एफपीआई के प्रवाह पर निर्भर करेगी इस सप्ताह शेयर बाजार की चाल

0
131

नई दिल्ली। घरेलू कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों का सीजन समाप्त होने के करीब है। ऐसे में इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा काफी हद तक विदेशी संकेतकों तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के प्रवाह पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। विश्लेषकों ने कहा कि डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान की वजह से भी इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा।

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, ”वैश्विक रुख और वायदा एवं विकल्प खंड में निपटान की वजह से इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है। हालांकि, एफपीआई ने पिछले कुछ दिन में खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई है। पिछले सप्ताह थोक में कुछ खरीद हुई थी। ऐसे में बाजार की दृष्टि से उनका रुख महत्वपूर्ण रहेगा।”

एफपीआई पिछले सप्ताह शुद्ध लिवाल रहे और उन्होंने सप्ताह के दौरान शुद्ध रूप से 7,600 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इससे पिछले सप्ताह (7 से 12 फरवरी) के दौरान उन्होंने 3,920 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। सप्ताह के दौरान बाजार भागीदारों की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल के दाम और रुपये के उतार-चढ़ाव पर भी रहेगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (तकनीकी शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ”सभी प्रमुख घटनाक्रम पीछे छूट चुके हैं। ऐसे में भविष्य के संकेतकों के लिए वैश्विक बाजार विशेषरूप से अमेरिकी बाजार के प्रदर्शन पर सभी की निगाह रहेगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की चाल से भी बाजार को दिशा मिलेगी।” पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 319.87 अंक या 0.52 प्रतिशत के लाभ में रहा। प्रमुख वृहद आर्थिक आंकड़े जारी होने के बीच एफपीआई की लिवाली से बीते सप्ताह बाजार की धारणा सकारात्मक रही।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ”हालांकि, उम्मीद से कहीं ऊंची मुद्रास्फीति तथा अमेरिका के रोजगार बाजार के मजबूत आंकड़ों से पिछले सप्ताह के अंत में बाजार नीचे आया। इससे मौद्रिक रुख को और सख्त किए जाने को लेकर चिंता बढ़ी है।” नायर ने कहा कि घरेलू बाजार में किसी प्रमुख घटनाक्रम के अभाव में इस सप्ताह बाजार की चाल वैश्विक रुख से तय होगी।