ईरान युद्ध से क्रूड ऑयल 110 डॉलर पार, क्या अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे

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नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में फैले तनाव का असर क्रूड ऑयल पर पड़ रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत साढ़े तीन साल बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

कुछ ही देर बाद यह कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। कुछ ही देर में इसमें जबरदस्त उछाल आया। युद्ध के चलते प्रोडक्शन और शिपिंग प्रभावित होने से आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं अब डर है कि भारत में एलपीजी के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेट क्रूड (Brent Crude) की कीमत सोमवार को ट्रेडिंग शुरू होने के कुछ ही समय बाद 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। सुबह 9:15 बजे यह करीब 114 डॉलर प्रति बैरल पर थी। शुक्रवार को तेल का भाव 92.69 डॉलर पर बंद हुआ था। ऐसे में इसमें 21 फीसदी से ज्यादा उछाल आया।

अमेरिकी तेल का भाव भी आसमान पर

सिर्फ ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में ही तेजी नहीं आई। सोमवार को अमेरिकी हल्का कच्चा तेल West Texas Intermediate (WTI Crude) भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह शुक्रवार के 90.90 डॉलर पर बंद हुआ था। सोमवार सुबह 9:15 बजे यह 23 फीसदी की तेजी के साथ 114 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

  • युद्ध के कारण आपूर्ति पर असर
  • पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 36% और ब्रेंट क्रूड में 28% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष है। इस युद्ध ने तेल और गैस के प्रोडक्शन तथा सप्लाई से जुड़े अहम क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
  • इस युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।
  • दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% (करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन) सामान्य तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता है।
  • यह जलडमरूमध्य ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्थित है। ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है।
  • इस मार्ग से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहराइन, यूएई और ईरान से तेल व गैस की आपूर्ति होती है।

प्रोडक्शन में हुई कटौती
निर्यात में कमी के कारण इराक, कुवैत और यूएई ने ऑयल प्रोडक्शन कम कर दिया है क्योंकि स्टोरेज टैंकों में भंडारण तेजी से भर रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान, इजरायल और अमेरिका की ओर से तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले भी किए गए हैं, जिससे आपूर्ति संकट और गहरा गया है।