वाशिंगटन। Us-India Trade Deal: अमेरिका के रिपब्लिकन पार्टी के दो सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ किसी भी संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में दालों के लिए अनुकूल प्रावधान सुनिश्चित करने की अपील की है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता अब भी ठोस नतीजे से दूर है।
यह घटनाक्रम भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हालिया फोन बातचीत के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई थी।
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सीनेटर केविन क्रेमर और स्टीव डेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे पत्र में कहा कि जैसे-जैसे भारत के साथ व्यापार वार्ताएं आगे बढ़ें, अमेरिकी कृषि उत्पादकों खासकर नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इन दोनों राज्यों को अमेरिका में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक बताया गया है, जिनमें मटर भी शामिल हैं।
पत्र में सीनेटरों ने उल्लेख किया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता है और वैश्विक खपत में उसकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। इसके बावजूद, भारत ने अमेरिकी दालों पर भारी आयात शुल्क लगा रखे हैं।
पत्र के अनुसार, भारत में सबसे अधिक खपत वाली दालों में मसूर, चना, सूखी बीन्स और मटर शामिल हैं, लेकिन इन पर अमेरिका से आयात के लिए ऊंचे टैरिफ लागू हैं।
सीनेटरों ने 30 अक्तूबर 2025 को भारत द्वारा पीली मटर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के फैसले का भी हवाला दिया, जो 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हुआ। उन्होंने कहा कि इन अनुचित टैरिफ के कारण अमेरिकी दाल उत्पादकों को भारतीय बाजार में गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पत्र में ट्रंप के पहले कार्यकाल का जिक्र करते हुए सीनेटरों ने कहा कि वर्ष 2020 में व्यापार वार्ताओं के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर उनका पत्र स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था। उन्होंने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के ट्रंप के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिकी किसान वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता रखते हैं।
दालों की समस्या हल करने से दोनों देशों को होगा फायदा
सीनेटरों के मुताबिक, अगर दालों पर टैरिफ को लेकर भारत से बातचीत होती है तो इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूती मिलेगी और अमेरिकी उत्पादकों के साथ-साथ भारतीय उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
ट्रंप ने भारत पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ
गौरतलब है कि 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में नया तनाव देखने को मिला। इनमें रूस से तेल खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों देश अब तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता क्यों अटका हुआ
- कृषि क्षेत्र दोनों देशों के बीच मतभेद का एक प्रमुख बिंदु बना हुआ है।
- अमेरिका भारत के कृषि बाजार में अधिक पहुंच की मांग करता रहा है, जबकि भारत इसे लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है।
- भारत में करीब 40-45 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है, जहां अधिकांश किसान दो हेक्टेयर से कम भूमि पर खेती करते हैं।
- ऐसे में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने से छोटे और सीमांत किसानों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जाती है।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव का दावा
इस बीच, पिछले सप्ताह अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रंप को फोन न किए जाने के कारण 2025 में व्यापार समझौता संभव नहीं हो पाया। हालांकि, भारत सरकार ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया था।

