना परमाणु कार्यक्रम न छोड़ना है। अमेरिका ने इसे अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव बताया था, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया।

बाजार पर ‘गैप डाउन’ ओपनिंग का खतरा
पिछले हफ्ते भारतीय बाजार में जबरदस्त रौनक देखी गई थी। सेंसेक्स 4,230 अंक और निफ्टी करीब 1,337 अंक चढ़कर बंद हुए थे। यह तेजी इस उम्मीद में थी कि युद्ध टल जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के नीचे बनी रहेंगी। लेकिन वार्ता विफल होने से अब यह पूरी बढ़त दांव पर है।

शेयर बाजार विशेषज्ञ हरिप्रसाद के अनुसार, निफ्टी इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सोमवार को बाजार एक बड़ी गिरावट के साथ खुल सकता है। जो निवेशक पिछले हफ्ते की तेजी का फायदा उठा रहे थे, उन्हें अब भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

इन फैक्टर्स पर भी रहेगी नजर
इस हफ्ते केवल युद्ध का तनाव ही नहीं, बल्कि कई अन्य मोर्चे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। सोमवार, 13 अप्रैल को खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) और मंगलवार को थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े आएंगे। इसके अलावा, विप्रो, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे भी इसी हफ्ते आने हैं। इतना ही नहीं, ध्यान रहे कि मंगलवार को बाबा साहेब अंबेडकर जयंती के कारण शेयर बाजार में कारोबार बंद रहेगा।

विदेशी निवेशकों की बेरुखी
बाजार के लिए एक और चिंता की बात विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 48,213 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। ऐसे में घरेलू निवेशकों के लिए सावधानी बरतना ही समझदारी होगी।

विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से अप्रैल के 10 दिन में 48,213 करोड़ रुपये निकाले

नई दिल्ली। अप्रैल महीने की शुरुआत से ही भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है। पहले 10 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब ₹48,213 करोड़ की निकासी कर ली है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

इससे पहले मार्च में भी विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड स्तर पर करीब ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो रहा। हालांकि फरवरी में उन्होंने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था, लेकिन इसके बाद रुख पूरी तरह बदल गया।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक एफपीआई कुल मिलाकर करीब ₹1.8 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं। केवल अप्रैल में ही 10 तारीख तक कैश मार्केट से ₹48,213 करोड़ बाहर निकल चुके हैं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि इस लगातार बिकवाली के पीछे वैश्विक कारण अहम हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल रिसर्च मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, मौजूदा हालात में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम ऊपर गए हैं, जिससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता फिर से बढ़ी है और यही वजह है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि वेस्ट एशिया के संघर्ष से पैदा हुआ ऊर्जा संकट, भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित दबाव और रुपये की लगातार कमजोरी ने एफपीआई को सतर्क बना दिया है। यही वजह है कि वे बाजार में खरीदारी से दूरी बनाए हुए हैं।

विजयकुमार के मुताबिक, इस समय दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार एफपीआई को ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं क्योंकि वहां कमाई की ग्रोथ भारत के मुकाबले बेहतर रहने की उम्मीद है। वहीं भारत में वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ अनुमान अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रहे हैं।

हालांकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की खबर आई, लेकिन इससे भी एफपीआई की बिकवाली पर कोई खास असर नहीं पड़ा।

एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकार जावेद खान ने कहा कि एफपीआई ने इस राहत भरी तेजी को बाजार से निकलने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। यानी जैसे ही बाजार में थोड़ी मजबूती आई, निवेशकों ने उसे एग्जिट के लिए सही समय माना।

खान के अनुसार, आगे एफपीआई का रुख बदल सकता है लेकिन इसके लिए कुछ अहम शर्तें पूरी होना जरूरी हैं। सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई का भरोसेमंद तरीके से दोबारा शुरू होना जरूरी है।

दूसरा, रुपये में स्थिरता आनी चाहिए। तीसरा, भारत की चौथी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि एफपीआई का रुख तेजी से बदल सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आर्थिक हालात उनके पक्ष में बनें।

सेंसेक्स की शीर्ष 8 कंपनियों की मार्केट कैप 4.13 लाख करोड़ बढ़ी, HDFC Bank आगे

नई दिल्ली। Market Cap: पिछले हफ्ते शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली, जिसका सीधा फायदा देश की बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर पड़ा। टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 8 कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,13,003.23 करोड़ रुपये बढ़ गया। इस बढ़त में सबसे ज्यादा फायदा एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक को हुआ।

बाजार की बात करें तो बीते सप्ताह बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 4,230.7 अंक यानी 5.77 प्रतिशत चढ़ा। वहीं एनएसई निफ्टी में भी 1,337.5 अंक यानी 5.88 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई।

शेयर बाजार में टॉप-10 कंपनियों के समूह में इस हफ्ते मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में जोरदार बढ़त दर्ज की गई, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस को नुकसान झेलना पड़ा। एचडीएफसी बैंक ने इस दौरान सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की। इसका मार्केट कैप 91,282.67 करोड़ रुपये बढ़कर 12,47,478.57 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन में भी मजबूत उछाल देखने को मिला। कंपनी का बाजार मूल्य 76,036.36 करोड़ रुपये बढ़कर 9,46,741.85 करोड़ रुपये हो गया। वहीं बजाज फाइनेंस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और इसका मार्केट कैप 60,980.35 करोड़ रुपये बढ़कर 5,75,206.47 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

लार्सन एंड टुब्रो के बाजार मूल्यांकन में 47,624.97 करोड़ रुपये की तेजी आई और यह बढ़कर 5,44,736.59 करोड़ रुपये हो गया। भारती एयरटेल का मार्केट कैप भी 45,873.43 करोड़ रुपये बढ़कर 10,66,293.69 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ कंपनियों का मार्केट कैप बढ़ा तो कुछ में गिरावट दर्ज की गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मार्केट कैप 43,614.67 करोड़ रुपये बढ़कर 9,84,629.98 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मूल्यांकन 26,303.49 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 9,13,331.92 करोड़ रुपये हो गया।

हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में भी मजबूती दिखी और यह 21,287.29 करोड़ रुपये बढ़कर 5,06,477.89 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके उलट इंफोसिस के मार्केट कैप में 3,285.03 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 5,24,124.40 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह Reliance Industries का मूल्यांकन भी 947.28 करोड़ रुपये कम हो गया, हालांकि कंपनी अब भी सबसे ज्यादा वैल्यू वाली घरेलू कंपनी बनी हुई है।

बाजार मूल्यांकन के लिहाज से टॉप कंपनियों की सूची में रिलायंस के बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टूब्रो, इंफोसिस और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

बिना समझौते के लौटे ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, क्या फिर छिड़ेगी जंग

इस्लामाबाद। US-Iran War Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही बातचीत खत्म हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो सका।

इसके पहले शनिवार देर रात तक दोनों के बीच 14 घंटे का बातचीत का मैराथन दौर चला था। बैठक में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही और लेबनाम में युद्ध को लेकर टकराव रहा। इस बैठक की मेजबानी पाकिस्तान ने की।

अमेरिका की ओर से बातचीत की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे। उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी थे। ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ ने किया। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी डेलीगेशन में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई लड़ाई में 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ है।

ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने छोड़ा पाकिस्तान
अमेरिका के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान से चला गया है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी है। रविवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस यह कहते हुए इस्लामाबाद से वापस चले गए कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो पाया है। वेंस ने कहा था कि ईरान ने वॉशिंगनट की मांगों को ठुकरा दिया है। उन्होंने बताया कि सबसे अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है, जिसे ईरान ने छोड़ने का संकेत नहीं दिया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से रवाना
ईरान के साथ बातचीत टूटने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रविवार को पाकिस्तान से रवाना हो गए। कुछ देर पहले ही उन्होंने पुष्टि की थी कि ईरान के साथ बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है और हम अमेरिका वापस जा रहे हैं। पाकिस्तानी समयानुसार वेंस सुबह 7:08 बजे ‘एयर फोर्स टू’ में सवार हुए।

ईरान ने हमारी शर्तें मानने से मना किया:जेडी वेंस
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। अमेरिकी दल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यह जानकारी दी है। वेंस ने कहा कि हम अमेरिका वापस जा रहे हैं, क्योंकि ईरान ने हमारी शर्तें मानने से मना कर दिया है। वेंस ने कहा कि हम पिछले 21 घंटे से इस काम में लगे हुए हैं और हमने ईरान के साथ कई अहम बातचीत की है। यह अच्छी खबर है।

पाकिस्तान मध्यस्थता जारी रखेगा: डार
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। डार ने कहा कि उन्होंने और पाकिस्तान की आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत कराने की सार्थक कोशिश की। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान उम्मीद करता है कि दोनों पक्ष क्षेत्र में शांति और समृद्धि हासिल करने के लिए सकारात्मक भावना से बातचीत करना जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वार्ता में आगे भी मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा।