मुकुंदरा में बांधवगढ़ की बाघिन का आगमन वन्यजीवों के लिए जेनेटिक गेम चेंजर: हाड़ा

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कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के स्वर्णिम भविष्य की दिशा में आज एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई है। पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष, देवव्रत सिंह हाड़ा ने मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाई गई 3.5 वर्षीय बाघिन के सफल स्थानांतरण पर गहरा हर्ष व्यक्त किया है। हाड़ा ने इसे केवल एक बाघिन का आगमन नहीं, बल्कि राजस्थान के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक ‘साइंटिफिक माइलस्टोन’ बताया है।

जेनेटिक बॉटलनेक का वैज्ञानिक समाधान
मुकुंदरा जैसे उभरते टाइगर रिजर्व के लिए आनुवंशिक विविधता सबसे महत्वपूर्ण कारक है। एक ही रक्त रेखा के बाघों के बीच प्रजनन से ‘इनब्रीडिंग डिप्रेशन’ का खतरा बना रहता है, जो बाघों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है।

मजबूत ब्लडलाइन
बांधवगढ़ की यह बाघिन मुकुंदरा में एक नई ‘हेरेडिटरी लाइन’ (वंशानुगत रेखा) लेकर आई है, जिससे यहाँ का टाइगर कुनबा आनुवंशिक रूप से अधिक लचीला और शक्तिशाली बनेगा। यह स्थानांतरण ‘जेनेटिक बॉटलनेक’ को कम करने और दीर्घकालिक रूप से सक्षम बाघ आबादी स्थापित करने के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है।

राजे के विजन की सफलता
इस अवसर पर हाड़ा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ऐतिहासिक योगदान और इस सफल स्थानांतरण के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को स्थापित करने और इसे एक सुरक्षित भविष्य देने में वसुंधरा राजे का संकल्प सर्वोपरि रहा है। आज मुकुंदरा में जो 7 बाघों का परिवार फल-फूल रहा है, वह उनके दूरगामी विजन और अटूट इच्छाशक्ति का ही मूर्त रूप है।