Venezuela Crisis: वेनेजुएला का तेल कब्जे में लेकर भारत को आंख दिखा रहा अमेरिका

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नई दिल्‍ली। अंतरराष्‍ट्रीय तेल बाजार में हलचल है। अमेरिका के हाथ में वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का कंट्रोल आ जाना इसकी सबसे बड़ी वजह है। वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल तेल का भंडार है। यह दुनिया के कुल भंडार का लगभग 17% है। वॉल्‍यूम सऊदी अरब से भी ज्‍यादा है।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अपने इरादे पहले ही जाहिर कर चुके हैं। अब अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल का खेल सेट करेंगी। इस बीच एक और चीज हुई है। ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है।

उसे कहा गया है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद करे। अगर भारत ऐसा करता है तो उस पर टैरिफ का और बोझ डाला जाएगा। भारत अगर अमेरिका के कहे पर चलता है तो यह मैथ और केमिस्‍ट्री दोनों को बदल देगा। भारत की पिक्‍चर में रूस की जगह अमेरिका छा जाएगा।

वैसे, ज्‍यादातर अधिकारियों और जानकारों का फिलहाल मानना है कि भारत पर वेनेजुएला संकट का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। इसकी वजह वेनेजुएला से भारत के तेल आयात का बहुत कम होना है।

उनके मुताबिक, अमेरिकी एक्‍शन और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से भारत के वित्तीय समीकरणों पर भी कोई असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यह इसलिए और अहम है क्‍योंक‍ि सीन में अमेरिका की एंट्री हो गई है।

भारत के लिए तेल का खेल बहुत मैटर करता है। वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी बड़ा बदलाव भारत के वित्तीय घाटे, चालू खाते के घाटे और महंगाई को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।

अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच भारत ने 17.81 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया। इसमें रूस सबसे बड़ा सप्लायर रहा। उसने 6 करोड़ टन तेल भारत को भेजा। अमेरिका ने भी भारत को 1.3 करोड़ टन तेल की सप्‍लाई की। इसके अलावा, भारत ने इराक, सऊदी अरब, यूएई, नाइजीरिया और कुवैत से भी कच्चा तेल खरीदा।

एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, वेनेजुएला के पास दुनिया के तेल भंडार का लगभग 18% हिस्सा है। यह सऊदी अरब (लगभग 16%), रूस (लगभग 5-6%) या अमेरिका (लगभग 4%) से भी ज्यादा है। वेनेजुएला के पास अकेले अमेरिका और रूस के संयुक्त तेल भंडार से भी ज्यादा कच्चा तेल है।

वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीदार रहा है भारत
थिंक टैंक जीटीआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2000 और 2010 के दशक में वेनेजुएला का प्रमुख खरीदार था। ONGC Videsh जैसी भारतीय कंपनियों की ओरिनोको बेल्ट में हिस्सेदारी थी। लेकिन, 2019 से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण द्विपक्षीय जुड़ाव काफी कमजोर हो गया। इन प्रतिबंधों ने भारत को तेल आयात कम करने और वाणिज्यिक गतिविधियों को सीमित करने के लिए मजबूर किया ताकि सेकेंडरी सैंक्‍शन से बचा जा सके। नतीजतन, वेनेजुएला के साथ भारत का व्यापार अब बहुत कम और घट रहा है।