निवेशकों के एक दिन में 9 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1065 अंक लुढ़क कर बंद

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नई दिल्ली। Stock Market Closed :शेयर मार्केट में मंगलवार को भूचाल आ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों बुरी तरह धड़ाम हो गए। सेंसेक्स 1065.71 की गिरावट के साथ 82,180.47 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 353 अंकों की गिरावट आई। इस गिरावट के साथ निफ्टी 25,232.50 अंक पर बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के एक दिन में करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) मामूली गिरावट के साथ 83,207 अंक पर खुला। खुलने के बाद इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली और दोपहर में बिकवाली हावी हो गई। अंत में सेंसेक्स 1065.71 अंक या 1.28 फीसदी की बड़ी गिरावट लेकर 82,180.47 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) 25,580 पर सपाट खुला और खुलने के कुछ देर में 25,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से यह 353 अंक या 1.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,232.50 पर बंद हुआ।

टॉप लूजर्स एंड गेनर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में इटरनल के शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर बंद हुए। बजाज फाइनेंस में 3.88 फीसदी की गिरावट आई। इसके अलावा सन फार्मा, इंडिगो, ट्रेंट लिमिटेड, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील और अदाणी पोर्ट्स के शेयर प्रमुख रूप से गिरावट में रहे। दूसरी तरफ, सिर्फ एचडीएफसी बैंक के शेयर हरे निशान में रहे।

सेक्टोरल मोर्चे पर सभी इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। यह 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 2.56 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 2.06 प्रतिशत में गिरावट देखी गई। ब्रोडर मार्केटस में में और भी ज्यादा गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 2.62 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 2.85 प्रतिशत गिर गया।

मार्केट में गिरावट के कारण

  1. आईटी शेयर लुढ़के
    सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज्यादा असर हुआ, जिससे प्रमुख सूचकांक दो महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गए। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% गिर गया और दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इस सेक्टर के सभी शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। विप्रो के शेयर लगभग 3% गिर गए। LTIMindtree के शेयर लगभग 6% लुढ़क गए। कंपनी ने तिमाही मुनाफे में गिरावट की सूचना दी थी, जिसका कारण नए श्रम कानूनों का एकमुश्त प्रभाव बताया गया।
  2. वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ
    वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ के कारण भी दुनियाभर के बाजार में गिरावट आई। इससे भारतीय मार्केट पर भी दबाव बढ़ा। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक सूचकांक 0.3% गिर गया। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ के आठ सदस्य देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी। अमेरिका का यह कदम ग्रीनलैंड पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे निवेशक अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों में फिर से दरार के रूप में देख रहे हैं।
  3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
    विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते भी बाजार में गिरावट आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दसवें सत्र में इक्विटी की शुद्ध बिकवाली की। सोमवार 19 जनवरी को FIIs ने लगभग 3,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उनकी सतर्कता को दर्शाता है।
  4. सुरक्षित संपत्तियों की ओर झुकाव
    कीमती धातुओं में तेज उछाल ने वैश्विक बाजारों में बढ़ती जोखिम से बचने की प्रवृत्ति का संकेत दिया। जैसे-जैसे व्यापार तनाव बढ़ा, निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागे। मंगलवार को सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, जबकि चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बनी रही। यह तब हुआ जब ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे वैश्विक भावना और खराब हो गई।
  5. तकनीकी संकेतक बाजार
    तकनीकी संकेत बताते हैं कि भले ही प्रमुख सूचकांकों को निकट अवधि में कुछ सहारा मिला हो, लेकिन बाजार की समग्र संरचना कमजोर बनी हुई है। विश्लेषकों ने ऐसे प्रमुख स्तरों को उजागर किया है जो यह निर्धारित कर सकते हैं कि हालिया गिरावट स्थिर होगी या और गहरी होगी।